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सरकार की खेवनहार का ठप्पा धोएंगे सपा, बसपा

Tue, 19 Feb 2013 09:24 PM IST
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया Updated Tue, 19 Feb 2013 09:24 PM IST
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sp bsp will not take normal attitude on upa government

समय से पहले चुनाव की आशंका को देखते हुए सपा और बसपा संसद के बजट सत्र में यूपीए सरकार की खेवनहार का ठप्पा धोने की तैयारी में हैं। सरकार के दोनों साथी लोकसभा चुनाव को देखते हुए बजट सत्र में कांग्रेस के प्रति नरम दिखना नहीं चाहते।

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दोनों ने इस बार बेहद मुश्किल परिस्थितियों में ही सरकार का परोक्ष रूप से साथ देने की रणनीति बनाई है। दोनों पार्टियों भ्रष्टाचार और महंगाई के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए तैयार हैं। साथ ही दोनों ने कई अहम विधेयकों का रास्ता रोकने की तैयारी कर ली है।
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सपा ने हेलीकॉप्टर सौदा, कोयला घोटाला से लेकर लोकपाल बिल तक के रास्ते में कांटे बिछाने का मन बना लिया है। वहीं, बसपा प्रमोशन में आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर सरकार की मुसीबत बढ़ाएगी।
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सपा और बसपा दोनों को लग रहा है कि यूपीए सरकार अक्तूबर-नवंबर में लोकसभा चुनाव करवा सकती है। मुलायम सिंह यादव और मायावती अपने कार्यकर्त्ताओं और नेताओं को समय से पहले चुनाव को लेकर आगाह कर चुके हैं।

दोनों पार्टी के शीर्ष स्तरीय नेताओं के मुताबिक बजट सत्र में सरकार के साथ न दिखने की पूरी कोशिश की जाएगी। बेहद विपरीत परिस्थितियों में ही मदद करने पर विचार किया जाएगा। वे भी सीधे तौर पर नहीं, बल्कि सदन से विरोध के साथ वाकआउट के जरिए मदद करने पर विचार किया जाएगा।

सपा महासचिव नरेश अग्रवाल कहते हैं कि कांग्रेस इस साल अक्तूबर में ही लोकसभा चुनाव कराने की तैयारी में है। इसलिए वे बेहद जल्दबाजी में बड़े फैसलों (कसाब, अफजल और आर्थिक सुधार) को मूर्त रूप दे रही है।

सपा ने बुधवार को संसद के आगामी बजट सत्र में अपनी रणनीति को धार देने के लिए संसदीय दल की बैठक बुलाई है। सूत्रों का कहना है कि मुलायम सिंह यादव बैठक में सांसदों को सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपना कर चुनावों के लिए कमर कसने के लिए कह सकते हैं।

बसपा भी कुछ इसी तरह की रणनीति पर काम कर रही है। बसपा के एक वरिष्ठ नेता कहते है कि मायावती का पूरा ध्यान प्रमोशन में आरक्षण विधेयक पर रहेगा। इसके जरिए बसपा सुप्रीमो आगामी चुनाव के मद्देनजर अपने दलित वोट बैंक को संदेश देना चाहती हैं कि वह उनके लिए संसद में कांग्रेस और सपा के खिलाफ संघर्ष कर रही हैं।


सूत्र कहते है कि अगर यह विधेयक सपा के विरोध के चलते लोकसभा में पारित नहीं होता, तो इस स्थिति में बसपा संसद में अपना विरोध जताने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।

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