क्यों मोदी के साथ आए मुलायम-माया?
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भाषण में विरोध और संकट में सहयोग। यूपीए 2 के पांच साल के कार्यकाल के दौरान सपा और बसपा को लगातार इसी भूमिका में देखा गया था। तब यह कहा जाता था कि सीबीआई जांच में घिरे सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और बसपा प्रमुख मायावती मजबूरन यूपीए के हर फैसले का समर्थन करने को बाध्य हैं। अब नई लोकसभा में भी वही सिलसिला शुरू होता दिख रहा है।
दोनों ही सरकार के कार्यकाल में अंतर बस इतना है कि भाजपा को सपा-बसपा के अलावा एक तीसरा खेवनहार तृणमूल कांग्रेस के रूप में मिला है। माना जा रहा है कि सीबीआई के पास अब भी तकनीकी रूप से आय से अधिक संपत्ति मामले में मुलायम सिंह और मायावती के खिलाफ मामला बनाए रखने के कई रास्ते हैं, जबकि शारदा चिट फंड घोटाले में सुप्रीम कोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई दिग्गज नेता बुरी तरह घिर गए हैं।
यही कारण है कि बजट सत्र के शुरुआती दो दिनों तक आक्रामक तेवर अपनाने वाले तृणमूल कांग्रेस के नेता अचानक सदन में सरकार का सहयोग करते दिख रहे हैं।
सपा, बसपा और तृणमूल मोदी सरकार के खेवनहार
नई सरकार को बजट सत्र में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव के रूप में अध्यादेश जारी कर नृपेंद्र मिश्र की नियुक्ति के मामले में अब तक एक ही बार अग्नि परीक्षा देनी पड़ी है। पहले लगा था कि विपक्ष के आक्रामक तेवरों के कारण सरकार को खासतौर पर राज्यसभा में अध्यादेश को कानूनी जामा पहनाने के लिए लाए जाने वाले बिल को पारित कराने में परेशानी झेलनी पड़ेगी, मगर लोकसभा में आश्चर्यजनक रूप से अध्यादेश को वापस लाने के लिए संकल्प पेश करने वाली तृणमूल ने जहां यूटर्न लेकर बिल का समर्थन किया, वहीं सदन के बाहर तीखा हमला बोलने वाली सपा भी सरकार के बचाव में खड़ी हो गई।
इन दो दलों के अलावा बसपा का साथ लेकर सरकार राज्यसभा में भी इस बिल को पारित कराने में कामयाब हो गई। इसके अलावा हाल ही में एससी-एसटी संशोधन बिल के मामले में भी इन दलों का सरकार को साथ मिला। चूंकि इससे संबंधित अध्यादेश यूपीए के कार्यकाल में जारी हुआ था, इसलिए नई सरकार इस अध्यादेश को कानूनी जामा नहीं पहनाना चाहती थी। स्पीकर ने जब इस बिल को स्थायी समिति को भेजने का निर्देश दिया तो सपा और तृणमूल ने कांग्रेस की मदद के गुहार के बावजूद विरोध दर्ज नहीं कराया।
उधर, केंद्र से अधिक से अधिक मदद की रणनीति के तहत बीजद और अन्नाद्रमुक भी नई सरकार से रिश्ते खराब करने के मूड में नहीं हैं।