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सपा-बसपा में संकटमोचक बनने की होड़

Tue, 15 Jul 2014 05:46 PM IST
Updated Tue, 15 Jul 2014 05:46 PM IST
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sp and bsp support to modi govt in parliament

अब इसे सीबीआई के चाबुक का डर कहें या फिर मौकापरस्त सियासत का उदाहरण। नरेंद्र मोदी के धुर विरोधी सपा और बसपा दोनों में एनडीए सरकार के संकटमोचक की भूमिका निभाने की होड़ मच गई है।

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प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र की नियुक्ति के संबंध में बसपा सुप्रीमो मायावती ने मोदी सरकार का समर्थन करने का ऐलान किया तो सपा भी इस मुद्दे पर तुरंत सरकार के साथ खड़ी हो गई। दोनों पार्टियों ने कांग्रेस का विरोध करना शुरू कर दिया है।
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सपा और बसपा के रणनीतिकार मोदी सरकार से संबंध बेहतर बनाने के पक्षधर हैं। इसलिए संसद के अंदर वे सरकार से टकराव लेने के मूड में नहीं हैं।

सरकार से झगड़ा मोल नहीं लेना चाहती सपा-बसपा

sp and bsp support to modi govt in parliament

सूत्रों का कहना है कि मुलायम और मायावती दोनों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले चल रहे हैं। इन मामलों की सीबीआई जांच चल रही है।

माना जा रहा है कि इन मामलों को लेकर ही दोनों पार्टियों ने सरकार से झगड़ा मोल लेना मुनासिब नहीं समझा है। सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि अपनी पसंद का अधिकारी रखना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है। इसे लेकर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के विरोध को गैर जरूरी बताया।

जबकि मायावती ने कहा कि केंद्र को अपने अधिकारियों का चयन करने का अधिकार है कि वे किस प्रकार से सरकार चलाना चाहते हैं। बसपा और सपा के समर्थन में आने के बाद अब राज्यसभा में मिश्र से संबंधित अध्यादेश को पारित कराना सरकार के लिए आसान हो गया है।

लोकसभा में यह अध्यादेश पारित हो चुका है, जबकि राज्यसभा में भाजपा के पास बहुमत नहीं है। मगर ऐन वक्त पर तृणमूल कांग्रेस के सरकार के समर्थन करने के बाद सपा और बसपा के भी पाला बदलने से अध्यादेश का पास होना तय माना जा रहा है।

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