जेटली का फरमान, जल्द EMI घटाएं सभी बैंक
आम लोगों और कारोबारियों के लिए सस्ते कर्ज और ईएमआई का रास्ता जल्द साफ हो सकता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के बैंकों से कहा है कि वे रिजर्व बैंक की ओर से की गई बैंक दरों में कटौती का लाभ आम ग्राहकों को पहुंचाने में देर न करें।
शुक्रवार को एक बैठक में उन्होंने बैंक प्रमुखों से सीधे सवाल किया कि रिजर्व बैंक इस साल तीन बार रेपो दर में कटौती कर चुका है फिर भी बैंक कर्ज सस्ता क्यों नहीं कर रहे हैं। जून में रिजर्व बैंक की ओर से चौथाई फीसदी की कटौती को मिला कर रेपो रेट में 0.75 फीसदी की कटौती हो चुकी है।
दो जून को रेपो रेट में कटौती के बाद कुछ बैंकों ने बेस रेट घटाने का ऐलान तो किया था लेकिन ज्यादातर बैंकों ने लोन दरों में कटौती नहीं की। बेस रेट वह दर है, जिससे नीचे किसी बैंक को कर्ज देने की अनुमति नहीं होती।
जेटली की बैंको से दो टूक
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्त संस्थानों के प्रमुखों के साथ समीक्षा बैठक में वित्त मंत्री ने सबसे दो टूक पूछा कि जब रिजर्व बैंक ने रेपो रेट घटाया तो आपने ब्याज दर में क्यों नहीं कमी की।
हालांकि इस पर बैंकों ने भी अपना तर्क रखा। बैंकों का कहना है कि जब रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की तो उस हिसाब से उन्होंने ब्याज दर में बढ़ोतरी नहीं की ताकि ग्राहकों को राहत मिले।
इसलिए अभी जब रेपो रेट में कटौती हुई तो उस हिसाब से ब्याज दर कम नहीं किए गए। इसके साथ ही बैंकरों ने कहा कि बेस रेट घटाने से सभी किस्म की जमाओं पर भी ब्याज दर में कटौती हो जाएगी। इससे बैंक जमा पर असर पड़ेगा। कुछ बैंकों ने अपने बैलेंस शीट का हवाला देते हुए कहा कि फिलहाल रेट कट करने में वह सक्षम नहीं हैं।
बैंक जल्द घटाएं रेट
अरुण जेटली ने सभी बैंकरों को निर्देश दिया कि यथाशीघ्र सभी बैंक रेपो रेट में कटौती के अनुपात में बेस रेट में कटौती करे। इस पर किसी बैंक ने कहा कि दो तीन दिन में ऐसा कर देंगे तो किसी बैंक ने कुछ सप्ताह का वक्त मांगा।
एक सरकारी बैंक के अध्यक्ष ने अमर उजाला के साथ बातचीत में बताया कि उनके बैंक ने बेस रेट में 0.25 फीसदी की कटौती पहले ही कर दी है। अब वित्त मंत्री से निर्देश मिलने के बाद फिर से अच्छी कटौती करने जा रहे हैं। इसके बाद उनके यहां सभी तरह के लोन का रेट घट जाएगा। हालांकि इससे बैंक में जमाओं पर भी ब्याज दर घट जाएगी जिससे लोग बैंक में पैसे रखना पसंद नहीं भी कर सकते हैं।
तीन कटौतियां
15 जनवरी - 0.25 फीसदी
4 मार्च - 0.25 फीसदी
2 जून - 0.25 फीसदी
2 जून की रेपो रेट घटाने के बाद बेस रेट में कटौती
भारतीय स्टेट बैंक - 15 बेसिस प्वाइंट
इलाहाबाद बैंक - 30 बेसिस प्वाइंट
पंजाब एंड सिंध बैंक - 25 बेसिस प्वाइंट
देना बैंक - 25 बेसिस प्वाइंट
बैंक कह रहे हैं कि कर्ज की लागत नहीं घटी है इसलिए इसे सस्ता कैसे करें। बैंकों की यह दलील कोरी बकवास है। बैंकों को रिजर्व बैंक की ओर से बैंक दरों में की गई कटौती का लाभ आम उपभोक्ताओं को पहुंचाना होगा।
- इस साल दूसरी मौद्रिक समीक्षा के दौरान रघुराम राजन का बयान