जमीनी हकीकत का जायजा लेने में जुटीं सोनिया गांधी

लखनऊ/रायबरेली/अमेठी/अखिलेश वाजपेयी Updated Fri, 09 Nov 2012 09:10 AM IST
sonia gandhi wants to know ground reality
सोनिया गांधी ने पहले दिन अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों का शिलान्यास व लोकार्पण करके लोगों को कांग्रेस के करीब लाने की कोशिश की तो दूसरे दिन उनकी इस कोशिश को परवान चढ़ाने दिल्ली से आई प्रियंका गांधी और अपने क्षेत्र अमेठी के दौरे पर आए राहुल गांधी ने जमीनी काम पर पूरा ध्यान दिया। इससे यह साफ हो गया कि  सोनिया को ही नहीं बल्कि राहुल व प्रियंका के दिलों में विधानसभा चुनाव के झटके के घाव अभी हरे हैं। उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में कांग्रेस की फसल सूखने व बंजर हो रही जमीन की चिंता है।

इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को रायबरेली के भुएमऊ गेस्ट हाउस में ठहरी सोनिया ने आम लोगों से मुलाकात के साथ दिन की शुरुआत की। दूसरे दिन भी सोनिया ने पहले दिन की तरह दूसरे दिन भी जिला अनुश्रवण समिति की बैठक के जरिये यही संदेश देने की कोशिश की कि विकास और कल्याण सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है। इसलिए बैठक में सपा विधायक डॉ. मनोज पांडेय ने जब रायबरेली में एम्स के मुद्दे पर चर्चाओं, रायबरेली के लिए सीवर लाइन का पैसा न मिलने, इंदिरा गांधी द्वारा 1981-82 में घोषित सीवेज ट्रीटमेंट आज तक न लग पाने, प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में गड़बड़ी और इंदिरा आवासों का कोटा कम होने जैसे मामले उठाए तो सोनिया को रायबरेली की सीवर लाइनें बदलने के लिए केंद्र से 400 करोड़ रुपये की मदद के ऐलान में एक क्षण भी नहीं लगा। लोगों को ताज्जुब हुआ कि 2008 में भेजे जिस प्रस्ताव पर अब तक चुप्पी साधे बैठी केंद्र की सरकार इतनी उदार कैसे हो गई।

लोग इस माथापच्ची में ही थे कि सोनिया के मुंह से निकला, एम्स रायबरेली में ही बनेगा। प्रदेश के लिए इंदिरा आवासों का भी कोटा बढ़ेगा। केंद्रीय योजनाओं से होने वाले कामों की देखरेख को भी मदद मिलेगी और क्षेत्र पंचायत सदस्यों को मनरेगा से काम कराने का अधिकार भी दिया जाएगा। लोग चकराकर रह गए। पहले तो मैडम इतना उदार नहीं रहती थीं। सभी की समझ में आ गया कि यह सब केंद्र व राज्य सरकार के रिश्तों व नए सियासी समीकरणों का कमाल है। इसके जरिए कांग्रेस लोकसभा चुनाव में यूपी के विकास में अपने योगदान का संदेश देने की कोशिश कर रही है।

राहुल और प्रियंका ने कार्यकर्ताओं से किया सीधा संवाद
सोनिया ने जहां अपने संसदीय क्षेत्र में कोई मौका ऐसा नहीं छोड़ा जो जनता के बीच कांग्रेस की काम करने वाली पार्टी या सरकार की छवि बना सके तो ठीक इसके विपरीत राहुल गांधी बृहस्पतिवार को अपने क्षेत्र में सिर्फ जमीन पुख्ता करने की कोशिश में जुटे रहे। कोई ऐलान नहीं किया। ठीक यही काम रायबरेली में प्रियंका ने किया। दोनों ने अपने-अपने यहां जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं से बातचीत करके उनसे कांग्रेस की जमीन का नापजोख करने की कोशिश की। यह जानने पर पूरा जोर दिया कि कहां पर कांग्रेस की हालत कैसी है। इसे समझा भी जा सकता है।

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भले ही पूरे प्रदेश में बहुत बढ़िया प्रदर्शन न कर पाई हो लेकिन रायबरेली व अमेठी का झटका इन नेताओं को काफी चिंता में डालने वाला रहा है। इन सबको अपनी साख का सवाल भी साल रहा है। लोकसभा चुनाव में इन दोनों इलाकों में डर सता रहा है। इनकी समझ में नहीं आर रहा है कि चूक कहां हुई जिससे रायबरेली संसदीय सीट में एक भी कांग्रेस के हिस्से में नहीं आई तो अमेठी में भी बमुश्किल एक सीट तिलोई ही मिल पाई।

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