हार के टैग से सोनिया ने राहुल को बचाया!
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आखिरकार राहुल गांधी पर हार का टैग लगने से बचा लिया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी के पीएम पद के उम्मीदवार नहीं होंगे।
सोनिया गांधी ने पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए राहुल को पीएम उम्मीदवार बनाने पर तुले कार्यसमिति की बैठक में शामिल एक धड़े को निराश कर दिया।
हालांकि, तमाम दावों और अटकलों के बावजूद पार्टी और यूपीए सरकार की वर्तमान खस्ता हालत को देखते हुए इसी तरह की घोषणा होने की उम्मीद पहले से ही थी।
पार्टी अब राहुल पर होगी केंद्रित
चूंकि पार्टी ने चुनाव अभियान समिति की कमान राहुल को दी है, इससे यह भी साफ हो गया है कि पार्टी अब सोनिया की जगह पूरी तरह राहुल पर केंद्रित होती जाएगी।
पार्टी के इस फैसले से जाहिर है कि वह मौजूदा सियासी हालात में वह अपने सबसे चमकदार ब्रांड राहुल पर 2014 के संभावित प्रतिकूल चुनावी हालातों की छाया नहीं पड़ने देना चाहती।
मगर चुनाव अभियान की अगुवाई की कमान दे कर पार्टी ने जीत की स्थिति में राहुल की प्रधानमंत्री के रूप में ताजपोशी का मंच तैयार कर दिया है। ऐसा नहीं हुआ तो स्वाभाविक रुप से राहुल की 2014 के चुनाव के बाद नेता विपक्ष की भूमिका निभाते हुए अगले आम चुनाव पर दांव लगाने का रास्ता तो बना रहेगा।
मोदी बनाम राहुल
दिसंबर में चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में पार्टी की हुई फजीहत भरी हार के बाद कांग्रेस में राहुल को पीएम पद का उम्मीदवार बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया था। एक धड़ा तो चुनाव से पूर्व ही राहुल को प्रधानमंत्री बनाने की भी मांग कर रहा था।
इस संबंध में जारी अटकलों के बीच राहुल ने खुद पार्टी द्वारा दी गई कोई भी जिम्मेदारी स्वीकार करने की बात कह कर इन अटकलों को हवा दे दी थी। मगर कार्यसमिति की बैठक में सोनिया ने पार्टी की पुरानी परंपरा का हवाला देकर लोकसभा की जंग को मोदी बनाम राहुल होने से बचा लिया।
दरअसल, पार्टी के रणनीतिकार नहीं चाहते थे कि पार्टी की खराब हालत भरे इस दौर में राहुल को पीएम पद का उम्मीदवार बनाकर उनकी अग्नि परीक्षा ली जाए। फिर इस फैसले से कहीं कार्यकर्ताओं में निराशा न आए इससे बचने के लिए ही राहुल को चुनाव अभियान की कमान दी गई है।
फैसले में छुपे हैं और कई संकेत
राहुल को चुनाव अभियान की कमान देने का सीधा सा अर्थ यह है कि पार्टी ने आगामी चुनाव में हार या जीत दोनों ही स्थिति में राहुल की भूमिका तय कर दी है। मसलन पार्टी जीतती है तो राहुल पीएम होंगे और पार्टी हारती है तो राहुल विपक्ष के नेता की भूमिका निभाएंगे।
कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले में कई और संकेत छिपे हैं। मसलन राहुल को मोदी के मुकाबले सीधे न उतार कर पार्टी ने इस लोकसभा चुनाव के बाद की रणनीति बनाई है।
फिर पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों की इच्छा के बावजूद राहुल को पीएम पद का उम्मीदवार नहीं बना कर शीर्ष नेतृत्व ने तय कर दिया है कि इस मामले में वह उम्मीदवार घोषित न करने की परंपरा पर कायम रहेगी।