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'सोनिया के मार्च ने इंदिरा की याद दिला दी'

Fri, 13 Mar 2015 11:27 PM IST
Updated Fri, 13 Mar 2015 11:27 PM IST
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sonia gandhi's march just like indira gandhi

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रति एकजुटता जताने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में पार्टी के शीर्ष नेताओं ने उनके घर तक मार्च किया।

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इस ओर लोगों का ध्यान जाना स्वाभाविक था क्योंकि यह ऐसे समय हुआ जब सोनिया अनिच्छा से ही सही, राजनीति से रिटायर होने और अपना कामकाज बेटे राहुल गांधी को सौंपने की तैयारी कर रही थीं।
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इस घटना के पहले ही राहुल ने अपनी छुट्टियां बढ़ा ली थीं। कांग्रेस के किसी नेता ने खुले तौर पर कुछ कहा तो नहीं, पर वे मन ही मन सोनिया के इस फ़ैसले पर उनकी तारीफ़ कर रहे थे। पार्टी के सांगठनिक चुनाव इसी साल होने हैं। यदि वे एक बार फिर पार्टी की बागडोर संभालने रहने को तैयार हो जाती हैं तो 2019 का आम चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।
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राहुल को ख़ारिज कर देना जल्दबाजी होगी क्योंकि ख़ुद सोनिया उन्हें पार्टी की ज़िम्मेदारी देना चाहती हैं। कांग्रेस में शीर्ष पर कई नेताओं को डर है कि राहुल के पार्टी के अध्यक्ष बनते ही वो उन्हें उन पदों से हटा देंगे।

मनमोहन सिंह के घर तक मार्च से वर्ष 1998 की याद ताज़ा हो गई, जब सोनिया गांधी ने प्याज की बढ़ी हुई क़ीमतों के ख़िलाफ़ मार्च निकाला था। वे उसके कुछ ही दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष बनी थीं। इस मार्च में राहुल की ग़ैर मौजूदगी की ओर भी लोगों का ध्यान गया और लगा कि शायद सोनिया कुछ दिन और अपने पद पर बनी रहें।

मनमोहन सिंह को जारी किए गए समन का इस्तेमाल

sonia gandhi's march just like indira gandhi

सोनिया के नज़दीक समझे जाने वाले लोगों का कहना है कि वे मनमोहन सिंह को जारी किए गए समन का इस्तेमाल वैसे ही करना चाहती हैं जैसे इंदिरा गांधी ने 1970 के दशक में उनकी गिरफ़्तारी के बाद किया था। उस समय कांग्रेस ने इंदिरा गांधी को एक शहीद की तरह पेश करते हुए तत्कालीन मोरारजी देसाई सरकार के ख़िलाफ़ एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया था। उन्हें इससे राजनीति में अपनी वापसी करने में मदद मिली थी।

पर इन दोनों घटनाओं में फ़र्क यह है कि इस बार हाई कोर्ट ने समन जारी किया है। मौजूद समय में लोग भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई में न्यायपालिका से काफ़ी उम्मीदें पाले हुए हैं।

नरेंद्र मोदी ने कोयला घोटाले से अब तक अपने को दूर रखा है। सीबाआई ने क्लोज़र रिपोर्ट पेश की है। यदि सरकार इस मामले से दूर ही रहती है तो कांग्रेस के लिए यह कहना मुश्किल होगा कि यह एक राजनीतिक चाल है।

सोनिया गांधी आम लोगो के दिलों को कितना छू पाएंगी

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एक सीमा के बाद न्यायपालिका की आलोचना करने और बग़ैर लक्ष्य के ही किसी पर निशाना साधने के अपने ख़तरे हैं। इसलिए यह कहना मुश्किल है कि सोनिया गांधी आम लोगो के दिलों को कितना छू पाएंगी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मन में कितना उत्साह भर पाएंगी।

सोनिया ने कुछ अति नाटकीय क्षणों को काफ़ी नज़दीक से देखा है। जनार्दन ठाकुर की किताब 'ऑल द जनता मेन' के मुताबिक़, 3 अक्तूबर 1977 के सुबह पांच बजे जब 12, वेंलिग्डन क्रीसेंट के घर में सोनिया अपनी सास के लिए चाय बना रही थीं, सीबीआई सुपरिटेंडेंट एनके सिंह ने दरवाजा खटखटाया था। वे प्रधानमंत्री पद के दुरुपयोग के आरोप में इंदिरा गांधी को गिरफ़्तार करने गए थे। इंदिरा गांधी ने कहा था, “मुझे हथकड़ियां पहनाएं, मैं बग़ैर हथकड़ियों के यहां से नहीं जाऊंगी।”

सोनिया जब निर्विकार भाव से देख रही थीं, उनके देवर संजय गांधी फ़ोन पर पार्टी कार्यकर्ताओं को जमा कर रहे थे और इंदिरा के सहायक आरके धवन मीडिया को बुला रहे थे। रिपोर्टरों को आज भी याद है कि संजय की पत्नी मेनका गांधी ने तमाम पत्रकारों को फोन कर कहा था कि उन्हें ज़बरदस्त ख़बर मिलने वाली है। मेनका उस समय ‘सूर्या इंडिया’ पत्रिका से जुड़ी हुई थीं।

“एफ़आईआर की कॉपी और गिरफ़्तारी वारंट कहां है?”

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इंदिरा जान बूझ कर देर कर रही थीं ताकि मीडिया पंहुच जाए। उन्होंने एनके सिंह से पूछा, “एफ़आईआर की कॉपी और गिरफ़्तारी वारंट कहां है?” एनके सिंह यह काग़ज़ात नहीं दिखा पाए तो इंदिरा के वक़ील फ्रैंक एंथनी ने पूछा, “क्या यह गृहमंत्री चरण सिंह का नया नियम है?”

इंदिरा गांधी को अंत में बग़ैर हथकड़ियों के ही मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिसने उन्हें तकनीकी आधार पर रिहा कर दिया। बाद में फ़्रांसीसी अख़बार ‘ला मोंद’ को दिए इंटरव्यू में राजीव गांधी ने कहा था, “इससे बेहतर पटकथा तो मम्मी भी नहीं तैयार कर सकती थीं।”

इंदिरा गांधी को दिसंबर 1978 में फिर से गिरफ्तार किया गया था। इस बार ये चुनावी धांधलियों का मामला था और उन्हें तिहाड़ जेल में हफ़्ते भर रहना पड़ा था।

कांग्रेस के कई लोगों को लगता है कि मनमोहन सिंह की बेदाग़ छवि की वजह से पार्टी को सियासी फ़ायदा होगा। पर कांग्रेस के कई लोगों को यह नहीं लगता है कि अगर सीबीआई ने मनमोहन के घर का दरवाज़ा खटखटाया तो वे हथकड़ी की ज़िद करेंगे।

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