चुनाव से ठीक पहले सोनिया और मोदी ने चला मास्टरकार्ड
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चुनावी महासमर में उतरे सूरमा अब तक विकास, ईमानदारी, आपसी सौहार्द्र और भ्रष्टाचार की बात कर रहे थे। ऐसा मालूम दे रहा था कि दिल्ली में जन्मी एक पार्टी का असर इस बार लोकसभा चुनावों पर भी नजर आएगा।
हर बार मुद्दा बनने वाली सांप्रदायिकता कहीं पीछे रह जाएगी। नेता सांप्रदायिक भावनाओं की आंच पर अपनी सियासी रोटियां नहीं सेकेंगे और विकास-भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों पर कदम उठाने का वादा किया जाएगा।
लेकिन जैसे-जैसे वोटिंग का पहला रोज करीब आ रहा है, नेता अपनी रणनीति बदल रहे हैं। अब तक कहा जा रहा था कि इस बार वोटों का ध्रुवीकरण नहीं होगा और सभी समुदाय दूसरे अहम मुद्दों के आधार पर वोट डालेंगे। लेकिन पिछले दो-तीन में राजनीतिक दलों ने एक बार फिर बता दिया है कि देश के नेता सियासत का मूल चेहरा नहीं बदलने देंगे।
मोदी का 'पिंक रेवोल्यूशन' दांव
भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने इससे पहले भी बिहार में चुनावी रैली कर चुके हैं। लेकिन अब तक वो वहां अपने विकास के एजेंडे और कांग्रेस के भ्रष्टाचार की बात कर रहे थे।
लेकिन बुधवार को उन्होंने दूसरी लाइन पकड़ी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्र की यूपीए सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार गाय या दूसरे पशु पालने वालों को सब्सिडी नहीं देती, बूचड़खाना चलाने वालों को सब्सिडी देती है।
उन्होंने कहा, "ये लोग इसे पिंक रेवोल्यूशन कहते हैं। यानी गुलाबी क्रांति।" जाहिर है, यादव बहुल इलाके में उनका दिया बयान जहां स्थानीय मतदाताओं को रिझाने की कोशिश था, वहीं साथ ही वो अलग अंदाज में हिंदुत्व कार्ड भी खेल गए।
बनारस पर भी टिका है हिंदुत्व एजेंडा
बनारस को हिंदुत्व का आधार माना जाता है और मोदी यहां से लड़कर पूर्वांचल की कई सीटों पर भाजपा का असर छोड़ना चाहते हैं। बनारस के बाद बिहार के नवादा में गोमांस कारोबार का जिक्र कर उन्होंने हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की चतुर कोशिश की।
हालांकि, इस पर कांग्रेस का पलटवार भी आ गया। पार्टी नेता मीम अफजल ने कहा कि जब भाजपा की सरकार थी, तो क्या मांस के एक्सपोर्ट पर किसी तरह की पाबंदी लगाई गई थी।
सोनिया गांधी ने खेला मुस्लिम कार्ड
लोकसभा चुनाव के शुरुआती चरणों के मतदान की तारीख नजदीक आते ही मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की सियासी पैंतरेबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी से मुलाकात कर अल्पसंख्यकों के वोटों की सियासत को तेज कर दिया है तो दूसरी तरफ भाजपा ने कांग्रेस पर धर्म के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।
हर चुनाव में अलग- अलग पार्टियों को समर्थन देने वाले अहमद बुखारी से कांग्रेस की नजदीकियों को इसी दिशा में बढ़ता कदम माना जा रहा है। बुखारी कह रहे हैं कि सेक्युलर वोटों को बंटने से रोका जाना चाहिए क्योंकि आम आदमी पार्टी भी भाजपा के साथ है।
2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बुखारी ने सपा को समर्थन दिया था। मगर चुनाव बाद सपा के फायरब्रांड मुस्लिम नेता आजम खां के चलते उनका मुलायम सिंह से मोहभंग हो गया। बुखारी इससे पहले बसपा समेत कई अन्य पार्टियों का समर्थन भी कर चुके हैं।
कांग्रेस ने किया इमरान मसूद का बचाव
भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक सोनिया गांधी ने बुखारी से कहा था कि मुस्लिम मतों का विभाजन नहीं होना चाहिए। कांग्रेस पार्टी इस तरह मुसलमानों से सांप्रदायिक आधार पर मतदान करने की अपील कर रही है। वह वोटों का धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है। यह आचार संहिता का उल्लंघन है।
केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि किसी धार्मिक नेता या सूफी संत से मिलना कोई सांप्रदायिकता नहीं है। वोटों के ध्रुवीकरण का काम भाजपा कर रही है। भाजपा हिंदू राष्ट्रवाद को एजेंडा बनाकर वोट बैंक की राजनीति करती है।
मुलायम सिंह ने भी चली चाल
2014 की चुनावी जंग में सपा ने मुस्लिम वोट बैंक पर नजरें गड़ाते हुए मुसलमानों को केरल की तर्ज पर आरक्षण देने का सपना दिखाया है। पार्टी ने अपने चुनाव घोषणापत्र में गरीब सवर्णों को भी विशेष सुविधाएं देने और इनके साथ होने वाले अन्याय की सुनवाई के लिए ‘सवर्ण आयोग’ गठित करने का वादा किया है।
मुसलमानों को आबादी के अनुपात में आरक्षण के साथ ही सपा ने अन्य कई वादे भी किए हैं। बुधवार को घोषणापत्र जारी करते हुए सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने इसमें किए गए वादों का जिक्र करते हुए बताया कि सरकार में आने पर मुस्लिम बहुल जिलों में उर्दू माध्यम के स्कूल खोले जाएंगे।
पुलिस व पीएसी भर्ती में मुसलमानों को 15 प्रतिशत भागीदारी दी जाएगी। उच्च शिक्षा प्राप्त मुस्लिम छात्रों को फ्री कोचिंग की सुविधा दी जाएगी। आतंकवाद के झूठे आरोपों में जेलों में बंद बेकसूर मुसलमानों को रिहा किया जाएगा।