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संसद में सोनिया ने हाथ जोड़कर मांगी मुलायम से माफी

Fri, 22 Mar 2013 08:21 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 22 Mar 2013 08:21 AM IST
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sonia apologize to mulayam in lok sabha with folded hands

बेनी प्रसाद वर्मा के मुद्दे नाराज सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को मनाने के लिए कांगेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने उनसे हाथ जोड़ कर माफी मांगी है। बुधवार को समाजवादी पार्टी के हंगामे के कारण लोकसभा भंग होने के बाद सोनिया ने मुलायम सिंह यादव से भेंट की।

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मीडिया में प्रकाशित खबर के अनुसार लोकसभा भंग होने के बाद सोनिया ने मुलायम से मुलाकात की और उनसे हाथ जोड़कर माफी मांगी।

सोनिया ने मुलायम से कहा, ' उन्होंने (बेनी ने) जो कहा, 'वह उन्हें नहीं कहना चाहिए था। मैं उनसे सहमत नहीं हूं। मैं आप से व्यक्तिगत रूप से मांफी मांगती हूं।'
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गौरतलब है कि डीएमके के अलग होने के बाद यूपीए सरकार लोकसभा में संख्या बल के संकट से जूझ रही है।

केंद्र को समर्थन जारी रखने के बदले में समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव पिछड़ा वर्ग के कांग्रेसी नेता केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का इस्तीफा मांग रहे हैं।
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सपा मुखिया के अचानक बदले तेवरों के बाद यूपीए की डगमगती नैया को संभालने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को खुद मोर्चा संभाला।

दोनों ने मुलायम को मनाया ही नहीं बल्कि बेनी से नाराजगी जाहिर कर उनसे खुले रूप में खेद भी जाहिर करवाया। मगर मुलायम माने नहीं।

उलटे सपा संसदीय दल की बृहस्पतिवार को बैठक बुलाकर सरकार और यूपीए की नींद उड़ा दी है। सपा सांसद अब कह रहे हैं कि बेनी के खेद प्रकट करने से काम नहीं चलेगा, उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

वैसे बेनी ने प्रधानमंत्री के साथ बैठक के बाद संसद भवन परिसर में कहा कि उनके दिए गए बयान से यदि किसी को ठेस लगी है तो इसके लिए खेद है।

मुलायम के कमीशन लेने की कथित टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि यह बात मैंने नहीं कही थी। लिहाजा माफी मांगने का सवाल नहीं है।

हालांकि बेनी ने कहा कि वह रविवार के अपने उस बयान पर अब भी कायम हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुलायम के कथित तौर पर आतंकवादियों के साथ संबंध हैं।

बेनी बने बवाल की वजह

बेनी की जिन मुलायम विरोधी बातों को मंगलवार को ‘बीती हुई’ मान लिया गया था, बुधवार को डीएमके के मंत्रियों के इस्तीफे के बाद भाजपा ने उन्हें लोकसभा में जमकर उछाला और बवंडर खड़ा हो गया, जिसमें सरकार उलझ गई।

भाजपा के उकसावे पर मुलायम का तीसरा नेत्र खुल गया। अपने नेता के तेवरों के पीछे की सियासत को पढ़ते हुए सपा ने बेनी को मंत्रिमंडल से हटाने का दबाव बढ़ाते हुए संसद के भीतर-बाहर हंगामा बरपा दिया। मुलायम के अचानक सामने आए उग्र तेवरों ने सरकार को उलझन में डाल दिया है।

लोकसभा का गणित


उल्लेखनीय है कि यूपीए सरकार के पास बुधवार को डीएमके के हटने के बाद 232 सांसद बचे हैं और उसे सपा-बसपा समेत बाहर के 50 सांसदों का समर्थन (कुल: 282) हासिल है। जबकि बहुमत के लिए सरकार को 271 का आंकड़ा चाहिए।


सपा के पास 22 सांसद हैं और यदि वह अपना समर्थन केंद्र से वापस ले ले, तो सरकार अल्पमत में आ जाएगी। तब उसके पास केवल 260 सांसद रह जाएंगे।

मुलायम इस गणित को ढंग से पढ़ चुके हैं और बदली हुई परिस्थितियों में कांग्रेस से समर्थन की कीमत वसूलने में जुट गए हैं। सपा के अलावा बसपा (21 सांसद) ही सरकार की बाहर से बड़ी समर्थक है।

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