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सोनी सोरी को मिली जमानत, पर छत्तीसगढ़ जाने पर रोक

Tue, 12 Nov 2013 01:23 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 12 Nov 2013 01:23 PM IST
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soni sori got bail

सुप्रीम कोर्ट ने सोनी सोरी को जमानत दे दी है। सोनी सोरी पर एस्सार समूह से 'सुरक्षा के बदले पैसे वसूलने' के आरोप हैं। हालांकि एस्सार समूह माओवादियों को किसी तरह की रकम देने से इनकार करता है।सोनी सोरी के साथ उनके भतीजे लिंगाराम कोड़ोपी को भी ज़मानत मिल गई है।

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सोनी सोरी के वकील कोलिन गोंजालविस के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने जमानत अवधि के दौरान सोनी सोरी और उनके भतीजे लिंगाराम कोड़ोपी को छत्तीसगढ़ में प्रवेश नहीं करने के निर्देश भी दिये हैं।
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सोनी सोरी की जमानत पर टिप्पणी करते हुये सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने कहा कि यह एक सुखद स्थिति है। उन्होंने कहा- “हम जानते हैं कि उन्हें फर्जी तरीके से गिरफ्तार किया गया और मुकदमें दर्ज किए गए। वह सभी मामले में निर्दोष साबित होंगी।”
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क्या था पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर के एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका, सोनी सोरी को पांच अक्तूबर 2011 को क्राइम ब्रांच और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त अभियान में दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। उन पर माओवादियों के साथ संबंध होने के आरोप है।

सोनी सोरी का मामला तब चर्चा में आया, जब अक्तूबर 2011 में कोलकाता के एक अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने सर्वोच्च अदालत को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सोरी के शरीर में कुछ बाहरी चीजें पाई गईं। लेकिन यह टीम यह नहीं तय कर पाई कि ये चीजें कैसे उनके जननांगों में डाली गईं।

सोनी सोरी के खिलाफ राज्य सरकार ने नक्सल गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था और उनके खिलाफ आठ अलग-अलग मुक़दमे दर्ज किये गये थे। इनमें से पांच मामलों में सोनी सोरी को पहले ही निर्दोष क़रार दे दिया गया है। इसके अलावा एक मामला बंद हो चुका है और एक मामले में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।


सोनी सोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के बाद मुलाकात करने और उनके मामले को उच्चतम अदालत तक पहुंचाने वाली छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की अधिवक्ता सुधा भारद्वाज ने कहा- “जिस तरह के अत्याचार सोनी सोरी पर हुये हैं, उसमें जमानत के अलावा बड़ा मुद्दा दोषी अफसरों पर कार्रवाई का भी है।”

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