फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   son of up killed in naxal attack

नक्सली हमले में शहीद हुआ यूपी का लाल

Thu, 13 Mar 2014 06:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 13 Mar 2014 06:35 PM IST
विज्ञापन
son of up killed in naxal attack

'मैंने नाश्ता कर लिया है, तुमने भी किया? आठ दिन से मेरी ड्यूटी सुकमा जिले (छत्तीसगढ़) में चल रही है। आज मैं घने जंगल में जा रहा हूं। तुम फोन मत करना। मेरी बेटी परी का ख्याल रखना।'

विज्ञापन


छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए कालंदी गांव निवासी जवान नीरज की पत्नी से यह अंतिम बातचीत थी। मंगलवार सुबह करीब सात बजे पत्नी डिंपल से बात के बाद नीरज घने जंगलों में निकल गए थे।
विज्ञापन


उनका फोन भी स्विच ऑफ हो गया था। इसके बाद कालंदी गांव में उनकी शहादत की खबर आई। शहीद नीरज का शव बुधवार को कालंदी गांव पहुंचा।

खबर मिलते ही कोहराम मच गया

son of up killed in naxal attack

मंगलवार शाम करीब चार बजे गांव के ही सीआरपीएफ जवान रणवीर ने टीवी पर न्यूज सुनने के बाद नीरज के बडे़ भाई ब्रजपाल को फोन किया। उसने छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले की खबर दी।

रणवीर ने ब्रजपाल को नीरज के दोस्त राहुल का मोबाइल नंबर दिया। इसके बाद ब्रजपाल ने राहुल को फोन कर नक्सली हमले और नीरज का मोबाइल स्विच ऑफ होने के बारे में पूछा तो उसने पूरी जानकारी दी।

इसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया। शहीद नीरज के घर पर गांव के साथ आसपास के लोगों का तांता लगना शुरू हो गया।

तीसरी पोस्टिंग ही आखिरी पोस्टिंग बनी

son of up killed in naxal attack

32 वर्षीय नीरज पुत्र रामपाल सीआरपीएफ की 80 बटालियन में जवान थे। नीरज ने जुलाई-2004 में भर्ती के बाद रामपुर में ट्रेनिंग की। पहली पोस्टिंग पर वह असम गए। दूसरी पोस्टिंग जम्मू के कटरा में हुई।

तीन साल पहले उनकी पोस्टिंग छत्तीसगढ़ में हुई थी। पिता रामपाल के तीन बेटों में नीरज दूसरे नंबर के थे। उनका बड़ा भाई ब्रजपाल प्राइवेट स्कूल में शिक्षक हैं, जबकि छोटा भाई रोहताश खेती करते हैं।

नीरज की शादी सात वर्ष पूर्व हापुड़, स्याना के गांव अलीपुर निवासी डिंपल पुत्री सुधीश से हुई थी। नीरज की तीन वर्ष की एक बेटी है। डिंपल अभी सात माह के गर्भ से है।

विज्ञापन

दो माह पहले होना था तबादला

son of up killed in naxal attack

डिंपल ने बताया कि उसकी नीरज से जब भी बात होती थी, वह यही कहते थे- तू टेंशन मत ले। जल्द ही मेरी पोस्टिंग दूसरी जगह होने वाली है। दो माह पहले उनका तबादला होना था, लेकिन किसी कारण से नहीं हो सका।

नीरज के परिजनों के साथ ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस और सेना के जवानों को नक्सली बड़ी क्रूरता से मारते हैं, लेकिन सरकार कोई सख्ती नहीं दिखाती। नीरज ने पाली इंटर कॉलेज से 12वीं पास की थी। वह पत्नी और बच्ची को साथ ही रखते थे।

असम और कटरा में पोस्टिंग के दौरान डिंपल उनके साथ ही थीं। छत्तीसगढ़ में भी पत्नी और बेटी कुछ दिन साथ में थीं। कुछ माह पहले ही वह दोनों को गांव में छोड़ गए थे।

शहीद जवानों के घर हाहाकार

son of up killed in naxal attack

छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों के हमले में सीआरपीएफ के शहीद जवानों के  परिजन सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। शहीदों में सतना के मनमोहन सिंह, कांगड़ा के लखबीर सिंह, सरधना (मेरठ) के नीरज और जींद के सुभाष चंद्र शामिल हैं। मालूम हो कि हमले में कुल 15 लोगों की मौत हो गई थी।

सीआरपीएफ के सहायक उपनिरीक्षक 50 वर्षीय मनमोहन सिंह सतना (मध्य प्रदेश) में सेमरी गांव निवासी थे। उनकी तैनाती नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ राज्य में जगदलपुर स्थित 80वीं बटालियन में थी। उनकी पत्नी श्यामा सिंह बेटों मनेंद्रा, मानवेंद्र और किशन के साथ पड़िला (थरवई) स्थित सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर में रहती थी। सीआरपीएफ दस्ते पर हुए नक्सली हमले में मनमोहन सिंह भी गोलियों का शिकार हो गए। घटना की सूचना पर बुधवार सुबह वह तीनों बेटों के साथ सतना चली गईं।

शहीद मनमोहन का अंतिम संस्कार सतना में किया जाएगा। हिमाचल के कांगड़ा के उपमंडल जवाली निवासी लखवीर सिंह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में बतौर हवलदार तैनात थे। शहीद सैनिक का पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार तक पैतृक गांव पहुंचने की उम्मीद है। जींद निवासी निरीक्षक सुभाष चंद्र 80 बटालियन सीआरपीएफ की जनरल ड्यूटी पर तैनात थे। वह 1981 में सीआरपीएफ में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। वहीं सरधना के गांव कालंदी निवासी शहीद जवान नीरज का शव बृहस्पतिवार को गांव पहुंचेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed