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साल 2015 के बयानवीर : जिनके अल्फाजों पर गरमाई सियासत

Sat, 26 Dec 2015 06:57 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 26 Dec 2015 06:57 PM IST
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Controversial Statement on the year of 2015.

कहते हैं सियासी बयानबाजियां कभी नहीं थमतीं। दिन, महीने, साल गुजरने के साथ-साथ ऐसे बयान सामने आते रहते हैं जिस पर सियासी संग्राम हो जाता है।

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कुछ ऐसा ही हाल 2015 में भी देखने को मिला। कई मौकों पर राजनेताओं या फिर जानी-मानी शख्सियतों की ओर से दिए गए बयानों से विवाद गहराया। इन बयानों के चलते वे कई दिनों तक समाचार चैनलों की सुर्खियों में बने रहे।
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चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या फिर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत। बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान या फिर शाहरुख खान। इनके कहे शब्दों ने खासा हंगामा मचाया। हालात ऐसे बने कि खुद उन्हें भी अपने बयानों को लेकर पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ गया।
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बयानवीरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी

Controversial Statement on the year of 2015.

सबसे पहले बात उस बयान कि जो खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया, जिसका असर उन्हें बिहार चुनाव में नजर आया।

25 जुलाई 2015 को बिहार के मुजफ्फरपुर में हुई रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा से नाता तोड़ने पर नीतीश कुमार के राजनीतिक डीएनए पर सवाल उठा दिया था। उसके बाद सियासी हलकों में इसको लेकर खासी चर्चा रही।

इस मुद्दे को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार चुनावों के दौरान जमकर भुनाया। उन्होंने इसे बिहार की अस्मिता से जोड़ दिया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर ट्वीट कर के कहा था कि प्रधानमंत्री के मुताबिक मेरा डीएनए खराब है लेकिन मैं बिहार का बेटा हूं। इसलिए मेरा भी डीएनए वही है जो बिहार की जनता का है। इसका असर बिहार चुनाव में नजर आया और भारतीय जनता पार्टी को मुंह की खानी पड़ी।

आरक्षण पर भागवत का बयान और विवाद

Controversial Statement on the year of 2015.

बिहार चुनाव के दौरान ही 20 सितंबर 2015 को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक इंटरव्यू में आरक्षण पर फिर से विचार करने की बात कही थी। उन्होंने इस मुद्दे पर मोदी सरकार को एक समिति बनाने की सलाह दी थी, जो यह तय करे कि कितने लोगों को और कितने समय तक आरक्षण मिलना चाहिए।

संघ के मुखपत्र 'पांचजन्य' और 'आर्गेनाइजर' को दिए साक्षात्कार में भागवत ने मोदी सरकार को ये सुझाव दिए। हालांकि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव  ने भागवत को उनके इस बयान के लिए जमकर घेरा। इतना ही नहीं, उन्होंने ट्वीट कर यहां तक कह दिया था कि अगर मां का दूध पिया है, तो आरक्षण खत्म करके दिखाओ। इसके बाद पता चल जाएगा कि किसमें कितना दम है।

हालांकि चुनावी समर के बीच आए इन बयानों का असल फायदा किसे मिला, ये तो बिहार चुनाव के परिणाम से साफ हो गया। लेकिन ज्यादातर सियासी पंडितों ने बिहार में हार के लिए भागवत के बयान को एक वजह जरूर बताया। यहां तक कि बिहार चुनाव में भाजपा के साथ सहयोगी की रूप में लड़ने वाली राम विलास पासवान की पार्टी एलजेपी या फिर जीतन राम मांझी की पार्टी हम ने भी आरक्षण से जुड़े बयान को हार की वजहों में गिना।

बिहार चुनाव के दौरान बयानों में जमकर टूटी सीमाएं

Controversial Statement on the year of 2015.

पाकिस्तान में फूटेंगे पटाखे: अमित शाह
बिहार चुनाव के दौरान सियासी पार्टियों की ओर से की गई कई ऐसी टिप्पणियां थीं जिसमें मर्यादाएं टूटीं। ऐसा ही एक बयान 27 अक्टूबर को बेतिया में आया। जब चौथे चरण के चुनाव से पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने विवादित बयान देते हुए कहा कि अगर भाजपा बिहार में चुनाव हारी तो जेल में बैठा शाहबुद्दीन खुश होगा और पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे। भाजपा अध्यक्ष के इस बयान की जमकर आलोचना हुई थी।

चारा चोर लालू : अमित शाह
इससे पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 1 अक्टूबर को बेगूसराय में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव को चारा चोर कह दिया था। शाह यहीं नहीं रुके, यह भी कहा कि चारा चोर लालू यादव की वजह से ही महान लोगों की धरती बिहार बदनाम हुआ। उनके इस बयान पर लालू के साथ चुनाव आयोग की भी भृकुटियां तन गईं थीं।

नरभक्षी और तड़ीपार शाह : लालू
अमित शाह के इस बयान पर भड़के राजद प्रमुख लालू यादव ने भाजपा अध्यक्ष पर तुरंत पलटवार किया। उन्होंने शाह को नरभक्षी और तड़ीपार तक की संज्ञा दे डाली थी। लालू ने कहा था कि इस तड़ीपार को किन कुकर्मों के कारण गुजरात से बाहर निकाला गया, बताएं।

हिंदू भी खाते हैं बीफ : लालू
देश भर में जब दादरी कांड को लेकर हल्ला मचा हुआ था, तब लालू यादव के एक बयान ने उनके गले में मुसीबत डाल दी। एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान लालू ने कहा था कि हिंदू भी बीफ खाते हैं। उनका यह बयान सामने आते ही हल्ला मच गया। इस पर लालू ने सफाई दी लेकिन तीर कमान से निकल चुका था।

जब पीएम मोदी पर हुए जुबानी हमले

Controversial Statement on the year of 2015.
ब्रह्मपिशाच हैं मोदी : लालू
बिहार चुनाव के दौरान कई बार शब्दों की सीमाएं टूटी। प्रधानमंत्री मोदी के शैतान वाले बयान पर लालू का पारा हाई हुआ और उन्होंने पलटवार करते हुए मोदी को गुजरात दंगों के लिए घेरते हुए उन्‍हें ब्रह्मपिशाच तक कह डाला था। हालांकि उनके इस बयान पर चुनाव आयोग ने नाराजगी जताई थी, लेकिन लालू ने अपना बयान वापस नहीं लिया बल्कि उनकी जुबान और तीखी हो गई।

मोदी को कर देंगे बधिया : लालू
ब्रह्मपिशाच के बाद लालू ने मोदी पर हमले लगातार जारी रखे थे। एक चुनावी सभा में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को बधिया करने तक की बात कह डाली। कहा कि इस मोदी को हम बिहार से बधिया करके भेजेंगे। बता दें कि बधिया एक ऐसा शब्द है जिसे आमतौर पर गाली के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

देश का दुर्भाग्य है जो ऐसा प्रधानमंत्री मिला : मीसा
ऐसा नहीं है कि विवादित बयानों की इस फेहरिस्त में सिर्फ दिग्गज ही शामिल रहे, बल्कि उनके राजनीतिक वारिस भी इसमें कूद पड़े थे। प्रधानमंत्री मोदी के बेटे-बेटियों को राजनीति में सेट करने के बयान पर मीसा भारती ने भड़कते हुए कहा था कि देश का दुर्भाग्य है जो ऐसा प्रधानमंत्री मिला। मीसा ने कहा था कि मोदी को महिलाओं का सम्मान करना नहीं आता।

मोदी शैतान और दरिंदा : अकबरुद्दीन ओवैसी
बिहार चुनाव में बड़े नेताओं के कीचड़ उछाल आयोजन में छोटे-छोटे नेताओं ने भी छलांग लगाई थी। किशनगंज के कोचाधमन में 4 अक्टूबर को आयोजित एक चुनावी रैली में ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी को शैतान और दरिंदा तक कह डाला। हालांकि इसके तुंरत बाद कोचाधमन में ही मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया।

आमिर के बयान पर हुआ विवाद

Controversial Statement on the year of 2015.

बिहार चुनाव के दौरान ऐसे ही कई और बयान सामने आए जिन पर खासा हंगामा देखने को मिला। ऐसा नहीं है कि 2015 के बयानवीरों में राजनेता ही रहे हों बल्कि सेलिब्रिटिज के भी बयानों पर जमकर हंगामा हुआ। ऐसा ही एक विवाद बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के एक बयान पर हुआ।

25 नवंबर को इं‌डियन एक्सप्रेस के विशेष कार्यक्रम में आमिर खान ने कहा था कि अस‌हिष्‍णुता के मसले पर उन्हें कई मौके पर चेताया जा चुका है। उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी किरण राव तो इस कदर डर गई थीं कि उन्होंने मुझे देश छोड़ने तक की सलाह दे दी थी।

इतना ही नहीं, असहिष्‍णुता के मुद्दे पर आमिर ने साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों द्वारा लौटाए जा रहे पुरस्कारों का भी समर्थन किया। हालांकि आमिर के इस बयान के बाद भाजपा समेत कई दूसरे दलों ने भी उन पर निशाना साधा। उनके बयान की सोशल मीडिया पर खासी आलोचना हुई, जिसके बाद आमिर को सफाई देने के लिए आगे आना पड़ा।

असहिष्‍णुता पर दिए गए बयान पर विवाद के बाद अभिनेता आमिर खान ने सफाई में कहा कि मेरा और मेरी पत्नी का देश छोड़ने का कोई इरादा न था, न है और न रहेगा। आमिर खान ने कहा कि भारत मेरा देश है और मैं अपने देश से प्यार करता हूं। साथ ही, आमिर ने सफाई देते हुए कहा कि कि मेरे इंटरव्यू को गलत तरीके से लिया गया।

असहिष्णुता पर शाहरुख ने कुछ ऐसा कहा कि हुआ विवाद

Controversial Statement on the year of 2015.

ऐसा ही विवाद अभिनेता शाहरुख खान के साथ भी जुड़ा। जब उन्होंने देश में असहिष्णुता बढ़ने की बात कही थी। इसको लेकर भाजपा नेताओं की ओर से किंग खान पर बयानी वार हुए थे।

भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने शाहरुख को देशद्रोही तक कहा था। हालांकि इस विवाद के सामने आने के बाद शाहरुख ने सफाई देते हुए कहा था कि उनके बयान को गलत ढंग से लिया गया। शाहरुख ने कहा था कि अगर किसी ने इसको गलत तरीके से समझा, तो इसके लिए मैं माफी मांगता हूं।

बयानों को लेकर विवाद की ये फेहरिस्त इतनी ही नहीं है। कई और बयान हैं, खासकर देश की सत्ता संभाल रही भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की ओर से कई बयान दिए गए। इन बयानवीरों में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय मंत्री संजीव बालयान, सांसद साक्षी महाराज और उत्तर प्रदेश के विधायक संगीत सोम शामिल हैं।

इन नेताओं के बयानों के चलते पार्टी की खासी फजीहत हुई। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इन नेताओं को संभलकर बोलने की चेतावनी तक दी। लेकिन क्या इस पर लगाम लग पाई, ये तो आप बेहतर जानते होंगे।

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