आकाओं के हुक्म के आगे संसद ही भूल गए सांसद
अपने राजनीतिक आकाओं के हुकुम के आगे सियासी दलों के माननीय किस तरह संसद की परंपराओं और व्यवस्थाओं को ही नजरअंदाज करते हैं, इसका उदाहरण अन्नाद्रमुक और तृणमूल कांग्रेस के जीते सांसद इन दिनों पेश कर रहे हैं।
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की पार्टी अन्नाद्रमुक के सभी 37 और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 34 में से 31 सांसदों ने नए सांसद चुने जाने के बाद रिपोर्ट करने की लोकसभा सचिवालय की औपचारिकताओं को पूरा नहीं किया है।
बड़े नहीं छोटे नेता कर रहे नियमों का उल्लंघन
लोकसभा सचिवालय में भले ही ये अनिवार्य नियम कानून न हो, मगर संसद की ये परंपरा रही है कि नई लोकसभा चुने जाने के बाद प्रतिनिधियों की ये जिम्मेदारी बनती है कि वे लोकसभा सचिवालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं।
सदन का पहचान पत्र, प्रवेश पास, सचिवालय का कार्ड आदि औपचारिकताएं पूरी करें।
मुलायम सिंह यादव, मुरली मनोहर जोशी, नितिन गडकरी जैसे तमाम बड़े नेताओं समेत 430 सांसदों ने खुद आकर सचिवालय को रिपोर्ट कर दिया है।
जयललिता टीम का एक भी सांसद नहीं पहुंचा सचिवालय
अन्नाद्रमुक का एक सांसद भी अभी तक लोकसभा सचिवालय नहीं पहुंचा है। बताया जा रहा है कि पार्टी सुप्रीमो जयललिता तीन जून को दिल्ली आ रही हैं।
उनके साथ ही तभी पार्टी के सभी सांसद दिल्ली आने की जहमत उठाएंगे और तब ही सांसद लोकसभा सचिवालय आएंगे। इसी तरह तृणमूल कांग्रेस के सिर्फ तीन सांसद ही सचिवालय को रिपोर्ट करने की जहमत उठा सके हैं।
इस बारे में पार्टी नेताओं से संपर्क साधा गया तो दोनों की ओर से औपचारिक तौर पर कुछ भी बोलने से इनकार किया गया।
अम्मा-दीदी के हुक्म का इंतजार
नाम न छापने की शर्त पर दोनों पार्टियों के नेताओं ने बताया कि जयललिता और ममता बनर्जी की ओर से सांसदों को हरी झंडी नहीं मिलने के चलते ही कोई सांसद लोकसभा सचिवालय में रिपोर्ट करने की हिम्मत नहीं उठा सका।
सांसदों को रिपोर्ट करने के लिए सचिवालय की ओर से 12 दिन तक काउंटर लगा रहा। सांसदों को बाकायदा इसकी जानकारी भी दी गई।
चार जून से संसद का विशेष सत्र ऐलान हो चुका है और अब माना जा रहा कि शपथ लेने की अनिवार्यता को देखते हुए बाकी बचे सांसद तभी सचिवालय को रिपोर्ट करेंगे।