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गांधी-शास्त्री जयंती: कुछ अनछुए पहलू

Thu, 02 Oct 2014 12:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Thu, 02 Oct 2014 12:37 PM IST
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some less known life facts of mahatma gandhi and l b shashtri.

देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के इलाहाबाद से जुड़ाव के बारे में तमाम किस्से हैं लेकिन उनके जीवन के कई अनछुए पहलू भी हैं जिसे कम ही लोग जानते हैं। शास्त्री जी के बारे में रोचक पहलू यह भी है कि वह बचपन में माघ मेले में गुम हो गए थे। उस समय वह केवल साल भर के थे। माता-पिता उन्हें अपने साथ मकर संक्रांति के दिन संगम लेकर गए थे। किसी वक्त मां-बाप का ध्यान हटा और एक गो पालक उन्हें उठा ले गया।

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बेटे के गुम होने से परेशान पिता ने संगम की पुलिस चौकी में रिपोर्ट दर्ज करा दी। संगम क्षेत्र में एनाउंस होने लगा। इसी बीच किसी ने बताया कि एक बच्चा नाव में रखी टोकरी में रो रहा है। माता-पिता उस नाव के पास पहुंचे और गो पालक से बच्चा दिखाने के लिए कहने लगे। लेकिन वह बच्चा देने को तैयार नहीं हुआ। कुछ देर को उसके साथ झगड़ा भी हुआ।
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काफी देर बाद लोगों के समझाने पर आखिरकार एक कंबल और कुछ रुपये देकर शास्त्री जी के पिता ने बेटे को हासिल किया। शास्त्री जी से जुड़ा यह रोचक तथ्य ‘धरती के लाल’ पुस्तक में लिखी गई है। शास्त्री जी के बारे में काफी अध्ययन कर चुके इलाहाबाद विश्वविद्यालय कर्मचारी यूनियन के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि धरती के लाल सीरियल में शास्त्रीजी से जुड़े इस किस्से को प्रमुखता से दर्शाया गया है।
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संगम नगरी से दिया ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा
इलाहाबाद से दो बार सांसद रहे लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा यमुनापार में उरुवा में एक सभा के दौरान ही दिया था। उनका यह नारा इतना चर्चित हुआ कि बाद में हर सभा का हिस्सा बन गया। लाल बहादुर इंटर कॉलेज से रिटायर हुए शिक्षक मंगल देव द्विवेदी ने बताया कि मेजा के उरुवा मैदान में भाषण के दौरान शास्त्री जी ने कई बार ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया। बाद में यह नारा देशभक्ति का प्रतीक बना।

इलाहाबाद से गांधीजी ने ग्रीन पंफलेट का निश्चय किया

some less known life facts of mahatma gandhi and l b shashtri.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का कर्मक्षेत्र भले ही इलाहाबाद न रहा हो लेकिन संगमनगरी में उन्होंने कई कार्य शुरू किए। मसलन ग्रीन पंफलेट(हरी पुस्तिका) जिसने महात्मा गांधी की ख्याति को दूर-दूर तक पहुंचाने के साथ नेटाल के गोरों को उत्तेजित किया था। इसके निर्माण की शुरुआत इलाहाबाद से हुई थी।  पांच जुलाई 1896 को कोलकाता से राजकोट जाते समय गांधी जी का आकस्मिक तौर पर इलाहाबाद रुकना पड़ा। दरअसल ट्रेन में ही उनकी तबीयत खराब हो गई।

ट्रेन 45 मिनट के लिए इलाहाबाद रुकती थी, उन्होंने यही से दवा लेने की सोची और उतर गए। जब लौटे तो ट्रेन छूट गई। इसके बाद गांधी जी ने ‘पायनियर’ पत्र (जो उस वक्त आनंद भवन के पास स्थित था) के संपादक मिस्टर चेजनी से मुलाकात की। उन्होंने मिस्टर चेजनी से डबरन में भारतीयों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को पत्र में प्रकाशित करने का निवेदन किया। लेकिन चेजनी ने अपनी असमर्थता जता दी। इसके बाद ही गांधीजी ने ग्रीन पंफलेट का निश्चय किया। उन्होंने पहले ग्रीन पंफलेट में इसका जिक्र भी किया।

महिलाओं से मांगा सहयोग
असहयोग आंदोलन के दौरान जब महात्मा गांधी इलाहाबाद आए, तो उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की सभा बुलाई। गांधी ने महिलाओं ने असहयोग आंदोलन की सफलता के लिए सहयोग मांगा। ‘उत्तर प्रदेश में गांधी’ पुस्तक में लिखा है कि बैठक में गांधीजी ने महिलाओं से कहा था कि ‘‘आप अपने पतियों और पुत्रों से अनुरोध करें और उन्हें प्रोत्साहन दें कि वे अपने कर्त्तव्य पथ पर चलें तथा स्वदेशी को अपनाकर स्वतंत्र भारत के निर्माण में सहयोग दें।’’ इस भाषण का संगम नगरी की महिलाओं पर इतना प्रभाव पड़ा कि उन्होंने अपने आभूषण उतारकर राष्ट्रीय कार्य के लिए दे दिए और स्वदेशी अपनाने की शपथ ली।

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