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मोदी के जीवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें

Thu, 20 Dec 2012 11:04 PM IST
चंदन जायसवाल/नई दिल्ली
चंदन जायसवाल/नई दिल्ली Updated Thu, 20 Dec 2012 11:04 PM IST
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some importent facts about narendra modi

गुजरात विधानसभा चुनाव में एक बार फिर नरेंद्र मोदी का परचम लहरा है। तमाम विरोधों और झंझावातों को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने आसानी से जीत की हैट्रिक पूरी की।

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जीत के बाद मोदी ने सबसे पहले अपनी मां का आशीर्वाद लिया और उसके बाद वह पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल से मिलने गए और पैर छूकर उनका भी आर्शीवाद लिया। इसके बाद उन्होंने जनता व कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए हैट्रिक लगाने का श्रेय प्रदेश की जनता और देश का भला चाहने वाले हर नागरिक को दिया।
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अभी तक के सबसे टेक्नोसेवी मुख्यमंत्री के रूप में खुद को स्थापित करने वाले नरेंद्र मोदी का सफर कई राहों से गुजरते हुए अब इस मुकाम पर पहुंचा गया है जहां पार्टी के नेता भी मोदी के खिलाफ कुछ कहने से पहले कई बार सोचते हैं।
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तो यहां जानते हैं गुजरात में अपने आकर्षक व्यक्तित्व और दमदार छवि की बदौलत तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले नरेंद्र मोदी के जीवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें...

अविवाहित रहकर देशसेवा का व्रत
गुजरात पर राज करने वाले मोदी के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। किसी जमाने में अपने बड़े भाई के साथ चाय की दुकान चलाने वाले मोदी वड़नगर से स्कूली शिक्षा के वक्त से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए। इसी के साथ मोदी ने आजीवन अविवाहित रहकर देशसेवा का व्रत लिया।

भाजपा को मजबूत करने में अहम भूमिका
गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने के बाद मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए। इसके बाद उन्हें भाजपा में काम करने का मौका मिला। शुरुआती दौर से ही मोदी ने राजनीति में सक्रियता दिखाई और गुजरात में पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

मोदी बने मुख्यमंत्री
मोदी की मेहनत रंग लाई और 1995 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने बलबूते दो तिहाई बहुमत हासिल कर सरकार बना ली। पहले शंकर सिंह वाघेला मुख्यमंत्री बने लेकिन आपसी खींचतान के कारण वाघेला को हटाकर केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री बना दिया गया। लेकिन वह भी अपने खिलाफ विद्रोह को दबा नहीं सके और अंतत: उनके जगह अक्टूबर 2001 में मोदी को मुख्यमंत्री बनाया गया।

गुजरात दंगा
हिंदुत्व की विचारधारा मानने वाले मोदी का 2002 का दंगा हमेशा पीछा करता रहा। 27 फरवरी 2002 को अयोध्या से गुजरात आ रहे एक ट्रेन को गोधरा स्टेशन पर एक समुदाय विशेष के लोगों ने आग के हवाले कर दिया। इस घटना में 59 लोग जिंदा जल गए। प्रतिक्रियास्वरूप समूचे गुजरात में दंगे भड़क उठे। मरने वाले लगभग 1800 लोगों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग ज्यादा थे।

राजधर्म नहीं निभाने का आरोप
उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मोदी के बारे में कहा था कि उन्होंने राजधर्म नहीं निभाया। दंगों को कंट्रोल न कर पाने को लेकर विपक्षी पार्टियां मोदी पर लगातार उंगलियां उठाती रही हैं। मोदी ने 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में 182 सीटों में 127 सीटों पर जीत हासिल की। उसके बाद 2007 के चुनाव में भी उन्होंने 117 सीटें जीतकर सत्ता पर कब्जा जमाया।


मोदी आज की तारीख में बीजेपी के सबसे बड़े नेता के रूप में उभर कर सामने आ रहे है। पार्टी में जो जगह आडवाणी और वाजपेयी के कारण खाली दिख रही है उसे भरने में नरेंद्र मोदी पहली कतार में है। ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि क्या देश के अंदर अगली राजनीतिक लड़ाई मोदी बनाम राहुल की नहीं बल्कि 'सेकुलरिज्म' बनाम 'हिंदुत्व' की वैचारिक लड़ाई होगी।

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