देश की खेती की सेहत सुधारने में आगे निकले मोदी
खेती की सेहत सुधारने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना उम्मीद से आगे निकल गई है। योजना की कामयाबी को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसके लक्ष्य को 3 साल से घटाकर 2 साल कर दिया है। पहले साल में देश भर से एक करोड़ नमूने संग्रह करने का लक्ष्य रखा गया था।
17 नवंबर तक 50 लाख 55 हजार से ज्यादा नमूने एकत्रित किए गए। पीएम मोदी ने इसी साल 19 फरवरी को राजस्थान के सूरतगढ़ से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरूआत की थी। 9 महीनों में ही योजना ने रफ्तार पकड़ ली। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह का दावा है कि योजना का लक्ष्य 3 साल की बजाए 2 साल में ही पूरा हो जाएगा।
सरकार ने मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के लिए 269 नए लैब बनाने का निर्णय लिया है। साथ ही 77 मोबाइल लैब भी इस काम में लगेंगे। आज विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस पर राज्यों में जिला स्तर पर कार्यक्रम रखे गए हैं। किसानों को भारी संख्या में स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जाएंगे।
क्यों जरूरी है मृदा स्वास्थ्य कार्ड
कृषि मंत्रालय के मुताबिक 50 लाख किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए
जाएंगे। वैसे गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, मध्यप्रदेश,
महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड सरीखे राज्यों ने खेतों से
मिट्टी के नमूने जुटाने, जांच करने और कार्ड बनाने में तेजी दिखाई है
लेकिन उत्तरप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में कामकाज की
रफ्तार काफी धीमी है।
बेतहाशा
यूरिया के प्रयोग पर संसदीय समिति ने न केवल चिंता जताई बल्कि माना कि
इससे भूजल का प्रदूषण और भूमि की सेहत बिगड़ रही है। पंजाब, हरियाणा, आंध्र
प्रदेश में स्थिति चिंताजनक है।
संसदीय समिति ने सरकार से कहा कि वह
किसानों में जागरूकता पैदा करे की वे खेती में यूरिया का उपयोग कम करें।
समिति ने भूमि स्वास्थ्य कार्ड को हर किसान के लिए जरूरी बताया है। सरकार
ने कहा है कि वह यूरिया के असर को कम करने के लिए जल्द पूरे देश में नीम
कोटेड यूरिया का प्रचलन बढ़ाएगी।