सोशल साइट से तैयार हो रहे स्लीपिंग माड्यूल्स
इस्लामिक स्टेट सहित अन्य आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क का विस्तार फेसबुक, ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिये किया जा रहा है। इन्हीं के माध्यम से और स्लीपिंग माड्यूल्स भी तैयार किए जा रहे हैं।
ऐसे में इन साइट्स और एप्लीकेशन के माध्यम से इंटरनेशनल चैटिंग करने वालों और ऑडियो-वीडियो कॉल करने वालों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
ऐसे लोगों का डाटा बैंक भी तैयार किया जा रहा है जो व्यावसायिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य सहित जरूरी कार्यों से इतर दुनिया के अन्य देशों के लोगों के संपर्क में रहते हैं। साथ ही, ऐसे लोगों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है जो विदेश जाने के लिए नेपाल के रास्ते का सहारा लेते हैं।
एनआईए और यूपी एटीएस द्वारा कुशीनगर से गिरफ्तार किया गया रिजवान सीरिया के आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के आतंकवादी यूसुफ के संपर्क में फेसबुक के माध्यम से आया था।
हाल में पूर्वांचल का पहला मामला
इसके बाद दोनों की बातचीत एक विशेष पहचान चिह्न के माध्यम से ईमेल और वाट्सएप के जरिए होने लगी। अभी तक ऐसे मामले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही सामने आए थे। हाल के दिनों में पूर्वांचल का यह पहला मामला था।
जिसके बाद खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां गंभीर हुईं। सुनिश्चित किया जा रहा है कि फेसबुक, ट्विटर, गूगल हैंगआउट्स, वाट्सएप सहित अन्य माध्यमों से दुनिया के देशों में संपर्क साधने वालों की पड़ताल कर ऐसे लोगों को चिह्नित किया जाए।
साथ ही, इनमें से उन्हें चिह्नित किया जाएगा जो आईएस सहित ऐसे ही अन्य आतंकी संगठनों की वेबसाइट देखने, लेख पढ़ने, आडियो सुनने, वीडियो देखने और सुरक्षित करने में रुचि लेते हैं। ऐसे लोगों की विशेष निगहबानी करके ही आतंकियों के मददगार के तैयार होने वाले स्लीपिंग माड्यूल्स चिह्नित किए जाएंगे।
सोशल साइट्स की निगरानी संभव नहीं
खुफिया मामलों से जुड़ी एक शीर्ष सुरक्षा एजेंसी के आला अधिकारी बताते हैं कि हमारे पास ऐसी तकनीक है कि हम किसी भी देशी या विदेशी कॉल को ट्रैक कर सकते हैं। मगर, सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट और एप्लीकेशन के मामले में हमारे हाथ बंधे हुए हैं।
कारण कि फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप जैसी साइट और एप्लीकेशन के दफ्तर संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) में हैं। इसके चलते एक तो प्रत्यक्षत: इनकी निगरानी में दिक्कत आती है।
ऊपर से कोई भी विवरण मंगाना हो तो लंबा समय लग जाता है। हालांकि इस पर काम चल रहा है और हमें उम्मीद है कि जल्द ही हमारी समस्या का ठोस समाधान होगा।
बिछा खुफिया तंत्र का जाल
हाल के सालों में शिथिल पड़ चुका आतंकियों का आजमगढ़ माड्यूल्स कुशीनगर में रिजवान की गिरफ्तारी के बाद एक फिर खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर है।
आजमगढ़ माड्यूल्स की टोह लेने और पड़ताल के लिए बनारस, आजमगढ़ सहित पूर्वांचल के अन्य जिलों में सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी नेटवर्किंग तेज करते हुए खुफिया तंत्र का जाल बिछा दिया है। माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ अन्य नापाक मंसूबे वालों की गिरफ्तारी की जाएगी।