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पहले नजरबंद, फिर गिरफ्तार हुईं सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर

Sun, 27 Sep 2015 09:59 AM IST
Updated Sun, 27 Sep 2015 09:59 AM IST
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social activist medha patekar arrested

इलाहाबाद के करछना के कचरी गांव में आंदोलनकारी किसानों से मिलने जा रहीं सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें पकड़कर पुलिस लाइन ले जाया गया और घंटों बैठाए रखने के बाद लिखापढ़ी कर छोड़ दिया गया।

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गिरफ्तारी से पहले मेधा काफी देर तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में नजरबंद रहीं। मेधा और उनके साथियों ने कार्रवाई के विरोध में धरना-प्रदर्शन भी किया।
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कचरी में दो हफ्ते पहले हुए बवाल के कारण प्रशासन बिल्कुल नहीं चाहता था कि मेधा या उनका कोई साथी कचरी जाए और किसानों के साथ सभा करे। वह कचरी तो नहीं जा सकीं लेकिन शाम को किसानों को अपने पास बुलाकर वार्ता की और प्रशासन ने भी इसकी अनुमति दे दी।
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दअरसल, मेधा पाटकर यहा स्वराज विद्यापीठ में आयोजित व्याख्यान में शामिल होने आई थीं। कार्यक्रम शाम पांच बजे था। कार्यक्रम में शामिल होने से पहले उन्हें कचरी में किसानों से मिलने जाना था।

गेस्ट हाउस से ही कर दिया नजरबंद

social activist medha patekar arrested

वह सुबह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गेस्टहाउस में पहुंची। पुलिस ने तकरीबन 9.30 बजे कानून-व्यवस्था का हवाला देकर उन्हे गेस्ट हाउस में ही नजरबंद कर दिया।

इस पर उन्होंने विरोध जताया और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास के सामने स्थित स्वराज विद्यापीठ के कार्यालय पहुंच गईं। कचरी जाने पर अड़ीं मेधा और उनके साथियों ने वहीं धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

मामला बढ़ने पर पुलिस ने उन्हें और उनके साथ सीटू के नेता हरीशचंद्र द्विवेदी, आजादी बचाओ आंदोलन के प्रो. कृष्ण स्वरूप आनंदी, सर्व सेवा संघ के अमरनाथ भाई, आईपीएफ के राजेश सचान, शहरी गरीब संघर्ष मोर्चा के अंशु मालवीय, उत्पला मालवीय, एनएपीएम के अभिषेक, विजय, सत्यपाल, दमन विरोधी मंच के ओडी सिंह को गिरफ्तार कर लिया और पुलिस लाइन लेकर चली गई।

वहां उन्हें एसपी यमुनापार आशुतोष मिश्र की निगरानी रखा गया। शाम पांच बजे लिखापढ़ी के बाद सबको छोड़ दिया गया। इसके बाद मेधा स्वराज विद्यापीठ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने चली गईं।

पांच साल बाद भी नहीं शुरू हुआ करछना पावर प्लांट

social activist medha patekar arrested

गौरतलब है कि किसानों के विरोध के कारण ही जमीन अधिग्रहण के बावजूद करछना पावर प्लांट का निर्माण पांच साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है।

दो हफ्ते पहले करछना के कचरी गांव में उस वक्त उग्र विरोध हो गया था, जब वहां से 25 किलोमीटर दूर मेजा पावर प्लांट के लिए 10 परिवारों को विस्थापित किया जा रहा था।

विरोध में कचरी के किसानों ने दिल्ली-हावड़ा रेल रूट को पांच मिनट के लिए जाम कर दिया था। इस पर पुलिस ने आंदोलनकारियों पर जमकर लाठियां बरसाई थीं।

आंदोलनकारियों के मुखिया राज बहादुर पटेल के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने के साथ प्रशासन ने उन पर पर इनाम भी घोषित कर दिया था।

42 ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

social activist medha patekar arrested

इसके अलावा भी 42 ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। दर्जनों ग्रामीणों सहित राज बहादुर की पत्नी, बेटी और बेटे को भी गिरफ्तार किया गया था। घटना के बाद से राज बहादुर अब तक फरार हैं।

प्रशासन को जब सूचना मिली की मेधा पाटकर इलाहाबाद आ रही हैं और शनिवार को कचरी में किसानों से मिलेंगी तो शुक्रवार को ही कचरी और असपास के गांव में बड़े पैमाने पर फोर्स तैनात कर दी गई और पूरा प्रशासनिक अमला इस प्रयास में जुट गया कि मेधा को किसी भी तरह वहां पहुंचने से रोका जाए।

‘ग्रामीण अंचलों में पंचायत चुनाव की आदर्श आचार संहिता के साथ जिले में धारा-144 लागू है। कचरी जाकर सभा करने के लिए मेधा पाटकर की ओर से पूर्व में कोई सूचना भी नहीं दी गई थी और न ही प्रशासन से अनुमति ली गई थी। इसी वजह से उन्हें कचरी जाने एवं सभा करने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें गिरफ्तारी किया गया।’
संजय कुमार, जिलाधिकारी

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