मोदी को घेरने के चक्कर में पड़ी यूपीए में फूट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले ही महिला जासूसी कांड की जांच कराने पर अड़ी कांग्रेस अपने सहयोगी दलों के दबाव के चलते बैकफुट पर आ गई है। यूपीए में शामिल नेशनल कांफ्रेंस और एनसीपी ने सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए इसकी टाइमिंग पर सवाल खड़े किए हैं।
किसी तरह की किरकिरी से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने पुराने रुख से पलटते हुए कहा है कि यूपीए में लोकतंत्र है और वह कोई भी फैसला सहयोगी दलों से विचार विमर्श के बाद ही लेगी।
आयोग के गठन के बाद चुप्पी साधे रही केंद्र सरकार ने हाल ही में अचानक जांच के लिए हाईकोर्ट के एक रिटायर जज को नियुक्त करने की घोषणा की लेकिन मोदी को घेरने के लिए जांच को अंतिम हथियार बनाने की कांग्रेस की कोशिशें कामयाब होती नहीं दिख रही हैं। यूपीए के सहयोगी दलों ने इस कदम पर नाराजगी जाहिर की है।
NC और NCP की नाराजगी ने बढ़ाई परेशानी
रविवार को सबसे पहले नेशनल कांफ्रेंस ने इस मामले में कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोला तो बाद में एनसीपी ने भी नाराजगी जाहिर कर कांग्रेस की परेशानी बढ़ा दी। उमर ने ट्वीट कर जांच के फैसले का विरोध किया।
वहीं एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने भी फैसले का विरोध करते हुए कहा कि जांच का फैसला नई सरकार पर छोड़ देना चाहिए। साथ ही भाजपा की विरोधी जदयू के नेता केसी त्यागी ने भी सरकार के कदम का विरोध किया।
इसके बाद कांग्रेस को अपना आक्रामक रवैया त्यागना पड़ा और अब वह विचार विमर्श के बाद आगे बढ़ने की बात कह रही है। इससे पहले कांग्रेस महिला मोर्चा की प्रमुख शोभा ओझा ने मामले को महिला सम्मान से जुड़ा बताते हुए हर हाल में जांच कराने की घोषणा की थी। उन्होंने इस मामले में मोदी से 10 सवाल भी पूछे थे।
विचार विमर्श के बाद लेंगे अंतिम निर्णय
भाजपा का कांग्रेस पर तीखा हमला
महिला जासूसी मसले पर यूपीए में फूट पड़ने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के वरिष्ठ नेता एमजे अकबर ने कहा कि यह जाती हुई सरकार का असंवैधानिक और बदला लेने की नीयत से लिया गया फैसला है। इसमें कोई शक नहीं है कि नई सरकार इस फैसले को तत्काल पलट देगी।
क्या है मामला
एक स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया गया था कि गुजरात सरकार में तत्कालीन गृह राज्य मंत्री अमित शाह के इशारे पर एक महिला की अवैध रूप से जासूसी कराई गई थी। यह भी कहा गया कि शाह ने यह जासूसी किसी साहेब के कहने पर कराई और यह साहेब और कोई नहीं बल्कि खुद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं।