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जर्मन राजदूत के सत्संग में स्मृति को न्योता

Thu, 27 Nov 2014 03:09 PM IST
Updated Thu, 27 Nov 2014 03:09 PM IST
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Smriti Irani invited for German Envoy's Satsang

जर्मन राजदूत माइकल स्टेनर ने इस शुक्रवार को अपने जन्मदिन पर एक सत्संग का आयोजन रखा है। दिलचस्प बात यह है कि स्टेनर ने अपने इस सत्संग में भारत की मानव संसाधन एवं विकास मंत्री स्मृति ईरानी को भी न्यौता भेजा है।

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ऐसा माना जा रहा है कि यह आयोजन इसी भाषायी मुद्दे की उपज है। हालांकि आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के सानिध्य में इस सत्संग का आयोजन कराने वाले स्टेनर ने कहा है कि इस सत्संग के आयोजन का हालिया भाषायी विवाद से लेना देना नहीं है।
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जर्मन राजदूत ने कहा है कि मैने और मेरी पत्नी ने मौजूदा भारत-सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से पहले ही इसके लिए फैसला किया था। उन्होंने बताया कि हमने इस बारे में श्री श्री रवि शंकर को चिट्ठी लिखी थी और उन्होंने हमारे निवेदन को सहर्ष स्वीकार किया था। स्टेनर ने कहा कि इस सत्संग में काफी सारे लोगों को निमंत्रण भेजा गया है जिसमे से कुछ राजनेता और कुछ अन्य लोग भी हैं।
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स्टेनर ने बताया कि श्री श्री रविशंकर, किस तरह से अलग-अलग धर्मों के लोगों को एक साथ लाया जा सकता है और किस तरह से यूरोप और इंडिया के बीच की आपसी समझ को और विकसित किया जा सकता है, इन मुद्दों पर प्रवचन देंगे।

सिर्फ स्मृति नहीं कई और लोगों को भी बुलावा

Smriti Irani invited for German Envoy's Satsang

स्टेनर से जब पूछा गया कि क्या ईरानी को निमंत्रण भेजा गया है? इसके जवाब में उन्होंने कहा, "हम लोग हेड काउंट नहीं करना चाहते हैं, हमने काफी सारे केंद्रीय मंत्रियों को न्योता भेजा है।" जब उनसे इस बारे में दोबारा पूछा गया इस पर उन्होंने कहा इसमें हर कोई आएगा।

जब स्टेनर से पूछा गया कि क्या आरएसएस नेता और दक्षिणपंथी विचारधारा वाले दीनानाथ बत्रा को भी निमंत्रण भेजा गया है, इसके जवाब में स्टेनर ने बताया कि दूतावास का नजरिया समावेशी है।

जब स्टेनर से पूछा गया कि भारत में जर्मन भाषा को लेकर चल रहा ताजा विवाद कोई सार्थक हल निकल पाएगा, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का पूरा भरोसा है कि उपलब्ध कानूनों के मुताबिक ही कोई बेहतर हल निकलेगा। हालांकि वो इस मुद्दे पर आगे बात करने से बचते नजर आए।

गौरतलब है कि स्टेनर हाल ही में उस वक्त सक्रिय हो गए थे जब भारत सरकार की मानव संसाधन और विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने केंद्रीय स्कूलों में जर्मन के के बजाए संस्कृत को बतौर तीसरी भाषा पढ़ाए जाने की वकालत की थी।

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