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‘फिल्मों में धूम्रपान पर केंद्र ने हाईकोर्ट को किया भ्रमित’

Wed, 16 Jan 2013 08:01 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 16 Jan 2013 08:01 PM IST
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smoking in films center confused High Court

फिल्मों में सिगरेट-तंबाकू पदार्थ के सेवन संबंधी दृश्य दिखाने के मसले पर केंद्र सरकार की ओर से जारी की गई दूसरी अधिसूचना को बॉलीवुड के फिल्म निर्माता महेश भट्ट सर्वोच्च अदालत में चुनौती देंगे।

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बुधवार को भट्ट ने आरोप लगाया कि दोबारा जारी की गई अधिसूचना के मामले में केंद्र ने हाईकोर्ट को भ्रमित किया। इसके चलते उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया। सर्वोच्च अदालत ने उन्हें इस दलील पर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए कहा और पहली अधिसूचना से संबंधित मामले की सुनवाई टाल दी।
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जस्टिस पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष फिल्म निर्माता के अधिवक्ता ने कहा कि हाईकोर्ट में केंद्र की ओर से 27 अक्टूबर, 2011 को जारी की गई उस अधिसूचना को चुनौती दी गई, जिसमें चेतावनी के साथ सिगरेट-तंबाकू पदार्थ के सेवन संबंधी दृश्य दिखाने की अनुमति प्रदान की गई थी। सरकार ने हाईकोर्ट में यह तर्क दिया कि इस मसले पर शीर्षस्थ अदालत में मामला लंबित है।
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इस आधार पर हाईकोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया। जबकि सर्वोच्च अदालत में 2006 में केंद्र की ओर से जारी की गई पहली अधिसूचना से संबंधित मामला लंबित था, जिसे हाईकोर्ट ने 23 जनवरी, 2008 को रद्द कर दिया था। भट्ट के अधिवक्ता ने कहा कि केंद्र की ओर से इस मामले में हाईकोर्ट को भ्रमित किया गया है। अदालत से गुजारिश है कि इस मामले में उचित आदेश जारी करे।

पीठ ने इस पर कहा कि पहली अधिसूचना से संबंधित मामला यहां लंबित है। ऐसे में दूसरी अधिसूचना के खिलाफ भी सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर दें। दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ हो जाएगी। याद रहे कि पहली अधिसूचना को रद्द करने के मसले पर केंद्र सरकार ने शीर्षस्थ अदालत का दरवाजा खटखटाया है।


पहली अधिसूचना हाईकोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि इस प्रकार के दृश्यों अर्थात सच्चाई को कानून के जरिए दिखाने से नहीं रोका जा सकता। यह संविधान के अनुच्छेद 19 में प्रदान अधिकारों का उल्लंघन है। इतना ही नहीं यदि अच्छाई दिखाई जाती है तो नकारात्मक पहलुओं को भी दिखाना जरूरी है।

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