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महिला आईएएस को 'आई कैंडी’ बताने पर बवाल, भेजा नोटिस

Thu, 02 Jul 2015 08:54 PM IST
Updated Thu, 02 Jul 2015 08:54 PM IST
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Smita Sabharwal: Indian 'eye candy' official sues Outlook

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“…वो काम क्या करती हैं, ये तो एक पहेली है। पार्टी के नेताओं के मुताबिक वो अपनी खूबसूरत साड़ियों से फैशन स्टेटमेंट देती हैं और मीटिंग में ‘आई कैंडी’का काम करती हैं.”

अंग्रेज़ी पत्रिका ‘आउटलुक’ ने जब तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त सचिव स्मिता सब्बरवाल के बारे में ऐसा लिखा तो उन्होंने पत्रिका को मानहानी का क़ानूनी नोटिस भेज दिया है।

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स्मिता ने अपने नोटिस में मांग की है कि पत्रिका माफीनामा छापे।पर आउटलुक पत्रिका ने बीबीसी को बताया कि उन्हें अभी तक ये नोटिस नहीं मिला है।

बीबीसी से बातचीत में स्मिता सब्बरवाल ने कहा, “मुझे सबसे बुरा ये लगा कि एक पत्रिका जिसे लाखों लोग पढ़ते हैं वो ऐसा सुझाए कि एक महिला अपनी ख़ूबसूरती की वजह से अपने करियर में आगे बढ़ पा रही है।”
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हालांकि पत्रिका ने अपने लेख के साथ छापा कार्टून अपनी वेबसाइट से हटा लिया है। इस कार्टून में एक महिला को फैशन शो में हिस्सा लेते हुए दिखाया गया था और कुछ नेताओं को ‘बुरी नज़र’ से महिला की तरफ़ घूरते हुए दिखाया गया था।

लेख में ऑफिसर का नाम लिए बगैर ये लिखा था कि हमेशा साड़ी पहनने वाली महिला एक फैशन शो में पैंट और फ्रिल वाली टॉप में नज़र आईं तो फोटो खींचने का अच्छा मौका बना।

“ये ओछी पत्रकारिता की मिसाल है''

Smita Sabharwal: Indian 'eye candy' official sues Outlook

14 साल से आईएएस ऑफिसर स्मिता सब्बरवाल के मुताबिक, “ये ओछी पत्रकारिता की मिसाल है, ये महिला-विरोधी सेक्सिस्ट सोच है जो बदलते समाज में अब कम ही लोगों में बची है, पर पत्रिका इस पुरानी सोच को प्रकाशित कर बढ़ावा दे रही है.”

उन्होंने कहा कि वे फ़ैशन शो में अपने पति के साथ बतौर महमान गई थीं।

करीयर में आगे बढ़ने के पीछे एक महिला का काम नहीं उसकी सुंदरता होती है, कई लोग इस तरह के आरोप लंबे समय से लगाते आए हैं। साड़ी की जगह पैंट-टॉप पहनने पर महिला को अलग नज़र से भी देखा जाता रहा है।

पर इस सोच को पुराना और रूढ़ीवादी बताने में महिलाओं का साथ अक़्सर पत्रकारों ने ही दिया है। पुरुषों के प्रभुत्व वाले काम और उद्योगों में महिलाओं के आने पर लेख भी लिखे गए हैं। तो क्या ये महिलावादी समझ महज़ सतही है?

सुंदरता के चश्मे से ही औरतों की सफलता ?

Smita Sabharwal: Indian 'eye candy' official sues Outlook

मीडिया पर नज़र रखने वाली वेबसाइट ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ चलाने वाली वरिष्ठ पत्रकार मधू त्रेहन के मुताबिक पत्रकारिता में सेक्सिस्ट लेखों और तस्वीरों की मिसालें अब भी आम हैं।

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, “इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि संस्थान बड़ा है या छोटा, या पत्रकार बड़े शहर में काम करता है या छोटे, ये सोच अभी भी है, देखें तो अक़्सर महिला खिलाड़ियों की जो तस्वीरें छापी जाती हैं, वो भी ‘ख़राब’ नज़र से होती है।.”

ऐसी ही एक मिसाल पिछले साल सामने आई जब अंग्रेज़ी अख़बार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने बॉलीवुड अभिनेत्री दीपीका पाडुकोण की ‘क्लीवेज’ वाली एक तस्वीर छापी थी।

दीपीका ने सोशल मीडिया के ज़रिए कहा था कि महिला सशक्तिकरण के दौर में पाठकों की नज़र एक कामकाजी औरत की तरफ़ ऐसे खींचना ग़लत है।

अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा था, "हां, मैं एक औरत हूं. मेरे पास स्तन हैं, क्लीवेज है। आपको कोई समस्या है इस बात से?"

फिर अख़बार ने दीपिका के इस ग़ुस्से पर जवाब देते हुए एक ट्वीट किया, "दीपिका, हम तो आपकी तारीफ़ कर रहे हैं। आप बेहद ख़ूबसूरत हैं और हम चाहते हैं कि हर किसी को इस बात का पता चले।"

कई लोग इसे बहुत महीन कहते हैं, पर एक बहुत साफ रेखा है जो तारीफ़ की सीमाओं को बद्दतमीज़ी की हद में बदल देती है। फर्क नज़रिए का है, रेखा के इस ओर या उस ओर। महिला की तारीफ एक जगह है और उसकी काबिलियत को कम आंकना या सुंदरता के नाम पर दरकिनार कर देना दूसरी।

आखिर ये भी साफ़ है कि सफल कामकाजी पुरुषों के रूप-रंग पर ऐसी टिप्पणियां नहीं की जाती। शायद ही किसी लेख में उनके पहनावे को उनके करियर से जोड़ा जाता हो।

मधु त्रेहन के मुताबिक समाज की सोच को बदलने की ज़रूरत है, “पत्रकार भी तो अपने आसपास के माहौल से सोच बनाते हैं, आए दिन नेताओं की ओर से सेक्सिस्ट बयान आते हैं और इनमें कई खुद महिला होती हैं, तो असर तो होगा ही।”

स्मिता सब्बरवाल देश के किसी मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव पद पर नियुक्त की जाने वाली पहली महिला ऑफिसर हैं। उनके मुताबिक पुरुषों के वर्चस्व वाले काम में अपने लिए जगह बनाना भी इस तंज़ भरे लेख के पीछे की वजह हो सकती है।

उन्होंने कहा, “मेरी ये उपलब्धि शायद कुछ पुरुषों को पसंद नहीं आई हो, पर पत्रिका का मेरे काम के बारे में जानकारी जुटाए बिना ऐसी बातों को जगह देना निंदनीय है।”

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