स्मार्टफोनः 'तकनीकी क्रांति' या 'बातचीत की मौत'
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"स्मार्टफोन ने हर किसी को सुस्त कर दिया है।" लुभावनी तस्वीरों की इस सिरीज के फोटोग्राफर ने ये दावा किया। खुद को 'बेबीकेक्स रोमेरे' के नाम से पेश करने वाले फोटोग्राफर ने अपनी इस सिरीज को 'डेथ ऑफ कनवर्सेशन' या 'बातचीत की मौत' का नाम दिया है।
फोन का इस्तेमाल करने के कुछ सामाजिक तौर-तरीके हुआ करते थे। बकौल फोटोग्राफर अब ये शिष्टाचार गायब होते हुए दिख रहे हैं। इन तस्वीरों के जरिए उन्होंने ये बताने की कोशिश की है कि आखिर क्यों लोग कम्प्यूटर की आभासी दुनिया से इतनी मोहब्बत करने लगते हैं।
बेबीकेक्स रोमेरो कहते हैं कि शादी विवाह जैसे सामाजिक मौकों पर अजनबियों के साथ बैठना, साथ खाना-पीना, अक्सर मुश्किल लगता है। अतीत में मेहमानों को हल्की-फुल्की गपशप में शिरकत करना होता था और किसी शाम के ढलते-ढलते कोई एक नया दोस्त बना लिया करता था।
दिल है कि स्मार्टफोन के बिना मानता नहीं
लेकिन अब स्मार्टफोन का जमाना है और लोगों के पास इससे बचने का विकल्प मौजूद है। रोमेरो कहते हैं कि वे सड़कों पर ऐसे लोगों को चलते हुए देखते हैं जो इस दुनिया में होने की बजाय किसी और दुनिया में चलते हुए दिखाई देते हैं। मानो उनके तार किसी चीज से जुड़े हुए हों।
वो कहते हैं कि लोग अमूमन किसी चीज से ब्रेक लेते हैं और सबसे पहले फोन उठाते हैं और इस मामले में पुरानी पीढ़ी भी नौजवानों की तरह ही खराब है। रोमेरो का कहना है कि सामने वाले से खुद को काटने का स्मार्टफोन एक बहाना भर है।
इसका मकसद किसी का अपमान करना नहीं होता है, लेकिन स्मार्टफोन से दिल्लगी करने की चाहत कुछ ऐसी है कि इस पर कंट्रोल नहीं होता है।