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छोटी सी पेन ड्राइव, साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Mon, 01 Oct 2012 12:18 AM IST
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छोटी सी पेन ड्राइव, साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो रही है। प्रतिबंध के बावजूद डिफेंस फोर्स की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाने के अधिकतर मामलों में पेन ड्राइव ही मुख्य हथियार बनकर उभर रही है। भारतीय सेना के अधिकारियों के मुताबिक सेंध लगाने में 70 फीसदी से ज्यादा मामलों में पेन ड्राइव का ही प्रयोग किया गया है।
सेना के एक अधिकारी ने कहा, ‘पेन ड्राइव को बेहद आसानी से ले जाया जा सकता है और इसका इस्तेमाल पिछले कुछ दिनों में ज्यादा हुआ है। अंतरिम रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि सेना में 70 प्रतिशत से ज्यादा सुरक्षा में सेंध में इसी उपकरण का प्रयोग हुआ है। चीन में निर्मित यह पेन ड्राइव हमारे साइबर सुरक्षा सिस्टम के लिए बड़ा खतरा बन गई है।’
सूत्रों ने जानकारी दी कि सेना मुख्यालय में संवेदनशील सेना नेटवर्क को हैकरों के हमले से बचाने के लिए नए सिरे दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। भारतीय वायु सेना और जल सेना भी इस दिशा में उचित कदम उठाए जा रहे हैं। वायु सेना ने हाल ही में अपने सभी कर्मियों को चेतावनी दी है कि उनके निजी कंप्यूटर और पेन ड्राइव में किसी प्रकार का आधिकारिक डाटा नहीं होना चाहिए।
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सभी को अपनी तकनीकी संपत्तियों के बारे में पूरी जानकारी देनी होगी। सूत्रों ने बताया कि अगर जांच के दौरान कोई भी नियमों का उल्लंघन करते पाया गया, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत कोर्ट मार्शल तक का प्रावधान है। भारतीय वायु सेना के प्रवक्ता विंग कमांडर गेरार्ड गालवे ने भी इसकी पुष्टि की है।
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सेना के एक अधिकारी ने कहा, ‘पेन ड्राइव को बेहद आसानी से ले जाया जा सकता है और इसका इस्तेमाल पिछले कुछ दिनों में ज्यादा हुआ है। अंतरिम रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि सेना में 70 प्रतिशत से ज्यादा सुरक्षा में सेंध में इसी उपकरण का प्रयोग हुआ है। चीन में निर्मित यह पेन ड्राइव हमारे साइबर सुरक्षा सिस्टम के लिए बड़ा खतरा बन गई है।’
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सूत्रों ने जानकारी दी कि सेना मुख्यालय में संवेदनशील सेना नेटवर्क को हैकरों के हमले से बचाने के लिए नए सिरे दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। भारतीय वायु सेना और जल सेना भी इस दिशा में उचित कदम उठाए जा रहे हैं। वायु सेना ने हाल ही में अपने सभी कर्मियों को चेतावनी दी है कि उनके निजी कंप्यूटर और पेन ड्राइव में किसी प्रकार का आधिकारिक डाटा नहीं होना चाहिए।
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सभी को अपनी तकनीकी संपत्तियों के बारे में पूरी जानकारी देनी होगी। सूत्रों ने बताया कि अगर जांच के दौरान कोई भी नियमों का उल्लंघन करते पाया गया, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत कोर्ट मार्शल तक का प्रावधान है। भारतीय वायु सेना के प्रवक्ता विंग कमांडर गेरार्ड गालवे ने भी इसकी पुष्टि की है।