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स्लीपर क्लास के रेलयात्री कृपया ध्यान दें

Sat, 01 Dec 2012 08:58 AM IST
नई दिल्ली/चंदन जायसवाल
नई दिल्ली/चंदन जायसवाल Updated Sat, 01 Dec 2012 08:58 AM IST
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sleeper class rail passengers must carry identity proof

रेलवे ने टिकटों की कालाबाजारी रोकने के लिए आज से एक नया नियम लागू कर दिया है। इसके तहत अब स्लीपर बोगी में भी यात्रा करने वाले रेलयात्रियों को टिकट के साथ फोटो पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा। यदि यात्रा के दौरान आप टीटीई को पहचान पत्र नहीं दिखा पाते हैं, तो बेटिकट माने जाएंगे।

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अभी तक यह नियम ऑनलाइन बुकिंग, तत्काल टिकट और एसी बोगी में यात्रा करनेवाले रेलयात्रियों पर ही लागू होता था, लेकिन आज से स्लीपर बोगी में भी यात्रा करने वाले रेलयात्री को पहचान पत्र दिखाना जरूरी हो गया है। इससे पहले रेलवे ने फरवरी में वातानुकूलित डिब्बों में यात्रा करने वालों के लिए पहचान पत्र रखना अनिवार्य कर दिया था। तत्काल टिकट या ई-टिकट पर यात्रा करने वालों को भी यात्रा के दौरान परिचय पत्र रखना होता है।
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रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का मानना है कि नया नियम लागू होने से टिकटों की कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा और दलाल दूसरे के नाम से टिकट नहीं खरीद पाएंगे। वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार आज से स्लीपर डिब्बे में भी टीटीई द्वारा मांगने पर मूल परिचय पत्र नहीं दिखा पाने वाले रेलयात्रियों को बिना टिकट माना जाएगा और उसके मुताबिक उनसे हर्जाना वसूला जाएगा।
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यह नियम किसी भी तरह से प्राप्त टिकट पर लागू होगा चाहे काउंटर से ली गई हो या इंटरनेट से। यही नहीं अगर आपने एक साथ चार टिकट बुक कराए हैं तो चारों में से किसी एक यात्री को अपना पहचान पत्र साथ लेकर चलना अनिवार्य होगा।

क्या रखें रेल यात्रा के दौरान
रेल यात्रा के दौरान रेलयात्री निम्न दस तरह के परिचय पत्रों में से किसी एक को अपने साथ रख सकते हैं। इनमें मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, विद्यार्थियों के लिए मान्यता प्राप्त स्कूल-कॉलेज द्वारा फोटो के साथ जारी परिचय पत्र, आधार कार्ड, केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र, राष्ट्रीयकृत बैंक की फोटो लगी पासबुक और बैंकों द्वारा लेमिनेटिड तस्वीर के साथ क्रेडिट कार्ड हैं।

उधर, रेलवे के इस नए नियम से टिकट की कालाबाजारी से परेशान लोग जहां खुश हैं, वहीं वैसे लोग जिनके पास कोई पहचान पत्र नहीं है, वो बड़ी मुसीबत में पड़ गए हैं। खास करके ग्रामीण तबके के वे लोग जिनके पास किसी भी तरह का कोई पहचान पत्र नहीं है।


हालांकि रेलवे को अपनी इस नई पहल से बहुत उम्मीदें हैं, लेकिन अब तक इसके सभी दावे खोखले ही साबित हुए है। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण है तत्काल टिकटों की बुकिंग। रेलवे ने तत्काल टिकटों की कालाबाजारी रोकने के लिए भले ही दस जुलाई से बुकिंग का समय बदल दिया हो, लेकिन व्यवस्थाएं वही पुरानी चल रही हैं। आरक्षण केंद्रों में सीसीटीवी कैमरा लगाने, काउंटर पर बैठने वाले बुकिंग क्लर्क को मोबाइल रखने पर प्रतिबंध लगाने जैसे नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है।

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