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छह साल बाद मिली बच्ची, गजब है मिलन की कहानी

Sat, 04 Apr 2015 11:17 PM IST
Updated Sat, 04 Apr 2015 11:17 PM IST
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Six years later child was found

छह साल से बिटिया की तलाश में दर-दर की ठोकरें खा रहे गोरखपुर निवासी मां-बाप का दामन शनिवार को खुशियों से भर गया। बेटी को देखते ही उसे कलेजे से लगाकर माता-पिता रो पड़े। जुबां से कोई शब्द नहीं, आंखों से झर-झर बहते आंसुओं ने ही एक-दूसरे से सारा हाल बयां कर दिया।

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भावुक हुए माहौल में जीआरपी थाने पर जुटे लोग ही नहीं, सुरक्षाकर्मियों की भी आंखें छलक आईं। संयोग ऐसा कि जिस कैंट रेलवे स्टेशन पर छह साल पहले बेटी बिछड़ी थी, वहीं परिवार से दोबारा मिलन भी हुआ।
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हालांकि बिछुड़ने के बाद जिस नि:संतान दंपती ने उसे अपनी बेटी मानते हुए पाला-पोसा उनके हिस्से रुसवाई ही आई। लड़की की जानकारी छिपाने और बार-बार पता बताने पर उसे घर पहुंचाने का प्रयास नहीं करने के आरोप में जीआरपी ने चालान कर दिया।
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गोरखपुर के बेलीपार थाना क्षेत्र के भरवल निवासी सुग्गन और मंजू देवी की पुत्री निशा (14) छह साल पहले दादी के साथ गंगा स्नान के लिए वाराणसी आई थी। तब उसकी उम्र आठ साल थी। स्टेशन पर ही किसी तरह वह परिवार से बिछड़ गई।

बिछड़ने के बाद मासूम को निःसंतान दंपति ने पाला

Six years later child was found

भदोही जिले के गोपीगंज निवासी एकबाज और उसकी पत्नी सुनीता ने उसे प्लेटफार्म पर रोते-बिलखते देखा तो उसे अपने घर लेते गए। तब निशा के माता-पिता ने जीआरपी में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

एकबाज और सुनीता को कोई बच्चा नहीं है। संतान की लालच में दोनों ने ग्राम प्रधान और क्षेत्र के अन्य गणमान्य व्यक्तियों की सहमति से निशा के पालन-पोषण की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।

निशा के मुताबिक उसने एकबाज और अन्य लोगों को अपने परिवारवालों का नाम-पता बताया लेकिन तब उसे ढांढस बंधाया जाता था कि तुम्हारे माता-पिता को खोजा जा रहा है। जल्द ही तुम्हें पहुंचा दिया जाएगा लेकिन उसे उसके घर पहुंचाने के बजाय वह उसे अपनी बेटी मानकर पालन-पोषण करने लगे।

शायद यह सोचकर कि धीरे-धीरे वह पहले की बातों को भूल जाएगी। इसी चक्कर में निशा का नाम बदलकर रूबी रख दिया गया। हाल ही में यह मामला तब खुला जब एकबाज का उसके पड़ोसी से विवाद हो गया। पड़ोसी ने गोपीगंज थाने में लड़की से जुड़ी सूचना दी।

बच्ची को जानबूझकर अपने पास रखने पर भेजा जेल

Six years later child was found

इंस्पेक्टर यूपी सिंह पूछताछ के बाद निशा को अपने साथ लेकर कैंट स्थित जीआरपी थाने पहुंचे। यहां दर्ज कराई गई गुमशुदगी के आधार पर निशा के पिता सुग्गन को सूचना दी गई। सुग्गन भी राजगीर का काम करते हैं। शनिवार को वह पत्नी मंजू के साथ यहां पहुंचे तो निशा देखते ही उन्हें पहचान गई।

छह साल बाद बेटी को आंखों के सामने देख मां-बाप उसे कलेजे से लगाकर रो पड़े। निशा ने यहां पुलिस और जीआरपी की मौजूदगी में छह साल पहले की सारी घटना बताई। उसने पुलिस अधिकारियों से यह निवेदन भी किया कि एकबाज और उनकी पत्नी पर कोई कार्रवाई न की जाए क्योंकि उन्होंने उसको पाला-पोसा है।

जीआरपी इंस्पेक्टर अनिल राय ने बताया कि एकबाज ने लड़की की जानकारी छिपाई और बार-बार पता बताने पर भी उसे घर पहुंचाने का प्रयास नहीं किया इसलिए उसका चालान कर दिया गया।

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