फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   six prisoners run from jail in a film style

..और जब फिल्मी स्टाइल में फरार हुए छह बंदी

Sun, 29 Mar 2015 02:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर।
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर। Updated Sun, 29 Mar 2015 02:08 PM IST
विज्ञापन
six prisoners run from jail in a film style

राजकीय बाल सुधार गृह से शुक्रवार रात छह किशोर बंदी फिल्मी स्टाइल में फरार हो गए। बंदियों ने फरार होने के लिए कई दिनों तक योजना पर अमल किया। उन्होंने पहले कमरे की दीवार से ईंट उखाड़ी और किचन में पहुंचे। किचन के रोशनदान को तोड़ा और रोशनदान से निकलने के लिए चादर को रस्सी के तौर पर इस्तेमाल कर फरार हो गए। छह बंदियों के भागने से हड़कंप मच गया है। हालांकि बाद में एक बंदी को पकड़ लिया गया है। फरार होने वाले सभी बंदी हापुड़ जिले के रहने हैं। प्रभारी

विज्ञापन


डीएम और एसएसपी ने बाल सुधार गृह पहुंचकर पूछताछ की। डीएम ने लापरवाही पर वार्डेन का सस्पेंड कर दिया है। साथ ही बाल सुधार गृह के अधीक्षक के खिलाफ शासन को लिखा गया है। बाल सुधार गृह की सुरक्षा में पूरी तरह लापरवाही बरती गई। महज दो होमगार्ड ही तैनात थे।

विज्ञापन

वार्डन के उड़ गए होश

six prisoners run from jail in a film style

मेरठ राजकीय बाल सुधार गृह में पुलिसकर्मियों पर हमले के बाद कमिश्नर के आदेश पर वलीपुरा नहर के पास ट्रांजिट हास्टल में 12 कमरों का बाल सुधार गृह बनाया गया है। यहां हापुड़ और बुलंदशहर के कुल 44 बंदी थे। बाल सुधार गृह प्रशासन के मुताबिक, हापुड़ के बंदियों की संख्या 18 है।

शुक्रवार रात करीब 2-3 बजे बाल बंदियों ने अपने कमरे की ईंटें उखाड़ दीं। उसके पीछे किचन था। ईंट निकाल दीवार में दायरा बनाकर बंदी किचन में पहुंचे और वहां का रोशनदान तोड़ दिया। इसके बाद बंदियों ने चादरों को रस्सी की तरह इस्तेमाल किया। रोशनदान से चादर लटका कर बंदी फरार हो गए।

सुबह वार्डेन कमरे में पहुंचे तो उनके होश उड़ गए। बंदियों के फरार होने से हड़कंप मच गया। आनन-फानन में बंदी गृह के अधीक्षक को सूचना दी गई। बंदियों की तलाश में सर्च अभियान चलाया गया। बाद में एक बंदी को पकड़ लिया गया। उससे पूछताछ की जा रही है। अधीक्षक नेमचंद का कहना है कि एक बंदी पकड़ा गया है।

44 बंदी और महज दो होमगार्ड

six prisoners run from jail in a film style

बाल सुधार गृह से आए दिन बाल अपराधियों के फरार होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसके बावजूद सुधार गृह प्रशासन ने एहतियात नहीं बरता। बाल सुधार गृह में सुरक्षा बंदोबस्त नहीं किया गया। 44 बाल बंदियों की सुरक्षा के लिए महज दो होम गार्ड की ड्यूटी लगाई गई थी। खुद बाल सुधार गृह अधीक्षक सुरक्षा में चूक मान रहे हैं।

फरार बंदियों पर हैं संगीन मामले
थाना हापुड़ देहात के तीन और थाना पिलखुवा क्षेत्र के तीनों बंदियों पर गंभीर धाराओं में केस पंजीकृत हैं। फरार दो बाल बंदियों पर हत्या के प्रयास और बलात्कार का केस है।

तीन दिन दीवार खुरची
ऐसा नहीं है कि बाल बंदियों ने एक ही दिन में भागने की प्लानिंग कर ली। बाकायदा योजना बनाकर कई दिनों तक उस पर काम किया गया। कमरे और किचन से भागने का रास्ता तलाश ईंट निकालने की जुगत की गई। सवाल यह है कि इतना सब कुछ हो गया और बाल सुधार गृह प्रशासन को सुबह घटना की जानकारी हुई।

प्रभारी डीएम विशाल सिंह ने बताया कि बाल बंदी तीन दिन से दीवार खुरच रहे थे। एक बाल बंदी ने इस करतूत को देख शोर मचाने का प्रयास किया था तो बाल बंदियों ने उसे बुरी तरह पीटा था। पिटाई से बंदी की आंख और चेहरा सूज गया था। इसके बाद भी वार्डन को यह सब पता नहीं चला।

शनिवार को एसएसपी अनंत देव और प्रभारी डीएम विशाल सिंह समेत तमाम अफसर बाल सुधार गृह पहुंचे और मौके का मुआयना किया। मुआयना करने के बाद प्रभारी डीएम विशाल सिंह ने बताया कि बाल बंदी फिल्मी स्टाइल में फरार हुए हैं।

विज्ञापन

उम्र का खेल, बालिग हैं बाल बंदी

six prisoners run from jail in a film style

हापुड़ और पिलखुवा के फरार बाल बंदियों की उम्र 18 वर्ष से अधिक बताई जा रही है। पिछले दिनों डीएम बी. चंद्रकला ने बाल सुधार गृह का निरीक्षण किया था। डीएम ने अधिक उम्र के बंदियों को कम उम्र के बंदियों से अलग रखने को अधीक्षक से कहा था। डीएम ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए थे कि बंदियों की उम्र की जांच कराई जाए।

''बाल सुधार गृह से छह बाल बंदी किचन का रोशनदान तोड़कर फरार हुए हैं। एक आरोपी को पकड़ लिया गया है। वार्डेन को सस्पेंड कर दिया गया है। बाल सुधार गृह के अधीक्षक के खिलाफ शासन को लिखा जाएगा। डीपीओ को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई है।''
-विशाल सिंह, प्रभारी डीएम

''पर्याप्त सुरक्षा नहीं होने के कारण ऐसा हुआ है। पुलिस की ड्यूटी बाल सुधार गृह में नहीं रहती। होमगार्ड से काम चलाना पड़ता है।''
- नेमचंद, बंदी गृह अधीक्षक, बुलंदशहर

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed