मेरठ: नरसंहार के पीछे प्रॉपर्टी या प्रेम?
गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले रविवार रात हुए नरसंहार से शहर सिहर उठा। महिला, उसके चार बच्चों और एक युवक को धारदार हथियार से काट डाला गया। चारों बच्चों के शव सुहैल गार्डन स्थित खाली प्लॉट के बीच अधबने मकान में मिले, जबकि महिला और युवक का शव बिजली बंबा बाईपास पर जुर्रानपुर गुर्जर चौक के पास पड़े मिले। सभी की गर्दन धारदार हथियार से काटी गई। मारने से पहले सभी को बेहोश करने वाला नशीला पदार्थ भी सुंघाया गया।
सोमवार सुबह इस नृशंस हत्याकांड की खबर लोगों को हुई तो सनसनी फैल गई। मरने वाली महिला की शिनाख्त खतौली के पूर्व चेयरमैन की पुत्रवधू के रूप में हुई। युवक तथाकथित प्रेमी बताया जा रहा है। महिला का पति करीब डेढ़ साल से मुजफ्फरनगर जेल में बंद है। वारदात के पीछे करोड़ों की संपत्ति का विवाद बताया गया। शक के आधार पर जेठ को नामजद किया गया है।
वहीं मरने वाले युवक से महिला के संबंधों को लेकर भी इस हत्याकांड को अंजाम देने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस को सुबह में हुई जानकारी
पुलिस के अनुसार मूल रूप से कस्बा खतौली के भूड़ इस्लामाबाद निवासी शराफत अली के बेटे नवेद उर्फ राजू ने 18 साल पहले पड़ोसी हनीफ की बेटी रुखसाना से निकाह किया था। शराफत अली खतौली नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। तीन साल पहले शराफत की मौत के बाद से संपत्ति को लेकर नवेद और उसके बड़े भाई साकिब उर्फ बांके में विवाद चल रहा था। जानलेवा हमले और डकैती के मामले में नवेद ढाई साल से जेल में है।
रुखसाना अपनी तीन बेटियों रिमसा (17), चांदनी (8) खुशी (5) और बेटे सुहैब (10) के साथ करीब पांच माह से लिसाड़ीगेट इलाके के दिलशाद गार्डन में किराए पर रह रही थी। तीन दिन पहले ही सुहैल गार्डन में एक सा छोटा कमरा किराए पर लिया था। रविवार देर रात रुखसाना और उसके चारों बच्चों की नृशंस हत्या कर दी गई। चारों बच्चों के शव कमरे में जबकि महिला और एक युवक का शव यहां से पांच किमी दूर मिले।
युवक की पहचान बाइक मिस्त्री शाद (26) पुत्र अनीस निवासी शाहजहांपुर, किठौर के रूप में हुई। शाद 60 फुटा रोड समर गार्डन पर दुकान करता था। शाद रुखसाना से अक्सर मिलने आता था। पुलिस को सोमवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे नरसंहार की जानकारी हुई।
आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश
आईजी आलोक शर्मा, डीआईजी रमित शर्मा, डीएम पंकज यादव, एसएसपी ओंकार सिंह समेत तमाम पुलिस और प्रशासन अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सभी की पहचान शाम करीब 6 बजे रुखसाना के मायके वालों ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर की।
एसएसपी ओंकार सिंह ने शाम को प्रेसवार्ता कर खुलासा किया कि नरसंहार पूर्व चेयरमैन की संपत्ति को लेकर हुआ है। नवेद के भाई साकिब समेत अज्ञात बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस की छह टीम गठित कर आरोपियों की तलाश में खतौली और मुजफ्फरनगर में दबिश दी गई है।
साकिब को नामजद किया गया है। पुलिस 10 करोड़ की प्रापर्टी का विवाद मान रही है। जबकि लोगों का कहना है कि मामला अवैध संबंधों का है। बच्चों से पांच किमी दूर रुखसाना और शाद का शव मिलने से पुलिस दूसरे बिंदुओं पर भी जांच कर रही है। हालांकि महिला के भाई सलमान उर्फ सोनू ने रुखसाना के जेठ साकिब पर हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस ने मंगलवार रात तक करीब दो दर्जन लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।
नरसंहार के पीछे प्रॉपर्टी या प्रेम
मौका-ए-वारदात को देखकर साफ है कि इस सामूहिक हत्याकांड को बेहद शातिर दिमाग ने अंजाम दिया। सभी आशंकाओं को टटोलने के बाद पुलिस मंगलवार देर रात तक केवल दो बिंदुओं प्रॉपर्टी या प्रेम पर आकर रुक गई। पुलिस इस रहस्य को भी समझने में लगी है कि इस केस में महिला और युवक का शव करीब पांच किमी दूर फेंकने का रहस्य क्या है।
सोमवार जब पुलिस लाइन में गणतंत्र दिवस की परेड चल रही थी, तभी पुलिस अफसरों को सूचना मिली कि लिसाड़ीगेट स्थित सुहैल गॉर्डन के एक अधबने कमरे में एक महिला और तीन बच्चों के शव पड़े हैं, जिन्हें कुत्ते नोंच रहे हैं। इस पर तमाम अधिकारी मौका-ए-वारदात पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान ये चारों शव एक किशोरी और तीन बच्चों के निकले। पुलिस अफसर और फोरेंसिक टीम अभी कमरे का निरीक्षण कर रही थी कि तभी सूचना मिली कि बिजली बंबा बाईपास पर भी जुर्रानपुर रेलवे फाटक के पास जंगल में एक महिला और पुरुष के शव पड़े हैं। यह इलाका परतापुर थाना क्षेत्र में आता था। मिलान हुआ तो सभी शव आपस में कनेक्ट हो गए।
मंगलवार रात तक पुलिस अफसर इस केस को प्रॉपर्टी विवाद, अवैध संबंध, प्रेम संबंध, लूटपाट आदि आशंकाओं की कसौटी पर कस रहे थे। देर रात जांच केवल प्रॉपर्टी विवाद या प्रेम प्रसंग पर आकर रुक गई। पुलिस अफसरों के अनुसार बेहद शातिर तरीके से सभी को मारा गया। इसके लिए नशीला पदार्थ और मारने के लिए आटोमैटिक चाकू खरीदा गया। इस तथ्य पर अफसरों में मशविरा हुआ कि क्या सभी को एक ही कमरे में मारा गया या फिर बच्चों को कमरे में और दोनों को जंगल में ले जाकर मारा गया।
बाद में यह तथ्य सामने आया कि संभव है कि शातिर दिमाग ने यह प्लानिंग की हो कि बच्चों के शवों को कमरे में छोड़कर रुखसाना और शाद के शवों को ऐसी जगह ठिकाने लगा दिया जाए कि वो मिलें हीं न। ताकि रुखसाना पर आरोप लग जाए कि बच्चों को मारकर वह प्रेमी के साथ चली गई। कातिल जब शव ठिकाने लगाने जा रहे हों तो किसी वजह से शव जंगल में ही छोड़कर भाग गए हों। हालांकि रुखसाना के साथ मिले शाद के शव को लेकर यह भी आशंका बनी कि कहीं कातिलों को शाद से भी तो अलग से कोई रंजिश नहीं थी, क्योंकि यदि साकिब द्वारा यह कत्ल कराए गए तो उसे शाद से क्या लेना-देना।
आईजी जोन आलोक शर्मा ने बताया कि इस सामूहिक हत्याकांड के पीछे प्रॉपर्टी या प्रेम ही नजर आ रहा है। नवेद के बड़े भाई साकिब से चल रहा प्रॉपर्टी विवाद और प्रेम संबंधों को लेकर शक, दोनों संभावनाएं 50-50 हैं। किसी नजदीकी शख्स ने हत्याकांड को अंजाम दिया है, जिसे उसके बच्चे भी जानते थे। इस हत्याकांड की सबसे खास यह है कि सभी कत्ल जुनून में किए गए हैं। लेकिन तरीका एक जैसा है।
एक ही हथियार से काटी गईं छह गर्दन
रुखसाना, शाद और चारों बच्चों की गर्दन धारदार हथियार से काटी गई। एक ही अंदाज में वारदात को अंजाम दिया गया। आशंका है कि सभी छह लोगों का गला काटने में एक ही हथियार इस्तेमाल किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई है।
दरिंदों ने पहले तो रुखसाना और मोहम्मद शाद की हत्या की। इन दोनों की गर्दन धारदार हथियार से काटने के साथ ही शरीर को गोदा भी गया। वहीं, सुहेल गार्डन स्थित मकान के कमरे में मिले चारों बच्चों की भी गर्दन काटी गई। डॉक्टरों के मुताबिक रुखसाना और शाद के शरीर पर धारदार हथियार से गोदने के निशान के साथ ही आंत भी बाहर निकली हुई थी। इससे स्पष्ट है कि गर्दन काटने पर भी हत्यारों ने इन दोनों के पेट फाड़े और जब इन दोनों के मरने का भरोसा हो गया, तब वहां से गए। वहीं, जिस तरह से चारों बच्चों की गर्दन काटी गई, उसमें भी एक जैसे ही हथियार का इस्तेमाल होना सामने आया है।
शव नष्ट करना चाहते थे हत्यारे
चारों बच्चों की हत्या कमरे में, जबकि रुखसाना और शाद को जुर्रानपुर रेलवे फाटक के पास मारा गया। आशंका है कि शाद और रुखसाना को वहां मारने के पीछे हत्यारों का मकसद इनके शव नष्ट करना था। ताकि रातभर शव वहां पड़े रहते और जंगली जानवरों का निवाला बनने पर पहचान नहीं हो पाती। सोमवार सुबह यदि ग्रामीणों को इन दोनों के शव दिखाई नहीं देते, तो शायद हत्यारे अपने मकसद में कामयाब भी हो जाते।
किडनी, लीवर तक डैमेज किए
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किशोरी और बच्चों के पेट में महज 100 ग्राम खाना जबकि रुखसाना और शाद के पेट में करीब 250 ग्राम अधपचा खाना मिला। एक्सपर्ट की मानें तो सभी ने रविवार रात 8 से 8:30 बजे के बीच खाना खाया। जबकि रात करीब 9 से 10 बजे के बीच हत्याएं हुईं।
तीनों बच्चों के केवल गले काटे गए जबकि रिमसा, रुखसाना और शाद के शरीर पर अलग से धारदार हथियार के 10 से 12 जख्म पाए गए। इनकी किडनी और लीवर तक डैमेज पाए गए। मारने से पहले सभी को कोई बेहोश करने वाला नशीला पदार्थ सुंघाया गया। सभी के शरीर से खून काफी बह चुका था। शरीर ज्यादा खून बहने और ठंड के चलते अकड़ चुके थे। सभी की गर्दन पर एक ही सीध में मांस काटने वाले या सर्जरी में काम आने वाले किसी तेज धार के चाकू या छुरी से वार किया गया। यह भी संभावना है कि इसमें किसी ऑटोमेटिक नाइफ प्रयोग में लाया गया। हालांकि रिमसा की उम्र को लेकर मतभेद रहा। कभी उसकी उम्र 15 तो कभी 17 और फिर 20 बताई गई। (तस्वीर में शाद)
कोठी और बैंक्वेट हॉल बने नरसंहार की वजह!
खतौली के पूर्व चेयरमैन शराफत अली की दयालपुरम स्थित करोड़ों की प्रॉपर्टी को लेकर दो भाइयों के बीच चल रहा विवाद मेरठ में हुए नरसंहार की वजह बन गया। करीब 15 साल पहले पूर्व चेयरमैन के छोटे बेटे नवेद उर्फ राजू का प्रेम विवाह विवाद की जड़ रहा, जिसके चलते एक भरा-पूरा परिवार दो गज जमीन के नीचे दफन कर दिया गया।
खतौली के पूर्व चेयरमैन शराफत अली ने तीन निकाह किए हुए थे। उनकी पहली पत्नी मुन्नी अपने बच्चों के साथ मोहल्ला सर्राफान में, दूसरी पत्नी महजबी दयालपुरम में और तीसरी पत्नी शमीना शराफत कॉलोनी में रहती है। पॉश कॉलोनी दयालपुरम में शराफत अली की करीब 1900 वर्ग गज में कोठी और बैंक्वेट हॉल है, जिसकी कीमत करोड़ों में है। शराफत अली की दूसरी पत्नी महजबी के छोटे बेटे नवेद उर्फ राजू ने खतौली के मोहल्ला देवीदास निवासी बाटो की बेटी रुखसाना के साथ वर्ष 2000 में प्रेम-प्रसंग के चलते निकाह कर लिया था।
इस निकाह को शराफत अली के साथ ही नवेद की मां महजबी व बड़े भाई शाकेब उर्फ बांके ने सहमति नहीं दी थी, जिसके चलते नवेद निकाह के बाद पत्नी रुखसाना के साथ मोहल्ला देवीदास में किराए के मकान में रहने लगा था। शादी के कुछ समय बाद नवेद उर्फ राजू ने दयालपुरम स्थित संपत्ति पर दावा किया, जिसका शाकेब उर्फ बांके ने विरोध किया। इसे लेकर दोनों भाइयों के बीच विवाद रहने लगा। वर्ष 2009 में पूर्व चेयरमैन शराफत अली के इंतकाल के बाद दोनों भाइयों में विवाद गहरा गया।
वर्ष 2011 में शाकेब उर्फ बांके ने अपने ही भाई नवेद उर्फ राजू के खिलाफ खतौली कोतवाली में हत्या के प्रयास के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिस पर पुलिस ने नवेद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तभी से नवेद जेल में ही है। शौहर के जेल जाने के बाद जान का खतरा भांपते हुए करीब डेढ़ साल पहले रुखसाना अपने चारों बच्चों के साथ मेरठ जाकर रहने लगी थी, जहां उसे चारों बच्चों के साथ बेरहमी से कत्ल कर दिया गया।
कमरा बयां कर रहा था कातिलों की बर्बरता
उस 10 बाय 10 के कमरे का मंजर ऐसा भयावह था कि देखने वालों की रूह तक कांप उठी। दीवारों पर खून के छींटे, कपड़ों से टपकता खून और खून से सनी चारपाई देखकर ही हत्यारों की बर्बरता का अंदाजा लगाया जा सकता था। मासूमों ने अपनी बचाने के लिए हाथ बढ़ाए तो हाथ पर वार कर दिया। चेहरा छिपाया तो कान पर ही हथियार चला दिया।
अंत में गर्दन पर हमला कर सांस नली को काट दिया। सभी को मारने का तरीका एक था और हथियार भी एक ही लग रहा था। अंदर के हालात देखकर एक बारगी तो पुलिस भी बाहर आ गई। दोबारा हिम्मत जुटाकर अंदर पहुंची और बच्चों के शवों को कपड़ों से ढंका।
छोटे से कमरे के एक कोने में उपले पड़े थे और दूसरे कोने में जमीन पर ही बिस्तर लगा था। इसी बिस्तर पर बच्चों के एक के ऊपर एक शव पड़े थे। बिस्तर ही नहीं जमीन भी खून से लाल थी।
शाकेब की तलाश में मेरठ पुलिस ने डेरा डाला
नवेद की पत्नी और उसके चार बच्चों की हत्या के मामले में मेरठ पुलिस ने नवेद के भाई शाकेब अली बांके की गिरफ्तारी को लेकर दिनभर नगर में डेरा डाले रखा।
मृतका के परिजनों द्वारा शाकेब अली पर नरसंहार का आरोप लगने के बाद मेरठ पुलिस ने सोमवार रात्रि नगर में कई स्थानों पर ताबड़तोड़ दबिश डाल कर गिरफ्तारी का प्रयास किया, मगर पुलिस को कामयाबी नहीं मिल सकी। मंगलवार दिनभर मेरठ कोतवाली के सीओ रूपेश सिंह पुलिस फोर्स के साथ नगर में डेरा डाले रहे। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के प्रयास में रही। उधर, एसएसपी मुजफ्फरनगर के निर्देश के बाद क्राइम ब्रांच टीम भी नगर में दिनभर घूमती रही।
अंतिम संस्कार के लिए चंदा एकत्र किया
मुहल्ले के लोगों ने चंदा एकत्र कर मृतकों का अंतिम संस्कार किया। भूड़ के लोगों ने बताया कि मृतका के दो भाई मजदूरी कर किसी प्रकार अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। परिजनों की ऐसी स्थिति नहीं है कि वे पांच शवों का अंतिम संस्कार का खर्च उठा सके। इसलिए मुहल्ले में चंदा एकत्र कर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
शवों के पहुंचते ही मचा कोहराम
मोहल्ला दयालपुरम निवासी नवेद उर्फ राजू की पत्नी और बच्चों के शव देख कर हर कोई सकते में आ गया। उन्हें जिस बेरहमी से मारा गया था, यह जिसने भी सुना वह सिहर गया। पूरे मोहल्ले में कोहराम मच गया।
मृतका रुखसाना के परिजन खतौली भूड़ स्थित रजवाहे की पटरी के निकट रहते हैं। नवेद की पत्नी तथा उसके बच्चों की हत्या किए जाने की खबर मिलने पर परिजन मेरठ पहुंच गए थे। मंगलवार शाम पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने रुखसाना, उसके पुत्र सुहेल तथा पुत्रियां रिमशा, चांदनी, खुशी के शव परिजनों को सौंप दिए। शाम को मृतकों के शव जब भूड़ स्थित रुखसाना के घर पर पहुंचे तो उन्हें देख कर हर कोई फफक उठा। महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था।
पत्नी-बच्चों के शव देख कर नवेद ने आपा खोया
नवेद उर्फ राजू को पुलिस कोर्ट के आदेश पर पेरोल पर लेकर आई। पत्नी और बच्चों के शवों को देख कर राजू आपा खो बैठा। पुलिस तथा लोगों ने उसे समझा कर शांत किया। नवेद का कहना था कि इस हत्या के पीछे उसे किसी प्रकार की कोई जानकारी नहीं है। बस इतना है कि किसी ने मेरे वफादारों को मुझसे दूर कर दिया। करीब तीन माह पहले पत्नी और बच्चे जेल में मिलने के लिए आए थे।
उन्होंने बताया था कि मेरठ मुहल्ले में ही उनका झगड़ा हो गया तथा उनके साथ मारपीट गई थी। राजू के वकील कैलाश ने पत्नी और बच्चों के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कोर्ट से नवेद उर्फ राजू का पेरोल लिया। कोर्ट ने शाम 6 से रात्रि 9 बजे तक तीन घंटे का पेरोल दिया। जिस पर पुलिस राजू को लेकर यहां पहुंची थी। शवों को गमगीन माहौल में दफना दिया। इसके बाद पुलिस राजू को लेकर जिला कारागार चली गई थी।
भूड़ क्षेत्र में रह रहे मृतका के भाई सोनी और गय्यूर
ने शाकेब पर उनकी बहन तथा उसके बच्चों की हत्या कराए जाने का आरोप लगाया।
सोनी का कहना था कि शादी के बाद से शाकेब तथा उसकी मां महजबी ने इनको
अपनाया नहीं। कई बार उनकी बहन बच्चों को लेकर दयालपुर स्थित कोठी पर गई,
मगर उसे बाहर से ही भगा दिया। नवेद तथा शाकेब के बीच काफी समय से संपत्ति
के बंटवारे का भी मामला चल रहा था। वह नवेद के हिस्से की संपत्ति पर काबिज
हैं।
'खुदा ही मेरा बदला लेगा'
परिजनों की हत्या के बाद
उसके अंतिम संस्कार में शामिल के लिए जिला कारागार से पैरोल पर लाए गए नवेद
उर्फ राजू से इस जघन्य हत्याकांड के बारे में पूछा गया तो वह काफी देर
खामोश रहा। बाद में वह बच्चों के शवों को देख कर बिलख पड़ा। इस दौरान उसने
कहा कि मुझे नहीं पता ये सब किसने किया। जब उसके भाई के बारे में पूछा गया
तो तब भी उसने कहा-मैं कुछ नहीं कह सकता, मगर जिसने भी यह किया उससे मेरा
बदला खुदा ही लेगा। बच्चों और पत्नी की हत्या के बाद मैं जहां में तन्हा
रहा गया। शवों के दफनाने के बाद पुलिस नवेद को अपनी सुरक्षा में वापस जिला
कारागार ले गई।
कड़ी सुरक्षा के बीच दफनाए गए शव
खतौली।
मंगलवार रात्रि साढ़े आठ बजे नवेद की पत्नी रुखसाना, उसके पुत्र सुहेल तथा
पुत्रियां रिमशा, चांदनी, खुशी के शवों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच
जानसठ रोड स्थित कब्रिस्तान में दफनाए गए। इससे पहले मेरठ से शवों को
रुखसाना के भाइयों सोनी, गयूर के मकान पर इस्लामाबाद भूड़ पर लाया गया था।
दोनों भाइयों का रहा अपराधिक इतिहास
भाई की हत्या के प्रयास में जेल में बंद पूर्व चेयरमैन शराफत अली के बेटे नवेद उर्फ राजू का भी आपराधिक इतिहास है। उसके खिलाफ खतौली कोतवाली में आठ मुकदमे दर्ज हैं।
पूर्व चेयरमैन खतौली शराफत अली की दूसरी पत्नी महजबीं के दोनों बेटों शाकेब उर्फ बांके और नवेद उर्फ राजू का अपराधों से पुराना नाता रहा है। नवेद उर्फ राजू को सबसे पहले वर्ष 2001 में पुलिस ने जुआ खेलते हुए गिरफ्तार किया था। इसके बाद वर्ष 2003 में उसके खिलाफ अलग-अलग लोगों ने घर में घुसकर मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के तीन मुकदमे दर्ज कराए।
अपराधिक मामलों के चलते पुलिस ने 2003 में ही नवेद को गुंडा एक्ट में भी निरुद्ध किया था। इसके बाद वर्ष 2005 में भी नवेद के खिलाफ मारपीट और धमकी देने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। वर्ष 2011 में बडे़ भाई शाकेब उर्फ बांके ने नवेद के खिलाफ हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने उसे तमंचे के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
वहीं, शाकेब उर्फ बांके के खिलाफ वर्ष 2002 में मोहल्ला देवीदास की तत्कालीन महिला सभासद ने छेड़खानी और गाली-गलौज के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद वर्ष 2003 में शाकेब के खिलाफ मारपीट और गुंडा एक्ट के कई मुकदमे दर्ज हुए। इसके अलावा शाकेब उर्फ बांके के खिलाफ वर्ष 2007 में अवैध कब्जा व तोड़फोड़ और वर्ष 2014 में एमडीए अधिकारी से अभद्रता के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया। इंस्पेक्टर कोतवाली ने भी कुछ दिन पहले ही शाकेब के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।