सीतलवाड़ को मिली बांबे हाइकोर्ट से अंतरिम राहत
अवैध रूप से विदेशी चंदा लेने के मामले में बांबे हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ तथा उनके पति जावेद आनंद को 17 दिनों की अंतरिम राहत दे दी है। उनकी अग्रिम जमानत की याचिका पर 10 अगस्त को अंतिम सुनवाई होगी।
तब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकेगा। इसके पहले शुक्रवार को ही सीबीआई की एक विशेष अदालत ने सीतलवाड़ तथा उनके पति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय की शरण ली।
बांबे हाईकोर्ट की जस्टिस मृदुला भटकर ने सीतलवाड़ के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि आरोपियों के फरार होने की आशंका नहीं है तो उन्हें दो हफ्ते ही अंतरिम राहत दी जा सकती है।
मैं निर्णय से हूं असंतुष्ट
अदालत के आदेशानुसार सीतलवाड़ और उनके पति को अपना बयान दर्ज कराने के लिए 27 और 30 जुलाई तथा तीन और छह अगस्त को दोपहर 12 से तीन बजे तक सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा के कार्यालय में उपस्थित होना पड़ेगा।
अदालत ने आरोपियों को हर दिन कार्यालय आने के लिए निर्देश देने की सीबीआई की मांग को खारिज कर दिया। इससे पूर्व सीबीआई की अदालत के न्यायाधीश अनीस खान ने सीतलवाड़ और उनके पति का अग्रिम जमानत का आवेदन नामंजूर कर दिया।
कोर्ट ने उन्हें प्रदान की गई अंतरिम राहत को भी आगे नहीं बढ़ाया। सीतलवाड़ ने अदालत के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा कि मैं इस निर्णय से स्तब्ध और असंतुष्ट हूं। यह बहुत ही छोटा अपराध है।
विदेशी चंदे के लिए लेनी होगी पूर्व अनुमति
मेरे समर्थकों को लगता है कि यह (सरकार द्वारा) हमें शक्तियों से डराने और संभवतः मिटाने का प्रयास है।सीतलवाड़ पर आरोप है कि उनकी कंपनी सबरंग कम्युनिकेशन एंड पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड ने फॉरेन कांट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) का उल्लंघन करते हुए करीब 1.8 करोड़ रुपये विदेशी चंदा प्राप्त किया था
एफसीआरए नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आने पर गृह मंत्रालय ने तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ सिटीजन्स फार जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) को पूर्व अनुमति वर्ग में रख दिया है।
एक अधिकारी के अनुसार अब एनजीओ को विदेशी चंदा लेने या उपयोग करने से पहले मंत्रालय की विदेश शाखा से अनुमति लेनी होगी। गृह मंत्रालय ने सीजेपी और सबरंग ट्रस्ट को अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी के मामले में करीब दो महीने पहले नोटिस जारी किया था।
मंत्रालय का दावा है कि सीजेपी आर्थिक तथा शैक्षणिक कामों के लिए पंजीकृत है, जबकि संस्था ने कानूनी सहायता के लिए विदेशी चंदा प्राप्त किया। यह एनजीओ गुजरात दंगा पीड़ितों के केस लड़ता रहा है।
गुलबर्ग सोसाइटी मेमोरियल के रुपयों का नहीं किया गया इस्तेमाल
तीस्ता सीतलवाड़ ने गुजरात पुलिस के उन आरोपों से इनकार किया है, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने और उनके पति ने गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी के पीड़ितों के लिए मिले धन का दुरुपयोग किया है।
सीतलवाड़ ने एक बयान जारी कर कहा कि सबरंग ट्रस्ट के माध्यम से गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार स्थल पर मेमोरियल बनाने के लिए महज 4.6 लाख रुपये ही जुटाए जा सके थे।
सोसाइटी को बता दिया गया है कि ऐसे में मेमोरियल बनाना संभव नहीं है। इन रुपयों का अब तक उपयोग नहीं किया गया है।