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दूसरे ग्रह का प्राणी है या कोई इंसान?
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 25 Apr 2013 10:30 AM IST
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डॉक्युमेंट्री फिल्म 'सीरियस' का अमेरिका ही नहीं, पूरी दुनिया बेसब्री से इंतजार कर रही थी।
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क्योंकि ऐसा दावा किया जा रहा था एलियन को खोज लिया गया है और इस फिल्म में उसके बारे में बताया जाएगा।
लेकिन जब डॉक्युमेंट्री दिखाई गई तो यह दावा खोखला साबित होता दिखा।
यह डॉक्युमेंट्री फिल्म 'सीरियस' अटाकामा मरूभूमि में दस साल पहले ममी के रूप में मिले 6 इंच के उस जीव पर केंद्रित है जिसे 'एटा' नाम दिया गया है और जो एलियन की तरह दिखता है।
पब्लिसिटी के दौरान फिल्ममेकर्स ने यह दावा किया था कि इस एलियन के जैसे सिर वाले जीव को फिलहाल धरती पर पाए जाने वाले जीवों में से किसी के अंतर्गत वर्गीक्रत नहीं किया जा सकता है।
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लेकिन हॉलीवुड में किए गए इस फिल्म की प्रीमियर में यह दिखाया गया कि एक वैज्ञानिक ने यह निष्कर्ष निकाला है कि यह नन्हा जीव दरअसल इंसान ही था।
फिल्म में कैलिफोर्निया की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ मेडिसीन के स्टेम सेल बायलोजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर गैरी नोलन का कहना है, 'मैं यह पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि यह बंदर भी नहीं है। यह चिंपाजियों से ज्यादा इंसान के जैसा है। यह छह से आठ साल तक जिंदा रहा। यह सांस ले रहा था, खा रहा था और उसे पचा रहा था। यह सवाल हो सकता है कि जब इसने जन्म लिया था तो यह कितना बड़ा था?'
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उस छोटे जीव पर डीएनए टेस्ट करने वाले नोलन ने आगे कहा, 'डीएनए पूरी कहानी कहती है। इस तकनीक से यह निश्चित हो जाता है कि यह छोटा जीव इंसान है।'
इस फिल्म में अमेरिका के उस आंदोलन के बारे में भी बताया गया है जो यह जानने के लिए चल रही है कि अमेरिकी सरकार आखिर यूएफओ और दूसरे ग्रहों के जीवों के बारे में क्या जानती है और वह कौन सी एडवांस्ड अलटर्नेटिव एनर्जी टेक्नोलॉजी है जिससे धरती को फायदा हो सकता है?
इस डॉक्युमेंट्री को बनाने के पीछे असली ताकत हैं- स्टीवन ग्रीयर जो पहले इमर्जेंसी रूम डॉक्टर थे और अब सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलीजेंस (CSETI) और द डिस्क्लोजर प्रोजेक्ट के फाउंडर हैं। ग्रीयर खुद इस डॉक्युमेंट्री के बारे में शुरू से बता रहे थे कि यह किसी दूसरे ग्रह का प्राणी है। इस डॉक्युमेंट्री की पब्लिसिटी से ऐसा लग रहा था जैसे किसी एलियन को खोज लिया गया है।
लेकिन अब फिल्म सबके सामने है और इसका डीएनए विश्लेषण यह बताता है कि एटा एक इंसान था। तो क्या इसके बारे में की जा रही पब्लिसिटी जल्दबाजी में निकाले गए निष्कर्ष का परिणाम था?
डीएनए टेस्ट के द्वारा एटा के इंसान होने की बात साबित करने वाले गैरी नोलन का कहना है 'मेरी रूचि इसमें थी कि मैं इस बात को साबित करूं कि इस जीव में कुछ भी पारानॉर्मल जैसी चीज नहीं है। यह इंसान है जो विचित्र म्यूटेशन की वजह से बना है। इसके माइटोकोंड्रिया के सिक्वेंस से यह स्पष्ट पता चला है कि इसकी मां चिली के क्षेत्र में रहने वाली आदिवासी औरत थी। विश्लेषण से यह भी पता चला कि यह पुरुष था और अनुमानतः यह पिछली शताब्दी में मरा था।'
लेकिन नोलन का यह भी कहना है कि पहले उन्होंने सोचा कि यह एलिएन है या नहीं, इसका उत्तर डीएनए दे सकता है लेकिन जल्दी ही उनको महसूस हुआ कि एटा के बारे में और कई जैविक प्रश्न हैं जिसको समझने और उसके उत्तर तलाशने की आवश्यकता है। वह फिलहाल इसके और ज्यादा विश्लेषण करने में लगे हैं और इस पर आलेख लिखने की तैयारी में हैं।
'सीरियस' प्रोजेक्ट नन्हे जीव के एलियन होने का दावे पर तो बिल्कुल खरी नहीं उतरी लेकिन इससे पब्लिक को भरोसेमंद खोजकर्ताओं से यूएफओ विषय के बारे में जानने का मौका मिला।