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बड़े काम की चीज है सिमरन, रेलवे के आए 'अच्छे दिन'

Wed, 09 Jul 2014 01:18 PM IST
संतोष सिंह/अमर उजाला, कानपुर
संतोष सिंह/अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 09 Jul 2014 01:18 PM IST
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simran technology for rail

आईआईटी कानपुर के इमेजिंग फार रेल नेवीगेशन सिस्टम (सिमरन) तकनीक से रेलवे का सूचना तंत्र और मजबूत होगा। 2014-15 के रेल बजट में इस तकनीक को शामिल कर लिया गया है।

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साथ ही 129 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान करके ट्रेन के अंदर, बाहर के सूचना तंत्र को इस हाईटेक सिस्टम से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी गई है। केंद्र सरकार के इस कदम से आईआईटी के विज्ञानी उत्साहित हैं।
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उनका कहना है कि रेलवे ने अपने अच्छे दिन की शुरूआत कर दी है। तकनीक की मदद से यात्रियों को बेहतर सुविधा मुहैया कराई जा सकती है।

पांच साल की मेहनत से पूरा हुआ प्रोजेक्ट सिमरन

simran technology for rail

टेक्नोलॉजी मिशन फॉर रेलवे सेफ्टी (टीएमआरएस) का रिसर्च प्रोजेक्ट आईआईटी, कानपुर को वर्ष 2004-05 में मिला था। पांच साल की कड़ी मेहनत के बाद विज्ञानियों ने 12 रिसर्च प्रोजेक्ट का काम पूरा कर लिया, इसी में एक प्रोजेक्ट सिमरन था, जो कि रेलवे के सूचना तंत्र को हाईटेक बनाएगा।

राजधानी, शताब्दी, एक्सप्रेस सहित 36 ट्रेनों में इसका सफल परीक्षण पहले ही किया जा चुका है। सारे रिजल्ट अच्छे आए हैं। अब तकनीक को बजट में शामिल करके रेलवे को हाईटेक बनाने की पहल कर दी गई है।

इसके प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर पूर्व निदेशक प्रो. संजय गोविंद धांडे और सह प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर एवं मुख्य इंजीनियर बीएम शुक्ला ने बताया कि यह तकनीक बहु उपयोगी है। इसकी मदद से चार तरह की सेवाएं ली जा सकती हैं।

रेल बजट के प्रावधानों पर वेबसाइट

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रेल बजट में जितने बजट का प्रावधान किया गया है, उससे एक वेबसाइट विकसित की जाएगी। इस पर देश की 10 हजार ट्रेनों, जिसमें  शताब्दी, राजधानी, पैसेंजर, मेमू, मेट्रो सहित समस्त एक्सप्रेस ट्रेन, मालगाड़ी का ब्योरा उपलब्ध कराया जाएगा। इसके सर्वर को सिमरन से जोड़कर हर ट्रेन के पल-पल के लोकेशन की जानकारी दी जाएगी।

ट्रेन के आरक्षण, आवागमन की सटीक जानकारी मिले, इसके लिए कुछ मोबाइल नंबर जारी किए जाएंगे। इन पर एसएमएस भेजकर तत्काल जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। वायरलेस कोच डिस्प्ले सिस्टम सबसे आकर्षक सेवा होगी। यह सिस्टम ट्रेन के हर कोच में अंदर और बाहर की ओर से लगाई जाएगी। अंदर के डिस्प्ले सिस्टम पर ट्रेन की स्पीड, ट्रेन की लोकेशन, अगले स्टेशन और वर्तमान स्टेशन, ट्रेन लेट होने सहित तमाम सूचनाएं प्रदर्शित होंगी। यह सुविधा अभी तक नहीं मिल रही है।

इससे वीआईपी ट्रेन के एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों को काफी दिक्कत होती है। रात के वक्त उन्हें आने वाले स्टेशन की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती है। नई तकनीकी से यह जानकारी आसानी से हासिल की जा सकेगी।

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सिमरन की और भी खासियत

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सिमरन डिवाइस रेलवे के लिए बड़े काम की चीज है। इसकी मदद से ट्रेन इंजन के 125 पैरामीटर (हीट, तापमान, ब्रेक प्रेशर सहित अन्य) में आने वाली तकनीकी खराबी की सटीक जानकारी हासिल की जा सकती है। इसका डाटा एकत्रित करके लोकोशेड को भेजा जा सकता है, ताकि अगले प्लेटफार्म तक इंजन की तकनीकी खराबी दूर कर ली जाए। एक डिवाइस बनाने में करीब 85 हजार रुपये खर्च होंगे।

गैंगमैन की जान बचेगी
यह डिवाइस बहु उपयोगी है। इसकी मदद से मोबाइल के साइज का एक इलेक्ट्रानिक पट्टा तैयार किया गया है, जिसे गैंगमैन के कमर या हाथ में पहनाया जाएगा। इसे सिग्नल सिस्टम से जोड़कर गैंगमैन के साथ होने वाली दुर्घटना को बचाने की कोशिश होगी। यह सिस्टम दो किलोमीटर दूर से आने वाली ट्रेन की लोकेशन बता देगी। घंटी बजाकर अलर्ट कर देगी कि ट्रैक से दूर हो जाएं, तेज गति से ट्रेन आ रही है। बेहतर तकनीक न होने के कारण ही हर साल 300-400 गैंगमैन रेल की चपेट में आ जाते हैं।

12 रिसर्च प्रोजेक्ट डंप पड़े

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टीएमआरएस का रिसर्च प्रोजेक्ट आईआईटी कानपुर को मिला था। इसमें 14 प्रोजेक्ट शामिल किए गए थे। सिमरन सहित 12 प्रोजेक्ट के रिसर्च पूरी तरह से सफल रहे हैं। फाग विजन सहित 2 रिसर्च प्रोजेक्ट अधूरे रह गए थे। 110 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से 2 तकनीक (सिमरन, इनवायरमेंटल फ्रेंडली टॉयलेट) के इस्तेमाल पर अभी सहमति बनी है। 12 प्रोजेक्ट अब भी डंप पड़े हैं।  

ये हैं महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट
ट्रैक साइड बोगी मानीटरिंग सिस्टम, रेल फिलो डिटेक्शन इंस्ट्रूमेंट, सेंसर्स फार डिटेक्टिंग हाट बाक्सेस एंड हाट गिल्स (पहिया),  डिरेलमेंट डिटेक्सन डिवाइसेस, लो कास्ट आफ ट्रेन, सिगनल्स एंड कम्युनिकेशन, ट्रैक्शन एंड रोलिंग स्टॉक, मेजरिंग व्हील टेक्नोलॉजी, गैंगमैन के लिए वायरलेस कोड डिस्प्ले (वीसीडी), आन बोर्ड डायग्नोस्टिक (ओबीडी), सेफ ट्रेन मूवमेंट और अनमैंड रेलवे क्रासिंग सायरन।

रेलवे बोर्ड है रोड़ा
सिमरन तकनीक के इस्तेमाल की घोषणा पिछले रेल बजट में की गई थी। 119 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित किया गया था लेकिन रेलवे बोर्ड ने तकनीक इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी। इसको लेकर आईआईटी के विज्ञानियों ने नाराजगी जताई है। कहा है कि सेंट्रल गवर्नमेंट को रेलवे बोर्ड के पदाधिकारियों के बीच की वर्चस्व की लड़ाई को खत्म करना चाहिए, तभी स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिल सकेगा। रेलवे बोर्ड के ज्यादातर पदाधिकारी विदेशी तकनीक पर जोर देते हैं, जिसमें कि कमीशन मिलता है। यही वजह है कि सिमरन तकनीक का अभी तक इस्तेमाल नहीं हो सका।

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