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...तो एक जैसे ही हैं योग और नमाज, जान लीजिए कैसे?

Wed, 10 Jun 2015 02:54 AM IST
Updated Wed, 10 Jun 2015 02:54 AM IST
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similarity between yoga and namaz

21 जून से पहले ही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तपिश बढ़ती जा रही है। हर तरफ बहस हो रही है योग क्या है..? इसके अलग-अलग धार्मिक मायने क्या हैं..? मन में सवाल उठता है कि अष्टांग योग की परिकल्पना क्या है..?

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हिंदू धर्म में अष्टांग योग की परिकल्पना है। वहीं इस्लाम सहित दूसरे धर्मों में भी स्वास्थ्य, सफाई, त्याग और ब्रह्मचर्य की शिक्षा शिद्दत से शामिल है। परिभाषा अलग-अलग, लेकिन ध्येय एक है।
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योग के जानकार मानते हैं कि सीधे आसन की तीसरी विधा पर आना शारीरिक हानि पहुंचा सकता है इसलिए इसे स्टेप बाई स्टेप ही अपनाना ही बेहतर है। बड़े और सामूहिक आयोजन में योग को एक्सरसाइज तक ही सीमित रखा जाए तो बेहतर है ताकि इसकी स्वीकार्यता जन जन को लाभ पहुंचाए और इसका दायरा बड़ा हो।

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आखिर क्या है अष्टांग योग

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1- यम पांच हैं
(1) अंहिसा-शब्दों से विचारो से और कर्मों से किसी को हानि नहीं पहुंचाना।
(2) सत्य- विचारों में सत्यता, परम सत्य में स्थिर रहना।
(3) अस्तेय- चोर प्रवृत्ति का न होना।
(4) ब्रह्मचर्य- इंद्रिय जनित सुखों में संयम और चेतना को ब्रह्म ज्ञान में स्थिर रखना।
(5) अपरिग्रह- आवश्यकता से अधिक किसी वस्तु का संचय न करना।

2- नियम पांच हैं
(1) शौच- शरीर और मन की शुद्धि।
(2) संतोष- संतुष्ट और प्रसन्न रहना।
(3) तप- स्वयं से अनुशासित रहना।
(4) स्वाध्याय- आत्मचिंतन करना।
(5) ईश्वर का ध्यान।

3- आसन- योगासनों से शरीर पर नियंत्रण।
4- प्राणायाम- श्वांस लेने और छोड़ने संबंधी क्रिया द्वारा प्राण पर नियंत्रण।
5- प्रत्याहार- इंद्रियों को विषयों से हटाकर उन पर नियंत्रण करना।
6- धारणा- एकाग्रचित होकर मन को वश में करना।
7- ध्यान- केवल ध्येय पर कें द्रित हो जाना।
8- समाधि- आत्मा से जुड़ना यानि परम चैतन्य की अवस्था।

नमाज अता करने से भी होता है पूर्ण व्यायाम

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एएमयू जिम्नेजियम क्लब के कोच मजहर उल कमर कहते हैं कि वर्तमान में व्यस्त और भौतिक सुखों में उलझी जीवनशैली में व्यायाम कहीं गुम हो गया है। योग को संपूर्ण एक्सरसाइज कहा जाए तो बेहतर होगा। मसलन- योगासान और नमाज के दौरान होने वाली शारीरिक गतिविधि में भी फिजिकल फिटनेस शामिल है। अगर पूरा ध्यान दिया जाए सारी बात खुद ब खुद समझ आ जाती है। हां, अगर किसी को सीधे आसान लगवा दिया जाए तो कष्टकारी भी हो सकता है। इसलिए स्टेप बाई स्टेप ही आगे बढ़ने में फायदा है। नमाज अदा करने के दौरान होने वाली मूवमेंट शरीर को कुछ इस तरह से चुस्त दुरुस्त रखती है-

1- नियत बांधने का वैज्ञानिक फायदा-जब दायां हाथ बांये हाथ पर रखते हैं, दायीं हथेली के अंगुठे व तर्जनी से बांये हाथ की कलाई के छोर पर दबाव बना कर नाभि के पास उसे रखने से पूरा नर्वस सिस्टम रिलेक्स होता है। प्रेम को बढ़ावा मिलता है और ध्यान लगता है। ये एक्सरसाइज रीढ की हड्डी को रिलेक्स करता है। मसल्स कोआर्डिनेशन को संतुलित करता है।

2- रूकू अर्थात झुकना या अर्द्घशीर्षासन- यह स्थिति कमर की मांसपेशियों को मजबूत करती है। हैमिस्ट्रिंग व काफ मसल्स को मजबूत मिलती है और दर्द से राहत मिलती है। ये क्रिया घुटने के लुब्रिकेंट गूदे को मोबिलाइज कराती है।

3- खड़े होना दोबारा-इसमें नार्मल सांस ली जाती है यानि कि योगा की भाषा में क्रिया कहा जाता है। मस्तिष्क को आराम मिलता है।

4- सजदा पढ़ते वक्त आधा शीर्षासन। इसके जरिये दिमाग तेज होता है। ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है। आंख, नाक व कान की बीमारियों से बचाव, सिर में दर्द और चक्कर आने से राहत मिलती है। पाचन क्रिया दुरुस्त होने से जैसे शारीरिक फायदे।

5- बृजासान जैसी पोजीशन में बैठना- पाचन दुरुस्त करता है। आमतौर पर इसे खाना खाने के बाद किया जाता है, जिससे शरीर अम्लीय क्षार को सही तरीके से छोड़ता है। वायु और कब्ज के विकार को दूर करने में बेहद मददगार।

6- प्रथमा अंगुली को ऊपर उठाना-अंगुली उठाने से ब्लड प्रेशर संतुलित होता है। पूरे शरीर को बड़ी राहत मिलती है।

7- सलाम फेरना या गर्दन को बांयी से दांयी ओर घूमना- सरवाइकल के दर्द के लिये सबसे बेहतर एक्सरसाइज- गर्दन की मांसपेशियां मजबूत होती है तथा टिप्रीजियस मसल्स को मजबूत और सक्रिय करता है। जिससे कंधे की तमाम बीमारियों से मुक्ति मिलती है और उसकी मोबिलिटी को बढ़ाता है।

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