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तेलंगाना का साइड इफेक्ट, छोटे राज्यों की मांग हुई तेज

Thu, 01 Aug 2013 12:35 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 01 Aug 2013 12:35 AM IST
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side affect of telangana

आंध्र प्रदेश को विभाजित कर तेलंगाना गठन का रास्ता पूरी तरह से साफ भी नहीं हुआ कि देशभर में तेलंगाना का साइड इफेक्ट नजर आने लगा है।

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केंद्र और कांग्रेस के तेलंगाना के गठन को मंजूरी देने के बाद से कई और छोटे राज्यों की मांग जोर पकड़ने लगी है। हरित प्रदेश, विदर्भ और गोरखालैंड की मांग के साथ ही अब पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मिथिलांचल की मांग ने तेजी पकड़ ली है।

क्या सत्तापक्ष क्या विपक्ष सांसदों और विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर अपने अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए नए राज्यों की मांग करना शुरू कर दिया है।
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उधर, आंध्र प्रदेश कांग्रेस पार्टी में भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। तेलंगाना के गठन के ऐलान से नाराज पार्टी के विधायकों और सांसदों द्वारा इस्तीफा देने की शुरुआत हो चुकी है। हालांकि कांग्रेस पार्टी ने छोटे-छोटे राज्यों के गठन की संभावनाओं से फिलहाल इंकार कर दिया है।

गोरखालैंड की मांग को लेकर दार्जिलिंग की पहाड़ियों में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के अनिश्चितकालीन हड़ताल की धमकी दी है।

मोर्चे के महासचिव रोशन गिरि और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के सांसद सानसुमा खुंग्गूर ने कहा है कि उनके पास बंगाल और असम का विभाजन कर अलग राज्यों के गठन के लिए आंदोलन तेज करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। बोडोलैंड के समर्थकों ने भी धमकी दी है कि वे अपना आंदोलन तेज करेंगे।

जबकि देश के कई हिस्सों में अलग राज्य बनाने को लेकर धरने प्रदर्शन के एक सवाल के जवाब में आंध्र प्रदेश के प्रभारी और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रदर्शनों के आधार पर राज्य नहीं बना करते।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अध्ययन करना होता है। जबकि दूसरी तरफ लखनऊ में मायावती ने यूपी को चार भागों में बांटने की मांग कर डाली।

यूपी को बांटकर पूर्वांचल, अवध प्रदेश, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश की मांग की। केंद्रीय मंत्री अजित सिंह ने यूपी को बांटकर हरित प्रदेश बनाने के लिए लोगों को एकजुट होकर आंदोलन छेड़ने के लिए कहा है।

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केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन ने भी कहा कि बुंदेलखंड की मांग सबसे पुरानी है। पहले राज्य पुनर्गठन आयोग के एक सदस्य ने इसकी सिफारिश की थी। इसके इतिहास को देखते हुए बुंदेलखंड अलग राज्य बनना चाहिए।

वहीं कांग्रेस सांसद जगदंबिका पाल ने भी पूर्वांचल की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिहार और यूपी के इलाकों को मिलाकर राज्य बनाना चाहिए।

तेलंगाना बनाने को लेकर आंध्र प्रदेश में लगी आग की तपन सबसे पहले महाराष्ट्र पहुंचीं। कांग्रेस सांसद विलास मुत्तेमवार ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिख कर अलग विदर्भ राज्य की मांग की। भाजपा ने भी इसका समर्थन किया है। जबकि शिवसेना ने इसका विरोध किया है।


बंद से जनजीवन प्रभावित
अलग तेलंगाना के गठन पर कांग्रेस और यूपीए सरकार के फैसले के खिलाफ बुधवार को रायलसीमा और तटीय आंध्र के इलाकों में बंद से आम जनजीवन प्रभावित हुआ।

शैक्षणिक संस्थान, व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह से बंद रहे और आंध्र प्रदेश सड़क परिवहन कारपोरेशन की सेवाएं रायलसीमा और तटीय आंध्र के कडप्पा, चित्तूर, विशाखापट्टनम और कृष्णा जिलों में रद्द रही।

संयुक्त आंध्र प्रदेश के समर्थक संगठनों ने प्रदेश को विभाजित किए जाने के कांग्रेस के निर्णय के खिलाफ बंद का आह्वान किया था।

रायलसीमा और तटीय आंध्र के जिलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।

बयान पर घिरीं शोभा डे
मुंबई को पृथक राज्य का दर्जा देने संबंधी टिप्पणी करने वाली मशहूर लेखिका शोभा डे के खिलाफ भगवा दलों ने खासी नाराजगी जताई। शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने शोभा डे के बयान पर विरोध जताया।

शोभा डे ने तेलंगाना के पृथक राज्य बनने का रास्ता साफ होने के बाद सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर लिखा था, ‘महाराष्ट्र और मुंबई? क्यों नहीं? वैसे भी मुंबई ने तो हमेशा से ही खुद की आजादी चाही है। इस खेल में अनगिनत संभावनाएं हैं।’

उनकी इस टिप्पणी पर महाराष्ट्र के सियासी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है।

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