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चरित्र हनन करने वालों पर जमकर बरसीं श्वेता

Tue, 09 Dec 2014 04:01 PM IST
Updated Tue, 09 Dec 2014 04:01 PM IST
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Shweta Basu Prasad Wrote an Open Letter to Media

बाल कलाकार रहीं श्वेता बसु ने मीडिया पर गलत तरीके से वेश्यावृति में नाम घसीटने का आरोप लगाया है। सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद वेश्यावृत्ति में नाम आने के बाद श्वेता बसु को 59 दिनों के लिए सुधार गृह भेज दिया गया था। लेकिन इस मामले में पिछले दिनों हैदराबाद की स्थानीय अदालत ने श्वेता को क्लीन चिट दे दी थी और उनके खिलाफ सारे आरोप हटा लिए थे।

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मकड़ी जैसी फिल्म में काम करने वाली 23 वर्षीय इस अभिनेत्री ने ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक खुले पत्र में कहा कि मीडिया में जिस तरह से खबरें उछाली गईं उससे वह दुखी हैं।
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उन्होंने कहा, ‘मैं समझती हूं कि सब कुछ प्रतिक्रियाओं की एक कड़ी है। इस दौरान झूठी खबरें छापी गईं, मेरा बयान जो कि कभी मेरे नहीं थे वो तक छापे गए। लेकिन मैं आज स्पष्ट कर दूं, सबको, पूरी दुनिया को कि ये मेरे बयान नहीं थे।’ श्वेता ने कहा कि वह पिछली बातों को भुलाकर जीवन में आगे बढ़ना चाहती हैं।
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पढ़िए श्वेता के पत्र के अंश-

बयान है या 80 की बॉलीवुड फिल्म का डायलॉग?

Shweta Basu Prasad Wrote an Open Letter to Media

प्रिय मीडिया
मैं कई महान पत्रकारों और संवाददताओं की प्रशंसा करते हुए बड़ी हुई। जिन्होंने युद्घ के दिनों में सीमाओं से, आपदाओं के इलाकों से और आतंकी वारदातों की ‌बिना हिचाकिचाए सीधी खबरें भेजी। उन्होंने मुझे प्रेरित किया, जिसके बाद ही मैंने मॉस मीडिया और जर्नलिज्म की डिग्री ली। मैं हमेशा कहती, वॉव! मीडिया के लोग वाकई में अपनी जान खतरे में डालकर हमारे सामने सच्चाई ले आते हैं लेकिन आप लोगों ने मेरे जीवन को अस्तव्यस्त कर दिया। बधाई हो आपको।

मैं समझती हूं कि सब कुछ प्रतिक्रियाओं की एक कड़ी है। वाकए का विवरण कई भ्रामक खबरों और मेरे बयान के साथ छापा गया।......रुकिए! वह मेरा बयान नहीं था, जिसमें कहा गया था 'मैंने करियर में कई गलत फैसले किए और दिवालिया हो चुकी हूं। मुझे अपने परिवार की मदद के लिए पैसे की आवश्यकता थी। मेरे पास विकल्प नहीं था। कुछ लोगों ने मुझे वेश्यावृ‌त्ति के लिए उकसाया। मैंने असहाय थी। मेरे पास कोई रास्ता नहीं थी। मैं वे‌श्यावृत्ति में मुब्तिला हो गई। मैं अकेली नहीं हूं, जिसने मुश्किल का सामना किया है। कई अन्य अभिनेत्रियां भी इस दौर से गुजर चुकी हैं।

वाकई में? जिसने भी ये बयान दिया है वह कहीं पर भी धुएं के छल्ला उड़ा सकता है। ये बयान है या 80 की किसी बॉलीवुड फिल्म का डायलॉग? और इतने ज्यादा 'और' क्यों? दोबारा स्कूल पढ़ने जाओ बच्चे!

'अगर गलत खबर दी गई तो मेरी क्या गलती है'

Shweta Basu Prasad Wrote an Open Letter to Media

मैं अपने परिवार, दोस्तों और उन सभी की, जिन्होंने बयान पर भरोसा नहीं किया, शुक्रगुजार हूं। उन्हें पता था कि मैं ऐसे बात नहीं कर सकती। लेकिन देश के दूसरे लोगों को, इस ग्रह के हर व्यक्ति को मैं अंतिम बार बता रही हूं कि वह मेरा बयान नहीं था।

समाज के साथ दिक्‍क्कत ये है कि जब तक मुझे सहानुभूति दी जा सकती थी, लोग 'बेचारी लड़की' कह कर मेरी मदद करते रहे। लेकिन जैसे ही लोगों को लगने लगा कि 23 साल की यह लड़की बहूत ही मजबूत है, अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है, उन्हें लगने लगा कि मैं झूठ बोल रहीं हूं। अगर गलत खबर दी गई तो इसमें मेरी क्या गलती है।

मैं किसी को ये नहीं कह सकती कि वे मेरा सम्‍मान करें। ये जो हुआ वह भी मेरे न‌ियत्रंण से बाहर था। हिरासत में लिए जाने के बाद मुझे सुधारगृह में भेज दिया गया। जहां मैं 59 दिनों तक रही। 60वें दिन मैं वहां से वापस आ गई। फिर मैं मीडिया को कैसे और कहां बयान दे सकती थी। मेरा फोन जब्त कर लिया गया था। मैं अंतिम बार अपनी मां और कुछ करीबी दोस्तों से ही बात कर पाई ‌थी।

'वह बिजनेसमैन कौन था, मैं भी जानना चाहती हूं'

Shweta Basu Prasad Wrote an Open Letter to Media

मुझे दो महीने तक न अखबार दिया गया और न टीवी, इंटरनेट और रेडियो। मुझे नहीं पता था कि प्रज्वला सुधार गृह, जो महबूब नगर में है, के बाहर क्या चल रहा है। हालांकि वहां मेरा अच्छा वक्त गुजरा।

मैंने बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी और हिंदुस्तानी संगीत सिखाया। मैंने उन दो महीने में 12 किताबें भी पढ़ी। लेकिन जब मैं 30 अक्टूबर को अपने घर मुंबई आई तो मुझे उन खबरों के बारे में पता चला, जो दो महीने तक छपती रही। मैं उन्हें पढ़कर बहुत दु‌खी हुई ‌थी।

श्वेता बसु प्रसाद का पूरा पत्र पढ़ने के लिए क्लिक करें

एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पुलिस का कहना है कि मैंने उन्हें बयान दिया है। लेकिन जब मैंने यही सवाल पुलिस अधिकारियों से पूछा तो उन्हें ऐसी किसी बयान से इनकार कर दिया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि ऐसे किसी बयान के सा‌थ हैदराबाद पुलिस की ओर से कोई प्रेसनोट जारी नहीं किया गया।

और पुलिस को ऐसे मामलों में पीड़ित की पहचान उजागर करने का आदेश भी नहीं है। ऐसे में ये संभव नहीं कि वे ऐसा बयान जारी करें। ये कानून के खिलाफ भी है। ऐसा कोई बयान नहीं था और मैं थी भी नहीं, इस‌लिए गलत खबरें फैलती रहीं। और वह बिजनेसमैन कौन था, मैं भी जानने की उत्सुक हूं। ये एक पहेली है मेरे साथ जो बिजनेसमैन पकड़ा गया। वह कहां हैं?

आप इस बारे में सो‌चिए।
-श्वेता बसु प्रसाद

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