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शनि शिंगणापुर:श्री श्री रविशंकर भी नहीं निकाल सके कोई हल

Mon, 08 Feb 2016 05:21 AM IST
Updated Mon, 08 Feb 2016 05:21 AM IST
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shri shri ravishankar on shani singhnapur temple

शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर जारी विवाद को सुलझाने के लिए आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने रविवार को मंदिर ट्रस्ट और भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड के सामने अपना प्रस्ताव रखा। पुणे में हुई बैठक में प्रस्तुत प्रस्ताव में कहा गया कि सिर्फ पुजारी ही शनि देव के चबूतरे पर चढ़कर पूजा करेंगे।

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महिलाओं और पुरुषों, दोनों को ही चबूतरे तक जाने की अनुमति नहीं होगी। बैठक के बाद श्री श्री ने मामला सुलझाने का दावा किया, लेकिन भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई ने इस बैठक को बेनतीजा करार दिया। रविवार को बैठक के बाद श्री श्री रविशंकर ने दावा किया कि शनि शिंगणापुर मंदिर ट्रस्ट और भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड में सहमति बन गई है।
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उन्होंने कहा कि अब सिर्फ पुजारी ही चबूतरे पर चढ़कर पूजा कर सकेंगे। पुुरुषों के प्रवेश पर भी पाबंदी लगेगी। सभी लोग मंदिर के बाहर से दर्शन करेंगे। श्री श्री ने बताया कि शनि देव की शिला पर तिलाभिषेक भी मशीन के जरिये होगा। आध्यात्मिक गुरु ने दोनों पक्षों में सुलह कराने के लिए मंदिर ट्रस्ट के सामने दो प्रस्ताव रखे थे।
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अपनी परंपरा तोड़ने के लिए तैयार नहीं

shri shri ravishankar on shani singhnapur temple

प्रस्तावों के मुताबिक मंदिर के गर्भगृह में महिलाओं को पूजा अर्चना की इजाजत मिले या फिर पुरुषों को भी इसकी अनुमति नहीं हो। उन्होंने इस बाबत तर्क भी दिया कि जब सभी महिलाएं काशी विश्वनाथ मंदिर और तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं, तब आखिर शनि महाराज कैसे नाराज हो सकते हैं।

यह सब भय की वजह से है। लेकिन मंदिर ट्रस्ट किसी भी सूरत में अपनी परंपरा तोड़ने के लिए तैयार नहीं है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बैठक में मंदिर के गर्भ में सिर्फ पुजारी को ही प्रवेश देने के फार्मूले पर जोर दिया। इसके पीछे रणनीति यह रही कि मंदिर ट्रस्ट अपनी परंपरा भी बचा लेगा और विवाद को भी खत्म कर देगा।

दूसरी ओर मंदिर ट्रस्ट 11 हजार रुपये देकर चबूतरे पर चढ़कर तिलाभिषेक करने की व्यवस्था खत्म करने के लिए भी तैयार नहीं हुआ। हालांकि भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि महिलाओं को चबूतरे पर चढ़कर पूजा करने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

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