'अब ले सकते हैं स्कर्ट के अंदर की फोटो'
जमाना कहां से कहां जा रहा है? आम तौर पर बुजुर्गों की जुबान से सुनने को मिलने वाली यह बात अब वाकई हकीकत बनती दिख रही है। एक तरफ दुनिया महिलाओं की सुरक्षा की बात करती है और दूसरी तरफ कोर्ट का ऐसा आदेश।
कोर्ट का यह ऑर्डर हैरान कर सकता है, लेकिन पुख्ता है। इसे पढ़कर आपके होश उड़ सकते है, लेकिन यह फैसला एक जज ने दिया है। कानून की ऐसी व्याख्या इससे पहले शायद ही की गई हो।
यह मामला जुड़ा है स्कर्ट पहनने वाली महिलाओं से। इन महिलाओं को अब संभलकर रहना होगा। क्योंकि कोर्ट के मुताबिक अब कानून ने ऐसी मंजूरी दे दी है, जिससे उन्हें काफी दिक्कत हो सकती है।
स्कर्ट के नीचे फोटो खींचना गैरकानूनी नहीं
यह अमेरिका है और लेडीज को संभल जाना चाहिए। मैसाच्युसेट्स की एक शीर्ष अदालत ने आदेश दिया है कि 'अपस्कर्टिंग' पर सरकारी कानून के तहत पाबंदी नहीं लगती।
अपस्कर्टिंग से मायने गोपनीय तरीके से महिलाओं की स्कर्ट के भीतर की तस्वीरें खींचने से है। हाई कोर्ट के मुताबिक पूरी तरह नग्न या आंशिक रूप से न्यूड लोगों के 'पीपिंग टॉम' वॉयरिज्म पर पाबंदी लगाने वाला कानून उन लोगों पर लागू नहीं होता, जो पूरे कपड़े पहने होते हैं।
पीपिंग टॉम वॉयरिज्म से जुड़ा कानून उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करता है, जो दूसरों को जिस्मानी रिश्ते बनाते देखते हैं या उनकी तस्वीरें उतारते हैं। लेकिन कोर्ट के मुताबिक स्कर्ट के भीतर की फोटो के मामले में यह बात लागू नहीं होती।
बरी कर दिया गया यह काम करने वाला
बुधवार को आए इस फैसले ने उस शख्स को दोषमुक्त करार दिया, जिस पर मैसाच्युसेट्स बे ट्रांसपोर्टेशन अथॉरिटी ट्रॉली में अनधिकृत तस्वीरें लेने का इल्जाम लगाया गया था।
माइकल रॉबर्टसन पर यह मामला दिसंबर 2011 में बना था। हालांकि, मैसाच्युसेट्स सुप्रीम ज्यूडिशियल कोर्ट में वह कामयाबी के साथ अपील कर सकें।
अदालत ने कानून की भाषा पर ज्यादा गौर किया, जो उस शख्स की गोपनीय तस्वीरें उतारने पर पाबंदी लगाता है, जो आंशिक रूप से नग्न हो।
कानून की व्याख्या की आलोचना शुरू
अदालत ने अपने आदेश में कहा, "एमबीटीए ट्रॉली में मौजूद महिला जो स्कर्ट, ड्रेस पहने है या फिर उसके निजी अंग छिपे हुए हैं, उसे उन लोगों में शुमार नहीं किया जा सकता, जो आंशिक रूप से न्यूड हैं। फिर इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसने स्कर्ट के नीचे कुछ और पहन रखा है या नहीं।"
मैसाच्युसेट्स में स्पीकर ऑफ द हाउस रॉबर्ट डीलियो ने कहा कि अदालत का आदेश कानूनी खामी है, जिसे वो बदलेंगे। उन्होंने कहा, "यह फैसला मौजूद कानून की आत्मा से उलट है।
न्यूयॉर्क डेली न्यूज के मुताबिक ट्विटर पर कई यूजर ने तुरंत इस आदेश की आलोचना शुरू कर दी। एक महिला ने लिखा, "सभी हमले शारीरिक नहीं होती। अपस्कर्टिंग एक उल्लंघन हैं। और इसे अदालत ने हरी झंडी दे दी है।"