‘घर वापसी’ के समर्थन में आई शिवसेना
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जबरन धर्मांतरण पर उठे राजनीतिक तूफान के बीच शिवसेना भी हिंदूवादियों के समर्थन में आ गई है। पार्टी ने कहा है कि ‘घर वापसी’ में कुछ भी गलत नहीं है। शिवसेना ने परोक्ष तौर पर भाजपा को सलाह दी है कि वह इस मुद्दे पर खुलकर सामने आए।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में ‘धर्मांतरण का जागरण’ शीर्षक से संपादकीय लिखा है। इसमें कहा गया है कि जब हिंदुओं को प्रलोभन देकर और जबरन इस्लाम धर्म कुबूल करवाया गया, तब किसी ने इसका विरोध नहीं किया।
पार्टी ने तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों से सवाल किया है कि मुगल शासनकाल में हिंदुओं को जबरन मुस्लिम और पुर्तगाली एवं ब्रिटिश काल में ईसाई बनाए जाने के बारे में उनका क्या कहना है।
'भाजपा अपना रुख साफ करे'
हाल के दिनों में मीनाक्षीपुरम में हिंदुओं को सामूहिक रूप से मुस्लिम बनाया गया। आदिवासियों और दलितों की गरीबी का फायदा उठाकर उन्हें मुस्लिम और ईसाई बनाने के कई उदाहरण हैं। जब यह सब होता है तो कोई मुंह नहीं खोलता।
शिवसेना ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक की इस मांग का भी समर्थन किया है कि अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए। पार्टी ने संपादकीय में लिखा है कि तलवार और पैसे के बल पर दुनिया भर में धर्म प्रसार के कार्य चलते हैं, लेकिन हिंदुओं के पास न तलवार है और न ही पैसा।
इसके बावजूद अन्य धर्मों में गए लोगों की घर वापसी का महान कार्य हिंदूवादी संगठन कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत और विश्व हिंदू परिषद नेता प्रवीण तोगड़िया ने शिवसेना के इस लेख का स्वागत किया है।