शिवसेना ने बिहार चुनाव में हार को लेकर भागवत पर साधा निशाना
शिवसेना ने बिहार विधानसभा चुनाव में हार पर दूसरे दिन भी भाजपा और उसकी मातृ संस्था आरएसएस पर कटाक्ष किया है। हालांकि शिवसेना ने सीधे तौर पर संघ प्रमुख का नाम नहीं लिया है, लेकिन पार्टी के मुखपत्र में बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा के इस बयान कि ‘ताली कप्तान को, तो गाली भी कप्तान को’ का जिक्र करते हुए मोहन भावगत पर निशाना साधा है। शिवसेना ने कहा कि जब पार्टी के सारे फैसले संघ लेती है, तो बिहार में हार की जिम्मेदारी भी संघ को लेनी चाहिए।
बिहार चुनाव के नतीजे आने के बाद शिवसेना लगातार भाजपा पर हमलावर है। मंगलवार को पार्टी के मुखपत्र में शिवसेना ने मोहन भागवत पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि जब कहीं भाजपा जीत जाती है, तो जीत का सेहरा संघ के सर संघचालक के सिर पर बंधता है। लेकिन जब पार्टी हार जाती है, तो संघ हाथ खींच लेता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। संघ की जिम्मेदारी बनती है कि वह भी हार स्वीकार करे और हार की जिम्मेदारी ले।
राजनीति में हमेशा धूर्तता काम नहीं आती
केंद्र और महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने के बावजूद शिवसेना हर मौके पर भाजपा को पटखनी देने की कोशिश में रहती है। चाहे वह बीफ विवाद रहा हो या असहिष्णुता पर शाहरुख खान के बयान का मामला रहा हो। शिवसेना ने बीफ के ताजा विवाद पर भी भाजपा पर निशाना साधा था और बिहार चुनाव में असहिष्णुता पर भी भाजपा को कटघरे में खड़ा किया था।
अब आरएसएस सर संघचालक भागवत पर हमला बोलकर शिवसेना ने नए विवाद को जन्म देने की कोशिश की है। बिहार चुनाव में हार से उबरने की कोशिश में जुटी भाजपा पर शिवसेना ने व्यंग्य कसा है। पार्टी ने कहा कि राजनीति में हमेशा धूर्तता काम नहीं आती है। अगर वादे पूरे नहीं किए जाते हैं तो जनता जवाब अवश्य देती है। लहर आती है और चली जाती है। लहर के चले जाने के बाद फिर उसका नामो निशान नहीं दिखता।
शिवसेना ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को भारी सफलता मिली, लेकिन उस जीत का श्रेय कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का है। चुनावी अखाड़े में कोई मजबूत पहलवान नहीं था। लिहाजा भाजपा बाहुबली के रूप में उभर कर आई। बिहार में जेडीयू और आरजेडी की शानदार जीत की प्रशंसा करते हुए शिवसेना ने कहा कि यह सिद्धांतों की जीत है, जबकि भाजपा अहंकार के चलते हार गई।