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दोस्त बने दुश्मन, शिवसेना का मोदी-राजनाथ पर करारा हमला

Sat, 22 Mar 2014 12:45 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 22 Mar 2014 12:45 PM IST
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shivsena attacks ally bjp over ignorance of advani

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बॉस राज ठाकरे से भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी की मुलाकात पर नाराजगी का इजहार करने वाली शिवसेना अब खुलकर भगवा दल पर हमले बोलने लगी है। बहाना लालकृष्ण आडवाणी को बनाया गया।

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शिवसेना ने भाजपा पर करारा हमला बोला और सवाल उठाया है कि उसे लालकृष्ण आडवाणी की लोकसभा सीट तय करने में इतना वक्त क्यों लगाया गया? पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखा, "नरेंद्र मोदी का युग शुरू हुआ है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आडवाणी के युग का अंत हो गया है।"
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उन्होंने कहा, "आडवाणी का नाम लोकसभा उम्मीदवारों से जुड़ी भाजपा की पहली सूची में होना चाहिए था। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। जिसने पार्टी को खड़ा किया, उसे यहां तक पहुंचाया, उन्हें इंतजार करवाया गया।"
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भाजपा से नाराज है शिवसेना

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भाजपा पर आक्रामक रुख दिखाते हुए उद्धव ठाकरे ने लिखा, "भाजपा को आडवाणी की सीट तय करने में इतना वक्‍त क्यों लग गया? ऐसा करना उनका अपमान है।" हाल में आडवाणी के लिए गांधीनगर और भोपाल को लेकर भाजपा में काफी बवाल हुआ था।

गुरुवार को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मान-मनोव्वल के बाद आडवाणी गांधीनगर से लड़ने के लिए तैयार हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने इससे पहले साफ कर दिया था कि वह मध्य प्रदेश में भोपाल सीट से लड़ना ज्यादा पसंद करते।

सामना में ठाकरे ने लिखा, "मुरली मनोहर जोशी को कानपुर से लड़ने के‌ लिए कहा गया, ताकि मोदी को बनारस से लड़ाया जा सके। राजनाथ ने गाजियाबाद के बजाय लखनऊ जैसी सुरक्षित सीट चुनी। नवजोत सिद्धू को हटाकर अमृतसर से जेटली को उतारा गया। तो आडवाणी के मामले में ऐसा क्यों नहीं हुआ?"

'खत्म नहीं हुआ आडवाणी युग'

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उद्धव ठाकरे का मानना है कि आडवाणी का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, "आम लोगों के बीच में उनकी लोकप्रियता अब भी कायम है। आडवाणी एपिसोड मौजूदा राजनीतिक उठापटक में भले छोटा दिखे, लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि बड़े हादसे ऐसे ही छोटी घटनाओं की वजह से हो सकते हैं।"

दरअसल, उद्धव का यह गुस्सा उनके भाई और एमएनएस चीफ राज ठाकरे से भाजपा नेता की मुलाकात से जुड़ा है। इस मुलाकात पर उद्धव काफी बिफर गए थे और उन्होंने कहा था कि एनडीए गठबंधन में किसी के लिए जगह नहीं है।

हालांकि, भाजपा अपना चुनावी गणित देख रही है। उसे पता है कि संख्याबल जुटाने के लिए चुनावों के बाद राज ठाकरे की मदद की जरूरत भी पड़ सकती है, इसलिए वह किसी भी संभावित सहयोगी से संपर्क तोड़ना नहीं चाहती।

पहले भी दिया था जोर का झटका

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शिवसेना ने शुक्रवार को भाजपा को भी झटका दिया था। उसने महाराष्ट्र से बाहर भाजपा से अलहदा कुछ लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया। शुरुआत में खबर थी कि मोदी और राजनाथ सिंह के खिलाफ भी उम्मीदवार उतारा जाएगा, लेकिन बाद में इस खबर का खंडन कर दिया गया।

शुक्रवार को शिवसेना की ओर से उत्तर प्रदेश की 20 और बिहार की 5 सीटों पर प्रत्याशी खड़े करने का ऐलान किया गया है।

इस मामले में पार्टी के प्रवक्ता संजय राउत का कहना था कि हमारा और भाजपा का गठबंधन महाराष्ट्र में है। यूपी और बिहार में किसी तरह का गठबंधन नहीं है। शिवसेना अपनी पार्टी का विस्तार चाहती है इसीलिए हम यूपी-बिहार के अलावा दिल्ली पंजाब और केरल की कुछ सीटों पर भी अपने प्रत्याशी उतार रहे हैं।

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