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तो शिवराज और उमा को भी देना होगा इस्तीफा?

Sat, 21 Feb 2015 09:07 AM IST
Updated Sat, 21 Feb 2015 09:07 AM IST
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Shivraj and Uma may have to resign

व्यापम घोटाले में कांग्रेस के नए और सनसनीखेज आरोपों के बाद मध्यप्रदेश में सत्तारुढ़ भाजपा को दो मोर्चों पर एक साथ मेहनत करनी पड़ रही है। पहला राज्यपाल रामनरेश यादव का खुलकर बचाव और दूसरा- संगठन स्तर पर पूरी पार्टी को मुख्यमंत्री चौहान की रक्षा में उतरना पड़ा है।

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दरअसल इस महाघोटाले में एसटीएफ ने महामहिम राज्यपाल के बेटे शैलेष यादव को भी आरोपी बनाया है। उन पर संविदा शिक्षक भर्ती में कुछ परीक्षार्थियों से पैसे लेने का मामला है।
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उन्हें बुलाने के लिए एसटीएफ ने राजभवन नोटिस भेजा था, लेकिन नोटिस तामील नहीं हुआ तो एसटीएफ की टीम अब कार्रवाई के लिए यादव के गृहराज्य उत्तरप्रदेश गई है। सूत्रों का कहना है, इस खबर के बाद से राज्यपाल असहज महसूस कर रहे हैं और अपने पद से इस्तीफा देना चाहते हैं।
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शिवराज उमा भारती ने की राज्यपाल से मुलाकात

Shivraj and Uma may have to resign

इस बीच भाजपा इस कोशिश में है कि यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में सोनिया गांधी की ओर से नियुक्त किए गए राज्यपाल इस्तीफा न दें।

बुधवार को केन्द्रीय मंत्री उमा भारती और राज्य के गृह मंत्री बाबूलाल गौर ने उनसे राजभवन जाकर मुलाकात की थी और बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री चौहान ने भी श्रीगंगानगर ना जाकर राज्यपाल से ताजा राजनीतिक हालात पर चर्चा की।

माना यह जा रहा है कि अगर यादव का राज्यपाल पद से इस्तीफा हुआ तो फिर दो और इस्तीफों के लिए पार्टी पर दबाव बनेगा। एक मुख्यमंत्री चौहान और दूसरा केन्द्रीय मंत्री उमा भारती का।

इसीलिए उमा ने न केवल राज्यपाल से बात की बल्कि बीजेपी के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे और संगठन महामंत्री रामलाल से भी अलग में चर्चा की।

कांग्रेस ने अख्तियार कर रखा है हमलावर रुख

Shivraj and Uma may have to resign

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रामलाल और सहस्त्रबुद्धे ने तुरंत भोपाल पहुंचकर मोर्चा संभाला, पार्टी के विधायकों को साफ-साफ संदेश देकर यह कहना पड़ा कि पूरी पार्टी चौहान के साथ है।

पार्टी के इस रुख से खुद चौहान की भी हिम्मत बंधी है और इसीलिए शाम को वह इंदौर नगरनिगम की नवनिर्वाचित परिषद के शपथ ग्रहण समारोह में जा पाए।

बता दें कि मप्र के इतिहास के सबसे बड़े व्यापमं घोटाले में बीते सोमवार को कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने एसआईटी के समक्ष एक एक्सेल शीट पेश कर सीधे मुख्यमंत्री चौहान को लपेटे में लिया था। उनका आरोप है कि जांच एजेंसी एसटीएफ ने एक्सेल शीट से छेड़छाड़ की और 47 स्थानों पर सीएम (मुख्यमंत्री) का नाम हटाया गया।

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