रेप के आरोपी DIG के बचाव में शिवसेना
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मॉडल से रेप के आरोपों में फंसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुनील पारसकर का शिवसेना ने बचाव किया है।
शिवेसना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में डीआईजी का बचाव करते हुए कहा गया है कि पुरुषों पर रेप का आरोप लगाना आजकल फैशन बन गया है।
पार्टी ने कहा, "रसूखदार समाज में प्रचार के लिए पुरुषों पर छेड़छाड़ और बलात्कार के आरोप बढ़ रहे हैं। यह लगभग फैशन बन गया है।"
शिवसेना ने कहा, "उन्होंने पुलिस बल में इतने साल सेवाएं दीं और अब एक मॉडल ने डीआईजी सुनील पारसकर पर बलात्कार का आरोप लगा दिया। वह रातोंरात खलनायक बन गए। निजी दुश्मनी भुनाने के लिए ऐसे आरोप अच्छे हथियार बन गए हैं।"
पीड़ित मॉडल की मंशा पर उठाए सवाल
संपादकीय में दिल्ली गैंगरेप कांड के बाद कानून में बदलाव करने पर भी सवाल उठाया गया है।
शिवसेना ने कहा, "शर्मनाक निर्भया हादसे के बाद नए कानून बनाए गए। लेकिन क्या बलात्कार के मामले कम हुए? सच तो समय पर ही सामने आएगा लेकिन तब तक मीडिया ट्रायल जारी रहेगा और आरोपी का मनोबल गिर जाएगा। देश के सभी कानून महिलाओं का पक्ष लेते हैं। ऐसे में कोई भी किसी के भी खिलाफ किसी भी तरह का आरोप लगा सकता है। न्याय प्रणाली को अपनी आंखें खोलनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि बेकसूर लोगों को न्याय मिले।"
डीआईजी पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली मॉडल की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए संपादकीय में कहा गया, "जिस महिला को यह प्रताड़ना मिली हो, वह न्याय पाने के लिए इतना इंतजार नहीं करेगी।"
केस दर्ज कराने में 6 महीने इंतजार क्यों?
लेख में कहा गया है कि मॉडल ने छह महीने बाद आरोप दर्ज कराए, हमें याद करना होगा कि शक्ति मिल में हुई बलात्कार की घटना के बाद पीड़ित ने कुछ ही घंटे में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी।
कोई भी महिला अपने साथ यह अमानवीय सलूक एक मिनट भी बर्दाश्त नहीं करेगी। वह तत्काल शिकायत दर्ज कराएगी। पार्टी ने यह भी कहा कि मामले के तथ्यों को जितनी जल्दी हो, जनता के सामने लाना चाहिए।
शिवसेना ने उलटे मॉडल पर ही सवाल खड़े करते हुए कहा, "यह जानना होगा कि मॉडल की पृष्ठभूमि क्या है। उसने अचानक बलात्कार का आरोप कैसे लगा दिया। यह सवाल आम आदमी के दिमाग में आ रहे हैं लेकिन लगता है कि पुलिस की जांच में इसकी अनदेखी की जा रही है।"
डराने का प्रयास किया जा रहा: पीड़िता
शिवसेना के डीआईजी का बचाव करने पर रेप पीड़िता मॉडल ने कहा है कि संपादकीय उसे डराने के लिए किया गया प्रयास है। उसने कहा कि ऐसे सॉफ्ट तरीकों से उसे डराने की कोशिश की जा रही है। किसी को भी तथ्य जाने बिना कमेंट नहीं करना चाहिए।
पीड़िता ने कहा कि मामला अदालत में है, इसलिए तथ्यों को समझकर ही बोलना चाहिए। मॉडल ने आरोपी डीआईजी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें अपने बचाव में सबूत पेश करने चाहिए, न कि उसे भेजे गए ईमेल, जिसमें मैंने रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही थी।
मॉडल ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि रेप पीड़िता पर ही सवाल क्यों उठाए जाने चाहिए। क्या कोई रेप पीड़ित महिला आरोपी को सम्मान देगी?