रोजेदार को जबरन रोटी खिलाने पर संसद में बवाल
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शिवसेना सांसदों के बीते शुक्रवार को महाराष्ट्र सदन में कथित तौर पर आईआरसीटीसी के मुस्लिम कर्मचारी को रोजे के दौरान जबर्दस्ती रोटी खिलाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर संसद के दोनों सदनों में बुधवार को जबर्दस्त हंगामा हुआ, इसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही भी एक-एक बार स्थगित करनी पड़ी।
इस दौरान लोकसभा का माहौल तब बेहद तनावपूर्ण हो गया तब भाजपा सदस्य रमेश विधूड़ी की आपत्तिजनक टिप्पणी से सदन में मारपीट की नौबत आ गई। संसद के दोनों सदनों में उत्तेजित विपक्ष इस मामले की जांच कराने और आरोपी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग पर अड़ गया। जबकि सरकार ने मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए यह कहकर बयान देने से इंकार कर दिया कि उसे इस घटना की विस्तृत जानकारी नहीं है।
शिवसेना सांसद ने मांगी माफी
हंगामे के बीच शिवसेना के सांसदों ने माफी मांगने से इनकार करते हुए आरोप लगाया कि इस घटना को बेवजह सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश की जा रही है। इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने शिवसेना सांसदों के इस कृत्य को गलत करार दिया है, जबकि आईआरसीटीसी ने इस घटना के जांच के आदेश दिए हैं। यूपीए के सांसदों ने लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को पत्र लिखकर सांसदों की समिति बनाकर घटना की जांच कराने की मांग की है।
सूत्रों के मुताबिक बीते शुक्रवार को शिवसेना के 11 सांसदों ने कैंटीन में मनमुताबिक खाना न मिलने और सदन में भारी अव्यवस्था पर जमकर हंगामा किया था। इस दौरान नाराज सांसदों ने जहां सदन के आवासीय आयुक्त के दफ्तर में जमकर तोड़फोड़ की थी, वहीं एक मुस्लिम कर्मचारी को जबर्दस्ती रोटी खिलाई थी।
घटना की वीडियो फुटेज में शिवसेना सांसदों की पोल खुलने के बाद कृत्य को अंजाम देने वाले शिवसेना सांसद राजन विचारे ने यह कहते हुए माफी मांगी कि उन्हें पता नहीं था कि वह मुस्लिम है और उसकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो वे माफी मांगते हैं।
सरकार ने किया बयान देने से इंकार
शून्यकाल के दौरान लोकसभा में कांग्रेस के एमआई शाहनवाज ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि शुक्रवार को महाराष्ट्र सदन में शिवसेना सांसदों ने एक मुस्लिम कर्मचारी को यह जानते हुए भी कि वह रोजेदार है, चपाती खाने के लिए मजबूर किया। सांसद ने कहा कि इस दौरान कर्मचारी ने सांसदों को अपने रोजे की जानकारी दी और कर्मचारी की नेमप्लेट से भी साफ था कि वह मुस्लिम है।
मामले की जांच के लिए सांसदों की समिति बनाने की मांग करते हुए शाहनवाज ने कहा कि इस घटना से देश की छवि खराब हुई है। इसके जवाब में शिवसेना के अनंत गीते ने इस तरह की घटना से न केवल इंकार किया, बल्कि विपक्ष को रमजान के पवित्र महीने में झूठ न बोलने की नसीहत भी दी।
इसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। हंगामे के बीच ही संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और किसी को नहीं पता कि आखिर सच क्या है। ऐसे में सरकार इस मामले में बयान नहीं दे सकती।
विधूड़ी ने दी पाकिस्तान जाने की नसीहत
लोकसभा में इस मुद्दे पर मारपीट की नौबत भी आई। इस मामले में सदन में जारी हंगामे के बीच न केवल मामला उठाने वाले सांसदों को भाजपा सांसद रमेश विधूड़ी ने पाकिस्तान जाने की नसीहत दे दी। वह उग्र मुद्रा में विपक्षी सांसद पप्पू यादव और असदुद्दीन ओवैसी की ओर बढ़े।
धर्मवीर गांधी, कीर्ति आजाद, अनंत गीते सहित कई सांसदों ने बीचबचाव कर किसी तरह सदन में मारपीट की नौबत को आने से रोका। बाद में स्पीकर ने विधुड़ी की टिप्पणी को कार्यवाही से निकाल दिया और विधुड़ी के माफी मांगने के बाद माहौल थोड़ा शांत हुआ।
क्या है मामला
दरअसल शिवसेना के सांसद कैंटीन में महाराष्ट्र का खाना न मिलने और सदन में बाहरी राज्यों के सांसदों को सुइट मुहैया कराने से नाराज थे। बताया जाता है कि बीते शुक्रवार को सदन में पार्टी के 11 सांसदों ने इस मामले में आवासीय आयुक्त के दफ्तर में तोड़फोड़ के बाद कैंटीन में भी हंगामा किया। हंगामे के बीच सांसदों के पास पहुंचे आईआरसीटीसी के मुस्लिम कर्मचारी को जबर्दस्ती रोटी खिलाई गई। इस आशय की खबर प्रकाशित होने पर सियासी संग्राम शुरू हो गया।
सांसद राजन विचारे ने पहले किया इनकार, फुटेज के बाद जताया खेद
सांसद रंजन विचारे पहले तो इस तरह की कोई घटना होने से ही इनकार कर दिया, लेकिन घटना की फुटेज टीवी चैनलों पर प्रसारित होने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वह व्यक्ति धर्म या जाति का था, वह तो सिर्फ खाने की गुणवत्ता को लेकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे थे। टीवी फुटेज देखने से ही मुझे पता चला कि वह व्यक्ति मुस्लिम है, अगर उसकी भावनाएं आहत हुई हैं मैं खेद जाहिर करता हूं।
शिवसेना सांसदों के खिलाफ फूटा चौतरफा गुस्सा
महाराष्ट्र के कुछ सांसदों द्वारा मुस्लिम रोजेदार को जबरदस्ती रोटी खिलाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस समेत कई पार्टी के नेताओं ने इस घटना की निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने शिवसेना पर हमला बोलते हुए कहा, ‘हम सभी जानते हैं कि रमजान चल रहे हैं। यह मामला सिर्फ खाने की क्वालिटी को लेकर शिकायत का नहीं है। एक रोजेदार व्यक्ति को जबरदस्ती रोटी खिलाने की कोशिश की गई। इससे उनकी सोच व मानसिकता का पता चलता है। अब जब इस मामले ने तूल पकड़ लिया है, तो स्वाभाविक है कि वे इन आरोपों से इनकार करेंगे।’
बिहार के सीएम नीतीश ने इस मामले में कहा कि किसी रोजेदार व्यक्ति को रोटी खिलाना धार्मिक आस्था पर हमला करना है। उन्होंने कहा, ‘हमारे देश में हर किसी को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है। इसके खिलाफ किया गया कोई भी काम धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है। एक तरह से यह संविधान की आत्मा पर प्रहार है। उचित जांच के बाद घटना में दोषी सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।’ उधर, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, ‘अगर कोई मुस्लिम सांसद किसी हिंदू शाकाहारी को जबरदस्ती मांस खिलाने का प्रयास करता तो, भाजपा व शिवसेना की क्या प्रतिक्रिया होती। उन्हें शर्म आनी चाहिए।’
बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा, ‘अगर यह खबरें सही हैं, तो केंद्र को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और इस घटना में शामिल लोगों को गिरफ्तार करना चाहिए।’ जदयू के सांसद अली अनवर अंसारी ने इस मामले में कहा, ‘यह महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों से पहले सांप्रदायिक माहौल खराब करने की साजिश है। यह मुद्दा सदन में उठा है। इस घटना की वजह से पूरी दुनिया में गलत संदेश गया है। आरोपी शिवसेना सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।'