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शिवसेना-भाजपा गठबंधन रहेगा या टूटेगा?

Sun, 14 Sep 2014 06:22 PM IST
Updated Sun, 14 Sep 2014 06:22 PM IST
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shiv sena-bjp coalition break now?

महाराष्ट्र में हाल के दिनों में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी की दोस्ती में काफ़ी दरार आई है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ठाकरे परिवार ने पहली बार मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी जताई है।

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बाल ठाकरे की मृत्यु के बाद पहली बार राज्य में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इससे पहले जब मुंबई महानगर पालिका और लोकसभा के चुनाव हुए थे, तब शिवसेना काफी बिखरी हुई, टूटी हुई और हताश थी।
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लेकिन फिर भी पार्टी ने चुनावों में सफ़लता हासिल की। ऐसे में, शिवसेना को लग रहा है कि अब राज्य में मुख्यमंत्री का पद उसे ही मिलना चाहिए, जबकि बाल ठाकरे हमेशा रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाना चाहते थे।
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शिवसेना पहली बार राजनीतिक तर्क का भी सहारा ले रही है। उद्धव ठाकरे ने एक साक्षात्कार में कहा है कि नरेंद्र मोदी की लहर तमिलनाडु, पंजाब, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में नहीं चली है, तो इसका क्या कारण था?

इसका जवाब भी उद्धव ने ख़ुद दिया है कि जिन राज्यों में नरेंद्र मोदी की पार्टी का गठबंधन नहीं था, वहां उसे हार का सामना करना पड़ा।

शिवसेना का काम

shiv sena-bjp coalition break now?

एक और बात अहम है, भारतीय जनता पार्टी का दबदबा महाराष्ट्र के केवल विदर्भ इलाके में है जबकि उत्तर महाराष्ट्र, कोंकण, मराठवाड़ा और मुंबई में शिवसेना का प्रभाव है।

शिवसेना को लगता है कि उसने पिछड़ों और दलितों के बीच काम किया है, पिछड़ों का एक बड़ा तबका उनका समर्थक है। इस तबके सहारे शिवसेना को लगता है कि उनकी जीत होगी और वे सरकार बना लेगी।

भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच पच्चीस साल पुराना गठबंधन है। हर चुनाव से पहले दोनों पार्टी के बीच ऐसे हालात सामने आते हैं कि लगता है कि गठबंधन अब टूटा कि तब टूटा।

दोनों एक दूसरे पर दबाव बनाने के लिए काफ़ी राजनीति करते हैं। लेकिन इस बार शिवसेना का रुख़ बेहद कड़ा है। शिवसेना 288 सीटों में 155 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए अड़ी हुई है। शिवसेना भारतीय जनता पार्टी को 119 (2009 के चुनाव जितने) से ज्यादा तीन चार सीटें ही दे सकते हैं।

वहीं भारतीय जनता पार्टी 50-50 फ़ॉर्मूले की बात कर रही है। बीते पच्चीस सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ है। अगर ये गठबंधन टूटता है तो ना तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी और ना ही शिवसेना की।

इसलिए गठबंधन टूटने की आशंका तो नहीं है। लेकिन अगले पंद्रह दिनों तक दोनों पार्टी एक दूसरे पर दबाव बनाने का काम ज़रूर करेगी।

(बीबीसी संवाददाता मोहन लाल शर्मा से बातचीत पर आधारित)

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