संगम पर फिर तैरेंगे पानी के जहाज
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सोलह साल पहले जब इलाहाबाद-हल्दिया जलमार्ग शुरू हुआ था तो लगा कि संगम नगरी की सूरत बदल जाएगी लेकिन गंगा में तेजी से बढ़ती गाद ने कार्गो जहाज पर ब्रेक लगा दिया और वर्ष 2003 के बाद कोई बड़ा कार्गो जहाज इस मार्ग से इलाहाबाद तक नहीं आ सका।
हालांकि छोटे जहाज इस रूट पर चलते रहे। अब मोदी सरकार ने इस जलमार्ग को पुनर्जीवित करने के लिए भारी भरकम बजट की घोषणा की है।
इस मार्ग का रखरखाव कर रहे भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के कर्मचारियों-अफसरों का मानना है कि इस घोषणा से अब विभाग के साथ इलाहाबाद के लिए भी अच्छे दिन आ जाएंगे और जल मार्ग से इलाहाबाद का व्यापार नई बुलंदियों को छुएगा। साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
हजारों लोग पहुंचे थे कार्गों जहाज पहुंचने
वर्ष 1961 के एक्ट के तहत 1986 में तीन राष्ट्रीय जल मार्ग बनाने की घोषणा की गई। इनमें 1620 किलोमीटर का सबसे लंबा राष्ट्रीय जलमार्ग नंबर एक इलाहाबाद से हल्दिया, 867 किलोमीटर लंबा राष्ट्रीय जलमार्ग नंबर दो ब्रह्मपुत्र नदी पर धुबरी से सैदिया और 135 किलोमीटर लंबा राष्ट्रीय जलमार्ग नंबर तीन कोचीन से कोल्लम तक शामिल था।
इलाहाबाद से हल्दिया के बीच वर्ष 1998 में पहला कार्गो जहाज चला जो शहर में सरस्वती घाट तक आया। वर्ष 2003 में एमवी राजगोपालाचारी नाम का कार्गो जहाज सरस्वती घाट से हल्दिया के लिए रवाना किया गया, जो अपने साथ 600 मीट्रिक टन सीमेंट लेकर गया।
इसे देखने के लिए आसपास के जिलों से हजारों लोग यहां पहुंचे थे। 2003-04 में ही नए यमुनापार की निर्माण सामग्री भी कार्गो जहाज से ही पहुंचाई गई थी लेकिन इसके बाद गंगा में तेजी से जमा हुई गाद कार्गो जहाज के रास्ते में रोड़ा बन गई और फिर कोई बड़ी कार्गो शिप सरस्वती घाट तक नहीं पहुंची और न ही यहां से रवाना की जा सकी।
कार्गो जहाज को चाहिए दो मीटर जल स्तर
दरअसल, कार्गो जहाज के लिए न्यूनतम दो मीटर का जल स्तर होना चाहिए। अब नए आधुनिक जहाज आ गए हैं, जो डेढ़ मीटर के जलस्तर पर भी चल जाते हैं लेकिन इलाहाबाद से सिरसा के बीच तकरीबन 41 किलोमीटर तक जलस्तर औसतन 0.8 मीटर है, जिस पर कार्गो जहाज नहीं चल सकता।
हर साल मार्च से 15 जून के बीच यही जलस्तर रहता है। बाढ़ के दौरान जलस्तर बढ़ जाता है और तब कार्गो जहाज चल सकता है। 41 किलोमीटर में जमा इस गाद को साफ करने के लिए आधुनिक मशीनों और बड़े बजट की जरूरत है, जो मोदी सरकार ने पूरी कर दी है। इलाहाबाद में इस विभाग के कार्यालय प्रभारी आरसी पांडेय का कहना है कि इलाहाबाद-हल्दिया जलमार्ग को संजीवनी मिल गई है। जल्द ही फिर बड़े कार्गो जहाज इस रूट पर चलेंगे।
नैनी में बनेगा टर्मिनल
इलाहाबाद-हल्दिया जलमार्ग के तहत टर्मिनल बनाने के लिए विभाग ने वर्ष 2004 में 35 लाख रुपये की लागत से करछना के लवायन खुर्द में 9.87 एकड़ जमीन खरीदी थी। टर्मिलन के लिए गोडाउन, प्लेटफार्म आदि बनाने और तमाम आधुनिक उपकरण लगाने की योजना थी लेकिन बजट की कमी के कारण ऐसा नहीं हो सका। विभाग ने वहां बाउंड्री बनवाकर पौधरोपण करा दिया है। बजट घोषित होने के बाद अब जल्द ही टर्मिनल का निर्माण शुरू होने की भी उम्मीद है।
पिछले साल इलाहाबाद में हल्दिया से दो कार्गों जहाज आए लेकिन सिरसा से इलाहाबाद के बीच गाद जमा होने के कारण जहाज पर लदा सामान सरस्वती घाट न लाकर दूसरी जगह उतारा गया। सात अक्तूबर 2013 को कार्गो जहाज 601 मीट्रिक टन वजन लेकर शंकरगढ़ पहुंचा था। इस पर बारा पावर प्रोजेक्ट के लिए ट्रांसफार्मर लाए गए थे जबकि एक अन्य जहाज 343 मीट्रक टन वजन लेकर कोहड़ार घाट तक पहुंचा था।
कभी इलाहाबाद में बैठते थे निदेशक
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण का गठन सितंबर 1986 में हुआ और 1987 में इलाहाबाद स्थित बिल्वेडियर प्रेस में इस विभाग का दफ्तर खुला। तब यहां निदेशक स्तर के अफसर बैठा करते थे लेकिन बाद में इस विभाग के पास काम बहुत कम रह गया। इलाहाबाद में निदेशक का पद खत्म कर दिया गया। अब नवाबयूसुफ रोड पर चार कमरे में एक छोटा सा दफ्तर है, जहां दर्जन भर कर्मचारी काम करते हैं।
रेलवे या रोड के माध्यम से किसी माल की ढुलाई पर एक रुपया खर्च होता है तो कार्गों जहाज पर उसी माल की ढलाई पर 25 पैसे खर्च होंगे। यानी कार्गो के जरिये परिवहन चार गुना सस्ता पड़ेगा। ऐसे में कार्गों से परिवहन महंगाई कम करने में भी मददगार साबित होगा और इलाहाबाद में भी लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।