राहत कैंपों में संदिग्ध हरकत, लश्कर आतंकी तो नहीं?
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केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद पीड़ितों के कैंपों में संदिग्ध आतंकी हरकत की सूचना मिली थी। हालांकि सरकार इस बात पर चुप है कि हरकत करने वाले लोग पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा के थे या नहीं।
गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि खुफिया विभाग ने सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे कुछ लोगों की मौजूदगी के प्रति आगाह किया था जिन्हें वहां नहीं होना चाहिए था। लेकिन सरकार को यह पक्की सूचना नहीं मिली कि ये लोग लश्कर के ही थे।
तीन दिन पहले दिल्ली पुलिस ने मेवात के दो कथित लश्कर आतंकवादियों से इसी सिलसिले में लंबी पूछताछ की थी।
राहुल के बयान पर भी मचा था हंगामा
इससे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी चुनावी सभा में लश्कर के दंगा पीड़ितों को भड़काकर अपने गुट में शामिल करने की खुफिया सूचना की बात कही थी।
राहुल के इस बयान पर जमकर सियासत हुई थी। भाजपा ने राहुल के बयान का विरोध करते हुए सूचना के स्रोत को उजागर करने की मांग की थी। दिल्ली पुलिस की मेवात के दो शख्सों से पूछताछ के बाद मामला एक बार फिर गरमा गया है।
शिंदे ने कहा कि केंद्र राज्य सरकार से कैंपों के हालात के बारे में एक हद से ज्यादा पूछताछ नहीं कर सकता।
गृहमंत्रालय उत्तर प्रदेश सरकार से कैंपों के हालात के बारे में तीन बार पूछ चुका है लेकिन राज्य सरकार लगातार अनदेखा कर रही है। शिंदे ने कहा कि केंद्र और राज्य के संबंधों की अपनी लक्ष्मण रेखा है जिसे पार नहीं किया जा सकता।
गृहमंत्री की टिप्पणी से नया सियासी विवाद
अल्पसंख्यकों की गिरफ्तारी के मामले में लोकसभा चुनाव से पहले नए सिरे से सियासी विवाद खड़ा हो सकता है।
केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने राज्यों से न केवल युवा अल्पसंख्यकों की गिरफ्तारी पर सावधानी बरतने को कहा है, बल्कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ चल रहे मामलों की समीक्षा के लिए कमेटी के गठन की बात कही है।
उधर इस मामले में भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा है कि गृहमंत्री को यह समझना चाहिए कि अपराधियों और आतंकवादियों की गिरफ्तारी को मजहब के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
यह विवाद तब भी गहराया था जब बीते साल सितंबर महीने में शिंदे ने राज्यों को पत्र लिखकर अल्पसंख्यक युवकों की गिरफ्तारी में सावधानी बरतने की हिदायत दी थी।
शिंदे ने एक कार्यक्रम के दौरान अल्पसंख्यकों की गिरफ्तारी पर फिर से वैसा ही बयान देकर सियासी विवाद को आमंत्रण दे दिया है। उन्होंने बताया है कि उन्होंने राज्यों को पत्र लिखकर अल्पसंख्यक युवकों को गिरफ्तार करने के मामले में सावधानी बरतने के लिए कहा है।
भाजपा ने आड़े हाथों लिया
बकौल शिंदे उन्होंने राज्यों को अल्पसंख्यकों के खिलाफ दायर मामलों की छानबीन कर गलत मुकदमों को सामना कर रहे अल्पसंख्यक युवाओं को राहत देने की भी सलाह दी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकी मामलों में गिरफ्तार किए गए अल्पसंख्यकों के मामले में जल्द एक छानबीन समिति बनाई जा सकती है।
शिंदे की इस टिप्पणी पर भाजपा ने उन्हें आड़े हाथों लिया है। पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडे़कर ने कहा कि देश के गृहमंत्री को कानूनी मामलों को मजहब की निगाह से नहीं देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अपराधी और आतंकवादी मामले को खासतौर से मजहब के चश्मे से देखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि एक अपराधी और आतंकवादी को कानून व्यवस्था की निगाह से देखना चाहिए न कि मजहब के आधार पर।