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शिंदे की फिसलन भरी जुबान से सरकार सचेत

Mon, 04 Feb 2013 09:55 PM IST
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
नई दिल्ली/गुंजन कुमार Updated Mon, 04 Feb 2013 09:55 PM IST
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shinde controversy statements government aware

गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की फिसलन भरी जुबान की सियासी मुसीबत से लगातार जूझ रही सरकार उन्हें महिलाओं के उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मामले से दूर रख रही है।

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दिल्ली गैंगरेप की घटना से लेकर अध्यादेश लाने के तमाम सवालों का जवाब देने के लिए सरकार ने शिंदे की जगह वित्त मंत्री पी चिदंबरम को जिम्मेदारी दी है। इसमें जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी के गठन का मामला हो या अध्यादेश को लागू करना, इन सभी पर चिदंबरम ही सरकार का पक्ष रख रहे हैं।
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हिंदू आतंकवाद को लेकर ताजा बयान से निशाने पर आए शिंदे को सरकार ने दुष्कर्म कानून को मजबूत करने के लिए लाए गए अध्यादेश पर भी बोलने का मौका देना मुनासिब नहीं समझा है। इसके लिए सोमवार को जीओएम मीडिया की प्रेस कांफ्रेंस में शिंदे की जगह चिदंबरम ने मोर्चा संभाला।
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चिदंबरम ने इस मामले में गृह मंत्रालय की ओर से तैयार मसौदे को पढ़ने से इनकार करते हुए अपनी तैयार स्क्रिप्ट के आधार पर बातें कीं। प्रेस कांफ्रेंस में गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह को भी अंतिम समय में आने से मना कर दिया गया। शुरू में मंच पर चिदंबरम, सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी के नाम की तख्ती के साथ आरपीएन की तख्ती भी लगी हुई थी। लेकिन आरपीएन के नाम वाली तख्ती को प्रेस कांफ्रेंस शुरू होने से ठीक पहले हटा लिया गया।

उच्चपदस्थ सूत्र इस अति संवेदनशील मुद्दे को संभालने में शिंदे की कमजोरी को इस हालात की वजह बता रहे हैं। लेकिन इस बारे में चिदंबरम ने कहा कि जीओएम मीडिया सरकार की तरफ से मीडिया को जानकारी देता है। लिहाजा इस मामले में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन बचाव की इस दलील के साथ चिदंबरम ने इस बात का जवाब नहीं दिया कि शिंदे जस्टिस वर्मा कमेटी से संपर्क में क्यों नहीं थे। जबकि यह पूरा मामला गृह मंत्रालय से जुड़ा है।

गौरतलब है कि जस्टिस वर्मा को इस कमेटी के लिए राजी करने की जिम्मेदारी भी शिंदे की जगह चिदंबरम की दी गई थी। कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट शिंदे को नहीं सौंपी थी बल्कि गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को विज्ञान भवन बुलाकर रिपोर्ट दी गई। बजट सत्र की तैयारी में पूरी तरह व्यस्त होने के बावजूद इस अध्यादेश की जानकारी देने शिंदे की जगह चिदंबरम खुद आए।

नाराजगी की वजह
पिछले दिनों शिंदे ने जयपुर में कांग्रेस की चिंतन बैठक में भाजपा और आरएसएस को आतंक का संचालक बता कर सरकार को बचाव की मुद्रा में ला दिया। इस पर भाजपा ने शिंदे का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है।


इससे पहले पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक की भारत यात्रा के दौरान बाबरी ढांचे और भारत विरोधी बयानों का ठीक तरह से जवाब नहीं देने के आरोप भी शिंदे पर लगे। सूत्र बताते हैं कि गैंगरेप घटना के बाद प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने और गृह सचिव आरके सिंह के दिल्ली पुलिस कमिश्नर की खुलेआम तारीफ भी सरकार को खटक रही है।

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