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प्रदेश सरकारों की राजनीति के शिकार बने शिक्षामित्र

Fri, 18 Sep 2015 02:58 AM IST
Updated Fri, 18 Sep 2015 02:58 AM IST
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shikshamitra having trouble because of state governments

उत्तर प्रदेश की शिक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 2001 में शिक्षामित्रों को संविदा कर्मचारियों के तौर पर रखा गया था।

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प्राथमिक विद्यालयों में रखे जाने से लेकर सहायक अध्यापकों के पद पर समायोजन होने तक शिक्षामित्रों के साथ प्रदेश सरकारों ने लगातार राजनीति करने का काम किया।
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प्रदेश में बनने वाली सरकारों ने इन शिक्षामित्रों को राजनीतिक हथियार के तौर इस्तेमाल करके उनको कहीं का नहीं छोड़ा है। अपने जीवन का महत्वपूर्ण 15 वर्ष शिक्षामित्रों की ओर से प्राथमिक विद्यालयों में खपाने के बाद अब उन्हें चौराहे पर खड़ा कर दिया गया है।

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एनसीटीई का माखौल उड़ाने की कोशिश

shikshamitra having trouble because of state governments

शिक्षामित्रों के समायोजन में सरकार की ओर से मनमाने तरीके से नियम बनाकर राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) का माखौल उड़ाने की कोशिश की गई।

टीईटी पूरा किए बिना और बारहवीं पास शिक्षामित्रों को दूरस्थ माध्यम से बीटीसी प्रशिक्षण देकर सहायक अध्यापक बनाने की तैयारी की गई थी। मनमाने तरीके से समायोजन किए जाने पर शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त हो चुका है।

हाईकोर्ट से समायोजन निरस्त होने के बाद अब शिक्षामित्र प्रदेश में सत्ताधारी पार्टी के हाथ खेलकर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में शिक्षामित्र न घर के रहे न घाट के।

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