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क्या है शीला के इस्तीफे के पीछे की वजह?

Wed, 27 Aug 2014 08:30 AM IST
Updated Wed, 27 Aug 2014 08:30 AM IST
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Sheila dikshit politics behind his resign.

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पद पर बने रहने के आश्वासन के बावजूद केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित ने मंगलवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

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यूपीए सरकार के दौरान नियुक्त कांग्रेस के नजदीकी राज्यपालों की सूची में शीला एक मात्र ऐसी राज्यपाल थीं, जिन्हें भाजपा फिलहाल हटाना नहीं चाह रही थी।

भाजपा के रणनीतिकारों ने सरकार को इशारा कर दिया था कि शीला को त्रिवेंदरम राजभवन में काबिज रख दिल्ली की राजनीति से दूर रखा जाए।

दिल्ली की राजनीतिक नब्ज को बारीकी से समझने वाली शीला आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुसीबत खड़े कर सकती हैं।

यही वजह थी कि सोमवार को राजनाथ से मुलाकात के दौरान शीला पर अन्य राज्यपालों की तरह इस्तीफा देने का कोई दबाव नहीं डाला गया था।

लेकिन दिल्ली की लगातार पंद्रह साल तक मुख्यमंत्री रहीं शीला ने आने वाले चुनाव के मद्देनजर इस्तीफा दे कर अपना राजनीतिक कार्ड खेल दिया है। शीला ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से सोमवार को ही अपने इस्तीफे की मंशा जाहिर कर दी थी।

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द‌िल्ली की राजनीत‌ि में शीला की एंट्री!

Sheila dikshit politics behind his resign.

सूत्रों ने बताया कि सोमवार को 18 सीटों के उपचुनाव के नतीजे में धूमिल प्रदर्शन और विपक्ष के संभावित महागठबंधन का संकेत पाकर भाजपा आगे आने वाले चुनाव के प्रति सतर्क हो गई है।

यही वजह है कि भाजपा दिल्ली के चुनावी मैदान से शीला को दूर रखना चाह रही थी।

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने जानकारी दी कि शीला को राज्यपाल के पद पर बने रहने के लिए पूरा आश्वासन गृहमंत्री की ओर से दे दिया गया था। हालांकि राजनाथ को यह अंदेशा भी था कि शीला राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर वापस दिल्ली की कमान संभाल लेंगी।

सूत्रों के मुताबिक शीला के अलावा अब तक इस्तीफा दे चुके कांग्रेस के नजदीकी राज्यपालों में कोई ऐसा नहीं था जो भाजपा को किसी राज्य में राजनीतिक स्तर पर चुनौती दे सके।

दोहराया गया इतिहास

Sheila dikshit politics behind his resign.

केंद्र की इच्छा को दरकिनार कर शीला के इस फैसले ने दिल्ली के दस साल पुराने इतिहास को दोहराया है।

2004 में केंद्र में मनमोहन सरकार के गठन के बाद भाजपा नेता मदन लाल खुराना ने ऐसे ही राजनीतिक कारणों से राजस्थान के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर दिल्ली की राजनीति में कूद पड़े थे।

उस वक्त भी यूपीए सरकार दिग्गज भाजपा नेता खुराना को दिल्ली नहीं आने देना चाहती थी। दिल्ली के 2003 दिसंबर में हुए चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक था। खुराना ने यही कह कर इस्तीफा दिया था कि उन्हें दिल्ली में भाजपा की स्थिति मजबूत करनी है।

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