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'वह हमारी हीरो थीं, तालिबान ने उन्हें जिंदा जला दिया'

Wed, 17 Dec 2014 07:56 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 17 Dec 2014 07:56 PM IST
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she was my hero taliban gunman fired on her

'वह हमारी हीरो थीं। वह न होतीं तो हम आज जिंदा नहीं होते। हैवानों ने उन्हें जिंदा जला डाला।' पेशावर के आर्मी स्कूल से बच कर निकले इरफानुल्लाह उस लम्हे को याद कर सिहर उठे।

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मंगलवार को तालिबान के आतंकियों ने पेशावर के आर्मी स्कूल में अंधाधुंध फायरिंग कर 132 बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। मरने वालों में स्कूल के टीचर और स्टाफ के नौ लोग भी शामिल थे। आतंकियों ने कक्षाओं में घुसकर मासूम बच्चों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। एक क्लास में जब टीचर ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो आतंकियों ने उन्हें जिंदा जला दिया।
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वह इरफानुल्लाह की टीचर आफशा अहमद थीं, जिनकी उम्र महज 24 साल थीं। पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में भर्ती में इरफानुल्लाह ने बताया कि अगर आफशा न रही होतीं तो वह भी मर चुके होते। वह आतंकियों और बच्चों के बीच में दीवार की तरह खड़ी हो गईं थीं।(साभार: न्यूजवीक)

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'टीचर को अंदाजा हो गया था कि क्या होने वाला है'

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15 साल के इरफानुल्लाह ने बताया, 'आतंकी जब हमारे क्लासरूम में घुसे, हम अपनी टीचर के साथ बैठे थे। जब तक हम जान पाते कि क्या हो रहा, वह खड़ी हो गईं और आतंकियों को रोकने की कोशिश की। उन्हें अंदाजा हो गया था कि क्या होने वाला है?'

आंसुओं में डूबे इरफानुल्‍लाह ने बताया कि आफशा के आतंकियों के सामने डंट कर खड़ी थीं। उन्होंने तालिबान को चुनौती देते हुए कहा कि वह अपने बच्चों को मरने नहीं देंगी। उन्होंनें कहा, 'पहले तुम सब मुझे गोली मारो, मैं अपने बच्‍चों की लाशें नहीं देख सकती।' इरफानुल्‍लाह के मुताबिक ये उनकी आखिरी शब्द थे।

तालिबानियों ने उनके शरीर पर कोई चीज फेंक दी और अगले ही पल वह आग की लपटों में घिर गईं। इरफानुल्लाह ने बताया 'हम बस यही देख पाए कि तालिबान ने उन्हें जिंदा जला डाला। वह आग की लपटों से घिरी हुईं थी फिर भी चिल्‍ला-चिल्लाकर हमें भाग जाने के लिए कह रही थीं। वह बहुत ही बहादुर थीं।'

इरफानुल्‍लाह ने कहा कि उसे दुख है कि वह अपने ‌टीचर को नहीं बचा पाया। उसने कहा कि वह हमारी हीरों थीं। वह सुपरवुमैन थी। अब हमें कौन पढ़ाएगा?

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