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नीतीश के दांव से शरद पर लटकी तलवार

Tue, 20 May 2014 11:29 AM IST
Updated Tue, 20 May 2014 11:29 AM IST
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Sharad yadav under pressure after nitish kumar resign

बिहार के मंत्री और महादलित नेता जीतन राम मांझी को अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपकर नीतीश कुमार ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं।

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नीतीश केइस दांव के बाद जनता दल(यू) में यह बहस भी शुरु हो सकती है कि पार्टी के दूसरे बड़े नेता शरद यादव भी क्या लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते  हुए इस्तीफा देंगे।

रविवार को मुख्यमंत्री आवास केबाहर जद(यू) कार्यकर्ताओं का शरद यादव के खिलाफ प्रदर्शन और विधायक दल की बैठक में हुए हंगामें से संकेत हैं कि जद(यू) में शीर्ष स्तर पर खींचतान बढ़ सकती है और अगर ऐसा हुआ तो नीतीश कुमार को पार्टी अध्यक्ष बनाने का दबाव भी बढ़ सकता है।

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जीतन राम मांझी पर खेला दांव

Sharad yadav under pressure after nitish kumar resign

कहा यह भी जा रहा है कि शरद की पसंद विजेंद्र यादव या नरेंद्र नारायण यादव थे। लेकिन आखिरकार नीतीश की ही चली और जीतन राम मांझी का नाम तय हुआ।

लोकसभा चुनाव के बाद अपने जनाधार को लेकर चिंतित नीतीश कुमार ने अपने इस कदम से एक तरफ जद(यू) के अति पिछड़ा और महादलित जनाधार को एकजुट करने की कोशिश की है, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर भी अपने खिलाफ किसी तरह के असंतोष को पूरी तरह खत्म कर दिया है।  

बिहार सरकार केवरिष्ठ मंत्री और जद(यू) के चिर बगावती नेता नरेंद्र सिंह के जरिए भाजपा जिन कुछ विधायकों को तोड़कर नीतीश सरकार को अस्थिर करकेविधानसभा चुनाव करवाने का जो दांव खेल रही थी, नीतीश ने इस्तीफे केबाद भावनात्मक माहौल बनाकर अपने पीछे पार्टी के सभी विधायकों को एकजुट करके उसे विफल कर दिया।

शरद यादव की बढ़ सकती हैं मुश्क‌िलें

Sharad yadav under pressure after nitish kumar resign

अपना मुख्यमंत्री पद छोड़कर नीतीश कुमार ने पार्टी के भीतर यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि हार की नैतिक जिम्मेदारी क्या दूसरे शीर्ष नेता भी स्वीकार करेंगे।

साथ ही नीतीश कुमार ने तमाम अटकलों को खारिज करते हुए अपने उत्तराधिकारी केरूप में उन जीतन राम मांझी को चुना है जो न सिर्फ महादलित हैं, बल्कि नीतीश के बेहद भरोसेमंद भी हैं।

बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण जिस तरह इस लोकसभा चुनाव में गड़बड़ाए हैं, उससे नीतीश और लालू यादव दोनों को अपना सामाजिक आधार बचाने का खतरा पैदा हो गया है।

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लालू को नए नाम से आपत्त‌ि नहीं!

Sharad yadav under pressure after nitish kumar resign

इसलिए दोनों के करीब आने और जद(यू) सरकार को कांग्रेस के साथ राजद के समर्थन की बातें भी चल रही हैं। उस लिहाज से जीतन राम मांझी के नाम पर लालू प्रसाद यादव को भी कोई एतराज नहीं होगा।

साथ ही रामविलास पासवान के भाजपा केसाथ चले जाने केबाद करीब डेढ़ साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा और लोजपा मिलकर जद(यू) और राजद दोनों पर भारी पड़ सकते हैं।

उसकी काट के लिए मांझी को आगे करके नीतीश ने महादलित कार्ड चल दिया है। जद (यू) महासचिव के.सी.त्यागी के मुताबिक लंबे समय बाद बिहार को एक महादलित मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है, जिसका सेहरा नीतीश कुमार के सिर पर बंधेगा कि उन्होंने अपनी कुर्सी एक महात्मा गांधी के मुताबिक समाज के अंतिम व्यक्ति माने जाने वाले उस महादलित को सौंपी जो मुसहर जाति से हैं जिन्हें महादलितों में भी अति दलित माना जाता है।

नए स‌िरे से होगी जेडीयू की तैयारी

Sharad yadav under pressure after nitish kumar resign

इसे विधानसभा चुनाव में नीतीश एक मुद्दे की तरह भुनाते हुए अपने अतिपिछड़ा, महादलित और पिछड़े मुसलमानों का गठजोड़ बनाकर अपनी सुशासन और विकासपुरुष की छवि के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे।

साथ ही अब अगर भाजपा जद(यू) सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करेगी तो उसे बिहार ही नहीं पूरे देश में एक महादलित मुख्यमंत्री को हटाने का आरोप भी झेलना पड़ेगा। अपनी नीची जाति को चुनावी मुद्दा बनाकर प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे नरेंद्र मोदी के लिए यह आसान नहीं होगा।

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